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ड्राइविंग लाइसेंस होंगे रद्द अगर टैक्सी और ऑटो-रिक्शा चालको ने मराठी भाषा परीक्षा पास न की...
महाराष्ट्र परिवहन विभाग ने सभी गैर-मराठी ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा सीखने की समय सीमा 15 अगस्त निर्धारित की थी। विधान भवन परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए परिवहन मंत्री सरनाईक ने कहा कि लगभग 450 शिक्षकों को चालकों को कार्यात्मक मराठी सिखाने के लिए नियुक्त किया गया है और सरकार ने उन्हें भाषा सीखने के लिए 16 अगस्त तक का समय दिया है। महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने बुधवार को एक बड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर टैक्सी और ऑटो-रिक्शा चालक कार्यात्मक (Functional) मराठी भाषा परीक्षा उत्तीर्ण करने में विफल रहते हैं, तो 16 अगस्त से उनके ड्राइविंग लाइसेंस रद्द कर
दिए जाएंगे। मोटर वाहन नियमों का हवाला देते हुए परिवहन मंत्री ने स्पष्ट किया कि
महाराष्ट्र मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 4, 22 और 85 के तहत चालकों को कार्यात्मक मराठी सीखने के लिए
समय दिया गया था। इस अवधि के बीत जाने के बाद बेहद सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने साफ किया कि यदि कोई वाहन चालक इस निर्धारित मराठी परीक्षा में असफल
साबित होता है, तो
क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) को उस चालक का लाइसेंस रद्द करने का पूरा अधिकार
दे दिया गया है। परिवहन मंत्री ने कहा कि उल्लंघनों के लिए पहले 500
रुपये का जुर्माना लगाया जाता था,
लेकिन संशोधित प्रावधानों के तहत अब मराठी
भाषा परीक्षा में असफल होने वालों का लाइसेंस रद्द करने की अनुमति दी गई है।
बाइक
टैक्सी संचालकों के लिए अधिवास प्रमाणपत्र अनिवार्य किए जाने के सवाल का जवाब देते
हुए सरनाईक ने कहा कि महाराष्ट्र में दोपहिया टैक्सी सेवा आधिकारिक रूप से एक
अगस्त से शुरू होगी। इस नई सेवा के साथ ही चालकों के सामाजिक कल्याण
का भी ध्यान रखा गया है। इसके तहत प्रत्येक बाइक टैक्सी पर प्रतिदिन 5
रुपये का कल्याण उपकर (Welfare
Cess) और प्रत्येक किराये
पर अतिरिक्त 2 प्रतिशत
शुल्क वसूला जाएगा। इस राशि का उपयोग विशेष रूप से बाइक टैक्सी संचालकों के
कल्याणकारी कार्यों के लिए किया जाएगा। अंत में मंत्री ने यह भी दोहराया कि
महाराष्ट्र सरकार पर्यावरण अनुकूल इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का स्वागत करती है और राज्यभर में इनके व्यापक
उपयोग को लगातार बढ़ावा देती रहेगी।
महाराष्ट्र विवाह निमंत्रण पत्रों पर दूल्हा और दुल्हन की जन्मतिथि छापना अनिवार्य
महाराष्ट्र महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति
तटकरे ने विधानसभा में बीजेपी सदस्य अतुल भाटखालकर द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर
में कहा कि राज्य का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में बाल विवाह की घटनाओं को 10
प्रतिशत से नीचे
लाना है। महाराष्ट्र में बाल विवाह पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार विवाह
निमंत्रण पत्रों पर दूल्हा और दुल्हन की जन्मतिथि छापने के नियम पर विचार कर रही
है। मंत्री ने बताया कि महाराष्ट्र ने राजस्थान सरकार को पत्र लिखकर विवाह
निमंत्रण पत्रों पर वर-वधू दोनों की जन्मतिथि अंकित करने की उसकी व्यवस्था का
अध्ययन किया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण विकास विभाग और विधि एवं
न्याय विभाग के साथ परामर्श करके
इस व्यवस्था को लागू करने की व्यवहार्यता पर
विचार करेगी। उन्होंने कहा कि राज्य में बाल विवाह दर 2019-21 के सर्वे के 21.9 प्रतिशत से घटकर 2023-24
में 19.6
प्रतिशत हो गई
है, जबकि
नवीनतम सर्वेक्षण में राष्ट्रीय औसत लगभग 20.1 प्रतिशत है। मंत्री ने बताया कि 2025-26
में अब तक 1,434
बाल विवाह रोके
गए हैं और 136 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024-25
में 1,495
बाल विवाह रोके
गए, जबकि
2023-24 में
1,253 मामले
रोके गए और 108 प्राथमिकी दर्ज हुईं। मंत्री ने कहा, "बाल विवाह रोकने के मामलों में वृद्धि
को बाल विवाह बढ़ने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह सरकारी तंत्र की बेहतर
पहचान, रिपोर्टिंग और हस्तक्षेप को दर्शाता है।" उन्होंने बताया कि बाल
विवाह में शामिल परिवार के सदस्यों के अलावा उन लोगों पर भी
कार्रवाई की जा रही है जो इस तरह के आयोजनों को जानबूझकर बढ़ावा देते हैं,
जिनमें पुजारी,
संगीतकार और
अन्य शामिल हैं। मंत्री ने सदन को बताया कि जिला स्तर पर कलेक्टरों की अध्यक्षता
में कार्यबल, ग्राम सुरक्षा समितियां तथा तालुका और ग्राम पंचायत स्तर की समितियां
सक्रिय रूप से काम कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि छह जिलों को विशेष तौर
पर ध्यान दिए जाने के लिए चिन्हित किया गया है, जहां प्रवासन एक प्रमुख कारण बनकर उभरा
है, विशेषकर
बीड और मराठवाड़ा क्षेत्र के अन्य जिलों में, जहां परिवार गन्ना कटाई के काम के लिए
पलायन करते हैं। उन्होंने कहा कि समस्या से निपटने के लिए प्रवासी श्रमिकों के बीच
लक्षित जागरूकता अभियान चलाने और बच्चों को सुरक्षित वातावरण में रखने के लिए बाल
देखभाल केंद्रों एवं आवासीय सुविधाओं के विस्तार की योजना है।
स्कूलों में राष्ट्रगान-राष्ट्रगीत के साथ गायत्री मंत्र पाठ अनिवार्य…
राज्य में नया
शैक्षणिक सत्र मंगलवार से शुरू हुआ। हालांकि कांग्रेस ने स्कूलों में हिंदू
प्रार्थनाओं का पाठ अनिवार्य करने की जरूरत पर सवाल उठाए, क्योंकि वहां दूसरे धर्मों के छात्र भी पढ़ते
हैं। उन्होंने बीजेपी सरकार पर स्कूलों में RSS का एजेंडा थोपने की कोशिश करने का आरोप लगाया। दरअसल,छत्तीसगढ़ सरकार ने सभी स्कूलों में शैक्षणिक
सत्र 2026-27 से राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के साथ-साथ गायत्री मंत्र और अन्य हिंदू
प्रार्थनाओं का रोजाना पाठ अनिवार्य कर दिया है। उन्होंने कहा कि रोजाना
सांस्कृतिक, शैक्षिक
और मूल्यों पर आधारित गतिविधियां कराने का मकसद देशभक्ति की भावना जगाना,
छात्रों के बौद्धिक विकास को बढ़ावा देना
और उन्हें भारतीय संस्कृति और परंपराओं से परिचित कराना है। एक अधिकारी ने बताया
कि स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 12 जून को सभी ज़िला शिक्षा अधिकारियों (DEOs)
को जारी आदेश के अनुसार,
स्कूल अब दिन में तीन अलग-अलग समय पर
अनिवार्य गतिविधियां आयोजित
करेंगे। उन्होंने कहा कि नई गाइडलाइंस के तहत,
सुबह की सभा में राष्ट्रगान,
राष्ट्रगीत, दीप मंत्र, सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र और महान हस्तियों की जीवनियों का पाठ
शामिल होगा। दोपहर के भोजन के समय छात्र मिलकर भोजन मंत्र का पाठ करेंगे,
जबकि स्कूल के दिन के आखिरी सेशन में
राज्य गीत, गायत्री
मंत्र और शांति मंत्र शामिल होंगे।
अधिकारी ने बताया कि इस पहल का मकसद छात्रों
में देशभक्ति, अनुशासन,
नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक जागरूकता को
बढ़ावा देना है, साथ ही
उन्हें भारतीय परंपराओं और राष्ट्रीय आदर्शों से जोड़ना है। सरकार ने DEO
को आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने
का निर्देश दिया है। अधिकारी स्कूलों का निरीक्षण करेंगे और तय गाइडलाइंस का
उल्लंघन करने वाले स्कूल मैनेजमेंट या प्रिंसिपलों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की
जा सकती है। हालांकि सरकार के इस फैसले पर छत्तीसगढ़ कांग्रेस के संचार विभाग के
अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने विरोध जताया। उन्होंने कहा कि भारत की शिक्षा
व्यवस्था ने पारंपरिक रूप से सभी धर्मों को समान मान है। उन्होंने चेतावनी दी कि
सरकारी स्कूलों में हिंदू धार्मिक मंत्रों का अनिवार्य पाठ दूसरे समुदायों के
लोगों को कुरान, गुरबानी
या बाइबिल की आयतों को शामिल करने की मांग करने के लिए प्रेरित कर सकता है। वहीं
वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंह देव ने भी इस कदम की
आलोचना करते हुए कहा कि यह संविधान की भावना के खिलाफ है।
पश्चिम बंगाल आयुष्मान भारत योजना के दायरे में आएंगे 1.36 करोड़ से ज्यादा परिवार
पश्चिम बंगाल शुभेंदु अधिकारी ने कोलकाता में स्वास्थ्य
विभाग के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बंगाल में 1.36
करोड़
से ज्यादा परिवारों को आयुष्मान भारत योजना के दायरे में लाया जाएगा। उन्होंने कहा,
इससे
ये सुनिश्चित होगा कि राज्य की बड़ी आबादी को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का
लाभ मिले। बताते चलें कि आयुष्मान भारत योजना,
भारत
सरकार की एक प्रमुख स्वास्थ्य बीमा योजना है। इस योजना के तहत पात्र परिवारों को
हर साल सरकारी और कुछ प्राइवेट अस्पतालों में 5 लाख तक का फ्री
(कैशलेस) इलाज मिलता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में 467
प्रधानमंत्री
जनऔषधि केंद्र संचालित किए जाएंगे और कैंसर सहित गंभीर बीमारियों की दवाएं जल्द ही
30 प्रतिशत सब्सिडी पर उपलब्ध कराई जाएंगी। मुख्यमंत्री
ने अलीपुरद्वार, कलिम्पोंग, दक्षिण दिनाजपुर और
पश्चिम बर्द्धमान जिलों में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की भी घोषणा की। उन्होंने
कहा,कोई भी जिला मेडिकल कॉलेज के लाभ से वंचित
नहीं रहना
चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग अस्पतालों में कथित बिचौलियों और मरीजों
को अनावश्यक रूप से रेफर किए जाने के खिलाफ कतई बर्दाश्त नहीं करने
की
नीति अपनाएगा। शुभेंदु ने कहा कि जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों की चौबीसों
घंटे निगरानी के लिए स्वास्थ्य भवन में एक केंद्रीय
नियंत्रण कक्ष स्थापित किया जा रहा है। शुभेंदु अधिकारी ने कहा
कि केंद्र ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए 2103
करोड़
रुपये मंजूर किए हैं, जिनमें से 527
करोड़
रुपये मिल भी चुके हैं। इन फंड्स से पूरे राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर
बनाने में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री स्वास्थ्य विभाग का प्रभार भी संभाल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत लाभार्थियों को निर्धारित सरकारी
अस्पतालों में 5 लाख रुपये तक का फ्री स्वास्थ्य बीमा कवर
मिलेगा। उन्होंने कहा कि भारत के अन्य हिस्सों में काम करने वाले प्रवासी श्रमिक
भी इस योजना का लाभ उठा सकेंगे। शुभेंदु ने कहा, ''राज्य के सरकारी
अस्पताल अब 'आयुष्मान मंदिर' के नाम से जाने जाएंगे।
अगर कोई मरीज दवाओं पर महीने में 1000 रुपये खर्च करता है,
तो
उसे वही दवाएं इन अस्पतालों में 100 रुपये में उपलब्ध
होंगी। नियंत्रण कक्ष सरकारी
स्वास्थ्य सुविधाओं में स्वच्छता, सेवा वितरण और
प्रशासनिक कामकाज की भी निगरानी करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोलकाता मेडिकल
कॉलेज के एक डॉक्टर के खिलाफ गंभीर रूप से बीमार मरीज को रेफर करने के मामले में
पहले ही कार्रवाई शुरू कर दी गई है। शुभेंदु ने उन प्राइवेट अस्पतालों से संबंधित
नीतिगत फैसले की भी घोषणा की, जिन्हें सरकार से एक
रुपये की नाममात्र दर पर जमीन मिली थी। ऐसे अस्पतालों को सरकारी स्वास्थ्य
केंद्रों से भेजे गए आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए 15 प्रतिशत तक बिस्तर
आरक्षित रखने होंगे। उन्होंने कहा,अगर सरकारी अस्पतालों
पर ज्यादा दबाव है और मरीजों को इन प्राइवेट अस्पतालों में भेजा जाता है,
तो
उन्हें मरीजों को भर्ती करना होगा। हमने यह भी फैसला किया है कि ऐसे मरीजों का
इलाज फ्री किया जाना चाहिए।
मदरसों में भी वंदे मातरम् अनिवार्य
13 मई की शाम को पश्चिम बंगाल शिक्षा विभाग ने भी
राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में ‘वंदे मातरम्’
गाना
अनिवार्य करने संबंधी अधिसूचना जारी की थी। राज्य के नए और 9वें मुख्यमंत्री
शुभेंदु अधिकारी ने 14 मई को अपने आधिकारिक
सोशल मीडिया अकाउंट पर शिक्षा विभाग की अधिसूचना शेयर की थी। बता दें कि इसी साल
फरवरी 2026 में केंद्र सरकार ने
वंदे मातरम् को राष्ट्रगान (जन गण मन) के बराबर का दर्जा दिया था। दरअसल,पश्चिम बंगाल की नई
नवेली सरकार ताबड़तोड़ फैसले ले रही है। राज्य के सभी सरकारी और सरकारी सहायता
प्राप्त स्कूलों में वंदे मातरम् अनिवार्य कर दिया है।
वहीं, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के सभी
मदरसों में भी इस राष्ट्रीय गीत का गायन पूरी तरह से अनिवार्य कर दिया है। बंगाल
सरकार के मदरसा शिक्षा निदेशायल ने एक आदेश जारी कर यह
ऐलान किया है। राज्य के अल्पसंख्यक
मामलों और मदरसा शिक्षा मंत्री खुदीराम टुडू ने इस फैसले की पुष्टि की है।
उन्होंने कहा कि जब राज्य के अन्य सरकारी स्कूलों और संथाली भाषा में पढ़ाई कराने
वाले स्कूलों में भी 'वंदे मातरम्'
निवार्य
है, तो मान्यता प्राप्त मदरसों में इसे अनिवार्य क्यों
नहीं किया जा सकता? आधिकारिक आदेश में साफ
कहा गया है कि पुराने सभी नियमों और प्रथाओं को रद्द करते हुए यह नया नियम तत्काल
प्रभाव से लागू किया जा रहा है। इसके दायरे में अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा
विभाग के तहत आने वाले सभी सरकारी मॉडल मदरसे (अंग्रेजी माध्यम),
मान्यता
प्राप्त सहायता प्राप्त मदरसे, स्वीकृत मदरसा शिक्षा
केंद्र, शिशु शिक्षा केंद्र और मान्यता प्राप्त
गैर-सहायता प्राप्त मदरसे शामिल होंगे।
कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम जरूर दें…DL-CM रेखा गुप्ता
पश्चिमी एशिया में जारी तनाव के कारण दुनिया भर में ईंधन की कीमतें बढ़ी
हैं। भविष्य में भी कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इसी वजह
से पेट्रोल, डीजल और एलपीजी के दाम बढ़ रहे हैं। इनकी खपत
कम करने के लिए सरकार खुद कई उपाय अपना रही है और लोगों से भी ऐसा करने के लिए कह
रही है। दिल्ली सरकार ने सभी
प्राइवेट कंपनियों को सलाह दी है कि सप्ताह में कम से कम दो दिन कर्मचारियों को
वर्क फ्रॉम होम जरूर दें। इसके साथ ही ऑफिस टाइम में बदलाव करने और कर्मचारियों को
कार पूलिंग करने की सलाह दी है। दिल्ली सरकार की तरफ से सभी नागरिकों से पब्लिक
ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करने की अपील की है। दिल्ली सरकार की तरफ से कहा गया है
कि ईंधन बचाने के लिए ये उपाय जरूरी हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने
शुक्रवार से ऑनलाइन बैठकों का सिलसिला शुरू कर
अधिकारियों को सरकार के निर्णयों को
लागू करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने ईंधन बचाने के लिए 90
दिवसीय
मेरा भारत मेरा योगदान नाम से एक अभियान शुरू
किया है, जिसके तहत सरकार की 50 प्रतिशत बैठकें ऑनलाइन
आयोजित की जानी है। सीएम गुप्ता ने इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के
ऊर्जा संरक्षण, संसाधनों की बचत और जिम्मेदार जीवनशैली अपनाने
के आह्वान को ध्यान में रखते हुए प्रशासनिक स्तर पर ऑनलाइन बैठकें शुरू कर दी हैं। गुप्ता
ने सचिवालय में संभागीय आयुक्त, सभी जिलाधिकारियों
(डीएम) और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ऑनलाइन बैठक कर सरकार के
निर्णयों को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों
से कहा कि अधिकतम सरकारी बैठकों को ऑनलाइन माध्यम से आयोजित किया जाए ताकि ईंधन,
समय
और संसाधनों की बचत सुनिश्चित हो सके। आम जनता को राहत देने के लिए दिल्ली सरकार ने विमान के ईंधन पर लगने वाले
वैट में बड़ी कटौती की है।
पहले जेट फ्यूल में 25 फीसदी वैट लगता था। अब
इसे कम करके सात फीसदी कर दिया गया है। इससे दिल्ली एयरपोर्ट में फ्यूल भरवाने
वाले विमानों को महंगाई की मार से थोड़ी राहत मिलेगी और लोगों का किराया भी कम हो
सकता है। सरकार ने कहा कि इस फैसले से एयरलाइन कंपनियों और यात्रियों को लाभ मिलने
की उम्मीद है। सीएम ने सभी विभागों को
बिजली की खपत कम करने के लिए प्रभावी कदम उठाने, कार्यालयों में ऊर्जा
बचत के उपाय अपनाने तथा जिम्मेदार प्रशासनिक कार्यशैली विकसित करने के निर्देश
दिए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी विभाग अपने वाहनों के ईंधन खर्च में कम से
कम 20 प्रतिशत तक कमी सुनिश्चित करें। गुप्ता ने मेट्रो
मंडे पहल को प्राथमिकता देने पर जोर देते हुए कहा
कि अधिकारी और कर्मचारी सप्ताह में एक दिन मेट्रो तथा सार्वजनिक परिवहन का अधिकतम
उपयोग करें, ताकि आमजन के बीच सकारात्मक संदेश जाए। इसके
साथ ही उन्होंने सप्ताह में एक दिन नो व्हीकल डे वाहन रहित दिवस
को भी
प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि अटल कैंटीन,
आरोग्य
मंदिर, अग्निशमन विभाग के कार्यालयों तथा अन्य
जनसुविधाओं से जुड़े केंद्रों का नियमित दौरा कर वहां की व्यवस्थाओं को दुरुस्त
किया जाए।
BMC से बने 87,347 फर्जी जन्म प्रमाणपत्र-बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों के नाम पर....
BMC के हेल्थ डिपार्टमेंट की जांच में खुलासा हुआ,
जिसने पूरे मामले की
गंभीरता को उजागर किया। जांच में सामने आया कि मेडिकल हेल्थ ऑफिसर्स ने नियमों का उल्लंघन करते
हुए आधिकारिक Civil Registration System (CRS) पोर्टल का इस्तेमाल नहीं किया।
इसके बजाय, उन्होंने पुराने SAP-CPWM सिस्टम का उपयोग कर जन्म और
मृत्यु रिकॉर्ड में हेरफेर किया और अब यह सीधे तौर पर Registrar
General of India द्वारा तय किए गए दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है, जिससे सिस्टम में बड़े स्तर
पर गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है। दरअसल,मुंबई के नागरिक प्रशासन
विभाग में एक बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है,जहां करीब 87,347
फर्जी जन्म
प्रमाणपत्र जारी
किए जाने का मामला सामने आया है। जांच में पता चला है कि ये प्रमाणपत्र कथित तौर
पर बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों के नाम पर बनाए गए,
जिससे सरकारी रिकॉर्ड की
विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आंकड़ों के मुताबिक,
2024 से 2026
के बीच कुल 87,347
फर्जी एंट्री की गईं। साल 2024
में 30,507
मामले सामने आए,
जो 2025
में बढ़कर 49,705
हो गए,
जबकि 2026
में अब तक 7,135
केस दर्ज किए गए हैं। इस
पूरे मामले की रिपोर्ट हाल ही में नगर आयुक्त अश्विनी भिडे को सौंपी गई है,
BMC ने सभी वार्ड्स में
जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रेशन का व्यापक ऑडिट कराने का फैसला लिया है।
इसके साथ ही
पूरे शहर में सिविक
विजिलेंस डिपार्टमेंट को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि घोटाले की पूरी परतें
खोली जा सकें। रिपोर्ट की सिफारिशों के
अनुसार, 24 वार्ड्स में MHOs का चरणबद्ध तबादला किया
जाएगा, ताकि सिस्टम में पारदर्शिता लाई जा सके। पहले चरण में
अंधेरी (K West), दहिसर (R
North) और भायखला (E Ward) के अधिकारियों के तबादले की
तैयारी है। इससे पहले BMC ने M/East
वार्ड में 2
MHOs और 2
क्लर्क्स को सस्पेंड किया
था और 237 फर्जी प्रमाणपत्र रद्द किए गए थे। साथ ही कुर्ला (L
Ward) और भायखला (E
Ward) में भी अधिकारियों
के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है। इस मामले को लेकर बीजेपी नेता किरिट
सोमैया ने आज़ाद मैदान पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। सोमैया ने
चेतावनी दी है कि अगर 7 दिनों के भीतर पुलिस ने
कानूनी कार्रवाई नहीं की, तो वे बॉम्बे हाईकोर्ट का
रुख करेंगे। यह मामला उस समय सामने आया है, जब मुंबई में अवैध
बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों की पहचान के लिए अभियान चलाया जा रहा है। फरवरी
में मेयर बनने के बाद रीतु तावड़े ने अवैध घुसपैठियों और फेरीवालों के खिलाफ सख्त
कार्रवाई के निर्देश दिए थे। अब इस पूरे घोटाले के सामने आने के बाद,
मुंबई के नागरिक सिस्टम में
पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
राज्य से उर्दू को हटाने का फैसला...
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर
अब्दुल्ला ने कहा कि सरकार ने आलोचकों से कोई ऐसा सरकारी आदेश दिखाने को कहा था
जिसमें उर्दू को हटाया गया हो। इस पर सीएम ने कहा, उन्होंने सिर्फ वह आदेश दिखाया जिसमें हमने लोगों की राय मांगी थी। अगर कोई
राय मांगने और किसी विषय को हटाने के बीच का फर्क नहीं समझ सकता,
तो यह बदकिस्मती है।
दरअसल,अब्दुल्ला ने शुक्रवार (1 मई) को साफ कर दिया कि राज्य से
उर्दू को हटाने का कोई फैसला नहीं लिया गया है। उन्होंने साफ किया कि सरकार ने सिर्फ
लोगों की राय मांगी है। सीएम अब्दुल्ला ने राजनीतिक विरोधियों पर गलत जानकारी
फैलाने का आरोप लगाया। वह पंपोर में एस्टेट विभाग के दो नए ब्लॉक का उद्घाटन करने
पहुंचे थे। इस मौके पर पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री उमर ने कहा,
"उर्दू को हटाया नहीं
जा रहा है। भगवान हमें ऐसे लोगों से बचाए जो सच और झूठ में फर्क नहीं कर सकते।
बदकिस्मती से, यह गुट और इसका नेतृत्व झूठ के अलावा
कुछ नहीं देखता।
पीडीपी नेता इल्तिजा मुफ्ती
के विरोध पर उमर अब्दुल्ला ने कहा, "वह पढ़ी-लिखी हैं, लेकिन शायद उन्हें अभी भी
लोगों की राय मांगने और असल में किसी विषय को हटाने के बीच का फर्क समझने की जरूरत
है। ऐसे किसी भी प्रस्ताव से जुड़ी फाइल अभी भी मेरी मेज पर है। मैंने इसे मंजूरी
नहीं दी है और न ही मेरा ऐसा कोई इरादा है। सीएम ने कहा कि भले ही
विभाग की तरफ से कोई प्रस्ताव आया हो, लेकिन उसे मंजूरी नहीं मिली
है। एक चुनी हुई सरकार के तौर पर, लोगों की राय लेना हमारी
जिम्मेदारी है। जारी किया गया आदेश सिर्फ़ इसी मकसद के लिए था। जिनके पास कुछ भी
रचनात्मक देने के लिए नहीं है, वे झूठ पर आधारित अपनी
राजनीति चमकाने की कोशिश कर रहे हैं। आरटीआई से जुड़े दावों पर
एक सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पीडीपी लोगों का ध्यान
भटकाने की कोशिश कर रही है। "उन्होंने पहले बीजेपी का
समर्थन किया था और अब वे ऐसे मुद्दे उठाकर और सिर्फ उर्दू पर ध्यान केंद्रित करके
लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।
EVM में छेड़छाड़ और धांधली,स्ट्रॉन्ग रूम पहुंचीं तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी
आयोग के अनुसार,
सभी EVM सुरक्षित तरीके से सील कर रखी गई हैं। इसके अलावा उसी परिसर में पोस्टल बैलेट के लिए अलग स्ट्रॉन्ग रूम बनाया गया है,
जहां विभिन्न पोलिंग कर्मियों और ETBPS के तहत आए मतपत्र रखे गए हैं। EC ने बताया कि इस प्रक्रिया की जानकारी पहले ही सभी पर्यवेक्षकों और रिटर्निंग अधिकारियों (RO) को दी गई थी,
और RO ने ईमेल के जरिए उम्मीदवारों और उनके एजेंटों को भी सूचित किया था। पोस्टल बैलेट की छंटनी शाम 4 बजे से स्ट्रॉन्ग रूम के कॉरिडोर में की जा रही थी,
जबकि मुख्य स्ट्रॉन्ग रूम पूरी तरह बंद और सुरक्षित रहे। आयोग ने यह भी कहा कि पूरी स्थिति शशि पांजा,
कुणाल घोष और बीजेपी नेता काली को दिखा दी गई थी। दरअसल,पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी गुरुवार को भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र के
स्ट्रॉन्ग रूम पहुंचीं और EVM में छेड़छाड़ और धांधली के आरोप लगाए। यह स्ट्रॉन्ग रूम दक्षिण कोलकाता के सखावत मेमोरियल स्कूल में बनाया गया है, जहां 29 अप्रैल को हुए मतदान की EVM रखी गई हैं। ममता बनर्जी भारी बारिश के बीच शाम को वहां पहुंची थीं। इस दौरान कोलकाता के महापौर और टीएमसी नेता फिरहाद हाकिम भी मौके पर पहुंचे, लेकिन वे मुख्यमंत्री से नहीं मिल सके। फिरहाद हाकिम ने कहा कि ममता बनर्जी अपने चुनाव एजेंट के साथ पहले ही अंदर जा चुकी थीं और उम्मीदवार होने के अधिकार के तहत निरीक्षण कर रही थीं। हाकिम ने कहा, 'मुझे अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली, इसलिए मैं यह नहीं बता सकता कि अंदर क्या हो रहा है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ जब पार्टी के दो वरिष्ठ उम्मीदवार कुणाल घोष और शशि पांजा ने खुदीराम अनुशीलन केंद्र के बाहर धरना शुरू कर दिया। उनका आरोप था कि यहां रखी ईवीएम के साथ छेड़छाड़ की जा रही है। कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि दोपहर करीब 3:30 बजे तक पार्टी कार्यकर्ता स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर मौजूद थे, लेकिन अचानक एक ईमेल के जरिए सूचना दी गई कि शाम 4 बजे स्ट्रॉन्ग रूम खोला जाएगा। उन्होंने कहा, 'जब हमने अपने कार्यकर्ताओं से संपर्क किया तो पता चलाकि वे वहां से जा चुके हैं। हम तुरंत पहुंचे, लेकिन हमें अंदर जाने नहीं दिया गया, जबकि बीजेपी को बुलाया जा रहा है।' उन्होंने लाइव स्ट्रीम में भी गड़बड़ी के आरोप लगाए और पूछा कि अगर पोस्टल बैलेट की प्रक्रिया चल रही है, तो उसकी जानकारी पहले क्यों नहीं दी गई। शशि पांजा ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि स्ट्रॉन्ग रूम बेहद संवेदनशील जगह होती है और इसे खोलने से पहले सभी राजनीतिक दलों को जानकारी दी जानी चाहिए थी। इस बीच, कोलकाता के चौरंगी इलाके में स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के नेताओं और समर्थकों के बीच झड़प हो गई। स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब बीजेपी नेता तपस रॉय मौके पर पहुंचे। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई और सुरक्षा बलों को स्थिति संभालने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा।

























