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- चलो बुलावा आया है..मैहर देवी माता.....
Posted by : achhiduniya
15 October 2015
मध्यप्रदेश
के चित्रकूट
से लगे
सतना जिले
में मैहर
शहर की
लगभग 600 फुट
की ऊंचाई
वाली त्रिकुटा
पहाड़ी
पर मां
दुर्गा
के शारदीय
रूप श्रद्धेय
देवी माँ
शारदा
का मंदिर
स्थित
है, जो
मैहर देवी
माता के
नाम से
सुप्रसिद्ध
हैं।इस
तीर्थस्थल
के सन्दर्भ
में दन्तकथा
प्रचलित
है।कहते
हैं आज
से 200 साल
पहले मैहर
में महाराज
दुर्जन
सिंह जुदेव
राज्य
करते थे।उन्हीं
कें राज्य
का एक
ग्वाला गाय
चराने
के लिए
जंगल में
आया करता
था।इस
घनघोर
भयावह
जंगल में
दिन में
भी रात
जैसा अंधेरा
छाया रहता
था।तरह-तरह की
डरावनी
आवाजें
आया करती
थीं। एक
दिन उसने
देखा कि
उन्हीं
गायों
के साथ
एक सुनहरी
गाय कहां
से आ
गई और
शाम होते
ही वह
गाय अचानक
कहीं चली
गई। दूसरे
दिन जब
वह इस
पहाड़ी
पर गायें
लेकर आया
तो देखता
है कि
फिर वही
गाय इन
गायों
के साथ
मिलकर
घास चर
रही है।
तब उसने
निश्चय
किया कि
शाम को
जब यह
गाय वापस
जाएगी, तब
उसके पीछे-पीछे
जाएगा। गाय
का पीछा
करते हुए
उसने देखा
कि वह
ऊपर पहाड़ी
की चोटी
में स्थित
एक गुफा
में चली
गई और
उसके अंदर
जाते ही
गुफा का
द्वार
बंद हो
गया। वह
वहीं गुफा
द्वार
पर बैठ
गया। उसे
पता नहीं
कि कितनी
देर कें
बाद गुफा
का द्वार
खुला।लेकिन
उसे वहां
एक बूढ़ी
मां के
दर्शन
हुए।तब
ग्वाले
ने उस
बूढ़ी
महिला
से कहा, माई
मैं आपकी
गाय को
चराता
हूं, इसलिए
मुझे पेट
के वास्ते
कुछ मिल
जाए। मैं
इसी इच्छा
से आपके
द्वार
आया हूं। बूढ़ी
माता अंदर
गई और
लकड़ी
के सूप
में जौ
के दाने
उस ग्वाले
को दिए
और कहा, अब
तू इस
भयानक
जंगल में
अकेले
न आया
कर।
वह
बोला, माता
मेरा तो जंगल-जंगल
गाय चराना
ही काम
है।लेकिन
मां आप
इस भयानक
जंगल में
अकेली
रहती हैं? आपको
डर नहीं
लगता। तो
बूढ़ी
माता ने
उस ग्वाले
से हंसकर
कहा- बेटा
यह जंगल, ऊंचे
पर्वत-पहाड़
ही मेरा
घर हैं,मै
यही निवास
करती हूं।
इतना कह
कर वह
गायब हो
गई।ग्वाले
ने घर
वापस आकर
जब उस
जौ के
दाने वाली
गठरी खोली, तो
वह हैरान
हो गया।जौ
की जगह
हीरे-मोती
चमक रहे
थे।उसने
सोचा- मैं
इसका क्या
करूंगा।
सुबह होते
ही महाराजा
के दरबार
में पेश
करूंगा
और उन्हें
आप बीती
कहानी
सुनाऊंगा। दूसरे
दिन भरे
दरबार
में वह
ग्वाला
अपनी फरियाद
लेकर पहुंचा
और महाराजा
के सामने
पूरी आप बीती
सुनाई।उस
ग्वाले
की कहानी
सुन राजा
ने दूसरे
दिन वहां
जाने का
ऐलान कर, अपने
महल में
सोने चला
गया।रात
में राजा
को स्वप्न
में ग्वाले
द्वारा
बताई बूढ़ी
माता के
दर्शन
हुए और
आभास हुआ
कि आदि
शक्ति
मां शारदा
है।
स्वप्न
में माता
ने राजा
को वहां
मूर्ति
स्थापित
करने की
आज्ञा दी
और कहा
कि मेरे
दर्शन
मात्र
से सभी
की मनोकामनाएं
पूरी होंगी।सुबह
होते ही
राजा ने
माता के
आदेशानुसार
सारे कर्म
पूरे करवा
दिए।शीघ्र
ही इस
स्थान
की महिमा
चारों
ओर फैल
गई। माता
के दर्शनों
के लिए
श्रद्धालु
दूर-दूर
से यहां
पर आने
लगे और
उनकी मनोवांछित
मनोकामना
पूरी होती
गई। इसके
पश्चात
माता के
भक्तों
ने मां
शारदा
को सुंदर
भव्य तथा
विशाल
मंदिर
बनवा दिया। यहां
श्रद्धालु
माता का
दर्शन
कर आशीर्वाद
लेने उसी
तरह पहुंचते
हैं जैसे
जम्मू
में मां
वैष्णो
देवी का
दर्शन
करने जाते
हैं। मां
मैहर देवी
के मंदिर
तक पहुंचने
के लिए
1063
सीढ़ियां
तय करनी
पड़ती
है |



