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- कहा गए बग्गी-टांगे वाले........?
Posted by : achhiduniya
06 October 2015
एक जमाने मे बग्गी-टांगे की सवारी राजशाही सवारी मानी जाती थी।राजाओ की शानो शौकत के साथ इन्हे जोड़ कर देखा जाता था। बग्गी-टांगे पर अनेक फिल्मे भी बनी “मर्द टांगे वाला मै हु
मर्द टांगे वाला........मुझे दुश्मन क्या मरेगा मेरा दोस्त ऊपर वाला” शायद आपने इस
गीत को जरूर सुना होगा। जिसे महानायक अमिताब पर फिल्माया गया था। वक्त बितने आधुनिकता के दौर के साथ टांगा चालकों के बग्गी-टाँगो पर चढ़ने का शौक रखने वालों का अकाल पड़ गया। आमदनी घटने के साथ ही इनकी दुर्दशा शुरू हुई तो बग्गी-टांगे वालो ने अपने परंपरागत धंधे को छोड़कर अन्य धंधों की ओर रुख कर लिया।
कभी शानो शौकत की सवारी कहे जाने वाला टांगा आज युवा पीढ़ी के लिए मानो उस लैड लाइन फोन की तरह हो गए हो जो मोबाइल इंटरनेट क्रांती का मुक़ाबला नही कर सकते।
एक समय हुआ करता था जब हर शहर के चौराहे पर कई टांगे वाले हुआ करते थे और उनके टाँगो की छमछम का मधुर संगीत सड़कों पर सुनाई पड़ता था। अब गांव-गांव, घर-घर दुपहिया व चारपहिया वाहनों की बाढ़ सी आ गई है। नई पीढ़ी के सामने पूर्व से चली आ रही शान की सवारी आउट डेटेड हो गई। पहले जहां लोग बग्गी-टाँगो पर शौक से बैठकर यात्रा किया करते थे। वहीं अब इस सवारी पर बैठना अपनी मर्यादा व शान के खिलाफ समझते हैं।
अब इस पर सवारी करना मानो गरीबी की रेखा के नीचे जीवन यापन करने वालो से जोड़ कर देखा जाने लगा है।वही कुछ जगहो जैसे रेलवे स्टेशन-बस स्टैंड आदि कुछ स्थानो व शहरो मे अब भी बग्गी-टाँगो वाले दिखाई देते है। कुछ लोगो ने पूर्वजों की निशानी कायम रखने के लिए टाँगो को छोड़ा नहीं है, बल्कि वे इससे अब माल ढोने के काम मे लगे हैं। बदलते समय के साथ ही लगता है बग्गी-टांगा शब्द अब सिर्फ इतिहास के पन्नों में गुम होकर रह जाएंगे।


