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RSS पैरामिलिट्री ऑर्गेनाइजेशन नहीं,पॉपुलैरिटी,पावर नहीं चाहिए,संघ यात्रा के 100 वर्ष-नए क्षितिज कार्यक्रम पर बोले मोहन भागवत
Posted by : achhiduniya
08 February 2026
मोहन
भागवत ने कहा, फिर से गुलामी नहीं आएगी इस बात की
गारंटी क्या है? हमारे समाज में कमी है, हम में एकता नहीं है। हमारा समय लग गया
एक काम में लेकिन किस को एक काम को करना है। सब अच्छे कामों की पूर्णता जिससे होगी,
वो करने का काम
संघ है। बीजेपी संघ की पार्टी नहीं है, संघ के स्वयंसेवक उसमे हैं। सम्पूर्ण
समाज को संगठित करने के अलावा संघ को कोई दूसरा काम नहीं करना है। वो सब करेंगे,
वो स्वयंसेवक का
काम है। संघ को लोकप्रियता नहीं चाहिए। भागवत ने कहा, संघ को देखना है तो संघ की शाखा जाइए। संघ को समाज में अलग संगठन खड़ा
नहीं करना है, क्योंकि संघ का पहला सिद्धांत है कि देश के भाग्य में परिवर्तन तब
आता है जब उसका पूरा समाज एकजुट बनता है। जो आज हमारा विरोध करते हैं,
वो भी इसी समाज
का एक अंग हैं, उनको भी हमें संगठित करना ही है। हमको सबको संगठित करना है। महाराष्ट्र के मुंबई में राष्ट्रीय
स्वयंसेवक संघ के संघ यात्रा के 100 वर्ष-नए क्षितिज
कार्यक्रम का
आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि संघ को
दूर से देखेंगे तो गलतफहमी होगी। उन्होंने कहा, संघ के स्वयंसेवक रूट मार्च करते हैं
लेकिन आरएसएस पैरामिलिट्री ऑर्गेनाइजेशन नहीं है। उन्होंने कहा,संघ के स्वयंसेवक लाठी काठी सीखते हैं,
लेकिन यह अखिल
भारतीय अखाड़ा नहीं है। संघ में घोष की धुन बजती है, व्यक्तिगत गीत होते हैं,
संगीत होता है,लेकिन
संघ अखिल भारतीय संगीतशाला नहीं है। संघ के स्वयंसेवक राजनीति में भी हैं लेकिन
संघ राजनीतिक पार्टी नहीं है।
उन्होंने कहा,संघ का जो काम है,
संघ के लिए नहीं
है। पूरे देश के लिए है, भारतवर्ष के लिए है। संघ किसी दूसरे
संगठन के कंपटीशन में नहीं निकला है, संघ किसी एक विशेष परिस्थिति की,
रिएक्शन में
प्रतिक्रिया में नहीं चला है, संघ किसी के विरोध में नहीं चला है,
हमारा काम है कि
किसी का विरोध किए बिना काम करें। संघ को पॉपुलैरिटी नहीं चाहिए,
संघ को पावर
नहीं चाहिए। मोहन भागवत ने कहा,संघ को देखना है तो संघ की शाखा देखिए,
संघ के
कार्यकर्ताओं के घर-परिवार देखिए। संघ को समाज में अलग संगठन खड़ा नहीं करना है,
प्रेशर ग्रुप
खड़ा नहीं करना है। भाग्य का परिवर्तन देश के समाज के कारण होता है,
जितने देश बड़े
हुए, कुछ
नीचे भी गिर गए, पुरानी बात नहीं कर रहा,आधुनिक बात कर रहा हूं,
अमेरिका है,
ब्रिटेन है,
फ्रांस है,
चीन है,जर्मनी है, इन सब के उत्थान पतन का 100
वर्ष का इतिहास
देख लीजिए, उस पर पुस्तक भी मिलेगी, आपको ध्यान में आएगा वहां का समाज
तैयार हुआ,उसको पहले तैयार किया गया,बाद में उसका उत्थान हुआ। मोहन भागवत
ने कहा, सबका सम्मान करो, सबका स्वीकार करो,
अपनी श्रद्धा पर
पक्के रहो, दूसरे की श्रद्धाओं का सम्मान स्वीकार करो, मिलजुल कर रहो, यह मुख्य बात है। हिंदुस्तान का स्वभाव
सनातन है। भारत धर्म प्राण है, वह जानता है कि सब कुछ एक है,
सबको साथ में
चलना है, किसी को छोड़ना नहीं है।


