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- देश के करोड़ों टैक्सपेयर्स की नजरें वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा आने वाले बजट पर टिकी....
Posted by : achhiduniya
16 January 2026
एक्सपर्ट्स का मानना
है कि इस बार सरकार पुरानी टैक्स रीजीम के स्लैब में बदलाव कर सकती है। अभी तक
ओल्ड रीजीम में टैक्स स्ट्रक्चर जस का तस बना हुआ है, जबकि नई रीजीम को लगातार अट्रैक्टिव बनाया गया
है। कंजम्प्शन बढ़ाने के मकसद से सरकार मिडिल इनकम ग्रुप को राहत देने पर फोकस कर
सकती है। पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि उसकी प्रायोरिटी
मिडिल क्लास और सैलरीड टैक्सपेयर्स की जेब को राहत देने की रही है। 2020
में नई इनकम टैक्स रीजीम की शुरुआत और
उसके बाद हर साल उसमें सुधार इसी रणनीति का हिस्सा रहे हैं। पिछले बजट में नई
रीजीम के तहत 12 लाख
रुपये तक की इनकम को टैक्स-
फ्री कर सरकार ने टैक्सपेयर्स को बड़ा तोहफा दिया था। आईसीएआई की सिफारिश पर सरकार पति-पत्नी के लिए ज्वाइंट टैक्सेशन सिस्टम लाने पर विचार कर सकती है। इससे परिवार की कुल टैक्स लायबिलिटी कम होगी और टैक्स सिस्टम ज्यादा संतुलित बन सकता है। शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए राहत की खबर आ सकती है। सरकार लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस की टैक्स-फ्री लिमिट को 1.25 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये कर सकती है। नई रीजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन 75,000 रुपये कर दिया गया है,
जबकि पुरानी रीजीम में यह अभी भी 50,000 रुपये है। बढ़ती महंगाई को देखते हुए सरकार ओल्ड रीजीम में भी स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाने का ऐलान कर सकती है। वर्तमान में अलग-अलग ट्रांजेक्शंस पर कई TDS रेट्स लागू हैं, जिससे टैक्सपेयर्स में कन्फ्यूजन रहता है। बजट 2026 में सरकार TDS रेट्स को सरल बनाते हुए इन्हें 2–3 स्लैब तक सीमित कर सकती है, जिससे कंप्लायंस आसान हो जाएगा।
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