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- करे योग रहे निरोग...........ताडासन
Posted by : achhiduniya
07 August 2015
ताड शब्द का अर्थ है पहाड, ताड या खजूर का पेड.. इस आसन के अभ्यास से व्यक्ति को स्थायित्व पाना और शारीरिक दृढता आती है तथा यह खडे होकर किए जाने वाले सभी आसनों का आधार है। अभ्यास विधि : सर्व प्रथम पैरों पर खडे होना चाहिए तथा दोनों पैरों के बीच दो इंच की दूरी रखनी चाहिए। दोनों हाथों की अंगुलियों को एक दूसरे से आपस में मिलाएं तथा हथेलियों को बाहर की ओर रखते हुए श्वास को शरीर के अंदर ग्रहण करें।
भुजाओं को ऊपर की ओर करके कंधों को एक सीध में लाना चाहिए। पैर की एडियों को पृथ्वी से ऊपर उठाएं और पैर के अंगुलियों पर खुद का संतुलन बनाए। श्वास को शरीर से बाहर छोडते हुए एडियों को वापस पृथ्वी पर लाए। अब हाथ की अंगुलियों को अलग-अलग करते हुए भुजाओं को काया के समानांतर ले आना चाहिए और प्रारंभिक स्थिति में आना चाहिए।
लाभ :इस आसन के अभ्यास से शरीर में स्थायित्व आता है। मेरुदण्ड से संबंधित नाडियों के रक्त संचय को ठीक करने में सहयोग करता है। गलत शरीराकृति को ठीक करता है। एक निश्चित उम्र तक लंबाई बढाने में सहयक है। सावधानियां:- हृदय संबंधी समस्याओं, वैरिकोज वेन्स (Veins) और चक्कर आने की स्थिति में अंगुलियों पर ऊपर उठने की स्थिति से बचना चाहिए।


