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- मिडिल ईस्ट तनाव भारत की अर्थव्यवस्था को कैसे करेगा प्रभावित...?
Posted by : achhiduniya
29 March 2026
भारत एक बड़ा ऊर्जा
आयातक देश है और पश्चिम एशिया के देशों के साथ उसका व्यापार और निवेश गहराई से
जुड़ा हुआ है। इसके अलावा, खाड़ी देशों से आने वाले रेमिटेंस का भी भारतीय
अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान है। ऐसे में वहां के हालात बिगड़ने का सीधा असर भारत
पर पड़ सकता है। वित्त मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट में भी कहा गया है कि आने वाले समय
में आर्थिक स्थिति अनिश्चित बनी रह सकती है। रिपोर्ट के अनुसार,
पश्चिम एशिया में जारी संकट,
कच्चे माल की बढ़ती कीमतें और सप्लाई में
बाधाएं भारत की ग्रोथ के लिए
जोखिम पैदा कर रही हैं। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल
की कीमतों में उछाल भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है। अगर तेल और गैस
महंगे होते हैं, तो इसका
असर परिवहन, उद्योग
और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर पड़ेगा। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब
भारत की अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है। देश के चीफ इकनॉमिक एडवाइजर वी. अनंत
नागेश्वरन ने चेतावनी दी है कि ईरान से जुड़े युद्ध जैसे हालात भारत के आर्थिक
संकेतकों पर व्यापक असर डाल सकते हैं। उन्होंने साफ कहा कि ग्रोथ,
महंगाई और फाइनेंशियल बैलेंस पर इसका दबाव
बढ़ सकता है। सीईए के मुताबिक, मौजूदा हालात में देश की आर्थिक वृद्धि दर
प्रभावित हो सकती है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई बढ़ने का खतरा है,
जिसका असर आम लोगों की जेब पर भी पड़ेगा।
खासकर ईंधन से जुड़े सेक्टर में लागत बढ़ने से कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। हालांकि
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद और घरेलू मांग इस
असर को कुछ हद तक कम कर सकती है। सरकार ऊर्जा सोर्स में विविधता लाने,
महंगाई को कंट्रोल करने और आर्थिक स्थिरता
बनाए रखने के लिए लगातार कदम उठा रही है।


