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- सड़क के आवारा कुत्तों की गिनती करते नजर आएंगे स्कूलों के शिक्षक--छिड़ी बहस
Posted by : achhiduniya
29 December 2025
शिक्षकों का मानना है कि शिक्षा एक पवित्र पेशा है और उन्हें लगातार
गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया जा रहा है। उनका सवाल है कि आवारा कुत्तों की गिनती का काम
पशुपालन विभाग को क्यों नहीं दिया गया? शिक्षकों की अनुपस्थिति
में स्कूलों में शैक्षणिक गुणवत्ता का क्या होगा? क्या इससे समाज में
शिक्षकों के सम्मान को ठेस नहीं पहुंचेगी? दिल्ली के सरकारी और
निजी स्कूलों के शिक्षक अब कक्षाओं में पढ़ाने के साथ-साथ सड़क पर आवारा कुत्तों
की गिनती करते नजर आएंगे। दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय ने एक ताजा आदेश जारी
कर सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे इस गणना अभियान के लिए
शैक्षणिक संस्थानों से नोडल अधिकारी
नियुक्त करें। इस आदेश के सामने आते ही शिक्षक
संगठनों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सरकारी स्कूल शिक्षक संघ (GSTA)
का
तर्क है कि शिक्षकों को ऐसे कामों में झोंकना उनकी गरिमा के खिलाफ है। GSTA
में
अध्यक्ष पद के उम्मीदवार कृष्णा फोगाट ने कहा,यह पूरी तरह गलत है,अगर
शिक्षक आवारा कुत्तों की गिनती करेंगे तो बच्चों की पढ़ाई का ध्यान कौन रखेगा?
क्या
पशुपालन या वन विभाग के पास इसके लिए स्टाफ नहीं है? शालीमार बाग में तैनात
एक शिक्षिका ऋतु सैनी ने बताया कि उन्हें पिछले हफ्ते ही इस ड्यूटी की जानकारी
मिली।
उन्होंने कहा कि आदेश सरकारी है, इसलिए उनके पास कोई
विकल्प नहीं बचा है। शिक्षा निदेशालय के अनुसार, यह कवायद जन सुरक्षा और
माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा 7 नंवबर 2025
को
दिए गए निर्देशों के पालन के लिए की जा रही है। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि
शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और सार्वजनिक
स्थलों से आवारा कुत्तों को हटाकर उन्हें निर्धारित आश्रय स्थलों
में
भेजा जाए। स्थानांतरण से पहले इन कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण सुनिश्चित करना भी
अनिवार्य है। निदेशालय ने इस कार्य को शीर्ष प्राथमिकता वाला बताया है।
उत्तर-पश्चिम जिले से ही लगभग 118 सरकारी शिक्षकों को इस
सूची में शामिल किया गया है। दिल्ली अकेला ऐसा राज्य नहीं है जहां इस तरह का
प्रयोग किया जा रहा है। इससे पहले उत्तर प्रदेश, कर्नाटक,
छत्तीसगढ़
और जम्मू-कश्मीर में भी आवारा कुत्तों की गणना और प्रबंधन के लिए इसी तरह के आदेश
जारी किए जा चुके हैं। फिलहाल, शिक्षक संघ इस मुद्दे
पर शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर आदेश वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
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