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- पति वही होगा, धारा 80 और 85 के तहत जिसने महिला से….
Posted by : achhiduniya
23 July 2026
इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस अरुण कुमार
सिंह देशवाल ने फैसला सुनाया मामला भारतीय न्याय संहिता की धारा 80
(दहेज
हत्या) और धारा 85 (क्रूरता) से जुड़ा था। फैसला
सुनाते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि धारा 80 और 85
के
तहत पति वही होगा, जिसने महिला से कानूनी
रूप से शादी की हो, न कि वह व्यक्ति जिसकी
महिला के साथ शादी ही अमान्य है। आसान शब्दों में समझें तो इसका मतलब हुआ कि जिस
व्यक्ति की दूसरी शादी पहली शादी के कायम रहने की वजह से अमान्य है,
उसे
आमतौर पर पति नहीं माना जा सकता यानी,
पहली
पत्नी जिंदा है और तलाक नहीं हुआ है तो दूसरी शादी अपने आप में अमान्य है और ऐसे
मामले में व्यक्ति को दूसरी शादी में पति का दर्जा नहीं मिल सकता।
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, सुनील कुमार नाम के शख्स
की पहली पत्नी जिंदा थी। इसके बावजूद
उसने तलाक दिए बगैर दूसरी शादी कर ली,लेकिन
दूसरी पत्नी ने आत्महत्या कर ली और सुनील कुमार पर BNS की धारा 80,
85 और
दहेज कानून के तहत आरोप लगे। आरोपी ने कोर्ट में दलील दी कि महिला उसकी दूसरी
पत्नी थी, क्योंकि यह शादी तब हुई थी जब उसकी पहली शादी
कायम थी, इसलिए दूसरी शादी अमान्य
थी और
उसे पति नहीं माना जा सकता। इससे सवाल खड़ा हुआ कि अगर
किसी व्यक्ति ने पहली पत्नी के जीवित रहते हुए दूसरी शादी की है तो क्या वह धारा 80
और 85
के
तहत दूसरी पत्नी का पति माना जाएगा?
जस्टिस अरुण कुमार सिंह
देशवाल ने माना कि पहली पत्नी के रहते हुए दूसरे शादी करने वाले व्यक्ति को पति
नहीं
माना जा सकता। हालांकि, कोर्ट
ने उन दो अपवादों का भी जिक्र किया, जहां यह नियम लागू होगा।
कोर्ट
ने साफ किया कि दो परिस्थितियों में दूसरी शादी के मामले में भी व्यक्ति को पति माना
जाएगा:- अगर पहली शादी को लेकर कोई संदेह हो तो दूसरी शादी में पति के
तौर पर रह रहे व्यक्ति को धारा 80 और 85 के तहत पति की
परिभाषा में शामिल किया जाएगा।- अगर कोई व्यक्ति पहली पत्नी के होते हुए अपनी शादी को
छिपाकर दूसरी महिला से शादी करता है और दूसरी पत्नी के साथ पति के तौर पर रहता है
तो ऐसी स्थिति में भी उसे पति माना
जाएगा नहीं। कोर्ट ने आगे साफ
किया कि पहली शादी के रहते हुए की गई दूसरी शादी स्पेशल मैरिज एक्ट,
फॉरेन
मैरिज एक्ट, क्रिश्चियन मैरिज एक्ट,
पारसी
मैरिज एंड डिवोर्ट एक्ट और हिंदू मैरिज एक्ट के तहत अमान्य
होती
है। हालांकि, कोर्ट ने मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत होने वाली
शादियों को इससे अलग माना। कोर्ट ने कहा कि अगर शादी शरिया कानून से हुई है तो
दूसरी, तीसरी और चौथी शादी भी मान्य होगी और ऐसे
मामलों में मुस्लिम व्यक्ति को धारा 80 और 85
के
तहत पति माना जाएगा।


