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- कॉलेज नहीं…………..पसंद का कोर्स चुनें
Posted by : achhiduniya
26 July 2015
पैरेंट्स को इस मामले में खास ध्यान देना चाहिए। ऐसे कई उदाहरण हैं कि बच्चा कोई दूसरा कोर्स करना चाहता है लेकिन पैरेंट्स ने हाई पैकेज को ध्यान में रखते हुए बच्चे को कोई और कोर्स दिलवा दिया। नतीजा यह हुआ कि बच्चा उस कोर्स को ठीक से पढ ही नहीं पाया। दिल्ली यूनिवर्सिटी में ग्रेजुएशन लेवल पर 54,000 हजार सीटें हैं और 3 लाख से ज्यादा एप्लिकेशन, यह ट्रेंड दिखाता है कि डीयू में एक-एक सीट के लिए कॉम्पिटिशन हाई लेवल तक पहुंच गया है। दूसरे राज्यों के स्टूडेंट्स का नंबर भी हर साल बढ रहा है।
जहां तक डीयू की बात है तो स्टूडेंट्स के लिए कोर्स या कॉलेज का सवाल सबसे अहम नजर आ रहा है। सीबीएसई में 95 पर्सेंट से ज्यादा स्कोर करने वाले 8 गुना तक बढ गए हैं और ऐसे में सभी स्टूडेंट्स को तो कैंपस कॉलेजों में एडमिशन नहीं मिल सकता। अच्छा रिजल्ट जरूरी है किसी भी कॉलेज से पढे, अगर रिजल्ट अच्छा होगा तो अच्छी जॉब भी मिलेगी। ज्यादातर स्टूडेंट्स दोस्तों के कहने पर कोर्स में एडमिशन ले लेते हैं या फिर पैरेंट्स बताते हैं कि यह कोर्स करना है। सबसे अहम यह है कि स्टूडेंट को अपनी पसंद के कोर्स में एडमिशन के लिए ट्राई करना चाहिए।
एकेडमिक कोर्सेज, प्रोफेशनल कोर्सेज के अलावा भी करियर ऑप्शन की बहुत बडी दुनिया है। जिस तरह से इंजीनियरिंग या मैनेजमेंट कोर्सेज को करने के बाद लाखों का पे-पैकेज मिल सकता है। सोशल वर्क, स्क्रिप्ट राइटिंग, फिल्म मेकिंग, सेमिनार आर्गेनॉइजर, एडवेंचर स्पोर्ट्स, वेडिंग कोरियॉग्राफर, टी- शर्ट डिजाइनर, वाइल्ड लाइफ फोटॉग्राफर, ईवेंट मैनेजमेंट, इंटीरियर उसी तरह से ऑफबीट करियर से भी आप बहुत कुछ हासिल कर सकते हैं।



