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- सफाई की आदत कही मनोरोगी न बना दे.........
Posted by : achhiduniya
15 March 2016
घर मे साफ सफाई होना आवश्यक है वही शरीर और कपड़े
भी साफ होने चाहिए ताकि आप बीमारी से हमेशा
बचे रहे। हम यह नहीं कहते कि आप गंदगी में रहें या स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह रहें
लेकिन अति हर चीज की बुरी होती है। धुले हुए कपडों को धोना, घर की दीवारों को रोजाना पानी से धोना, दिन में कई बार
नहाना, बार-बार कपडे बदलना आदि ऐसी अनेक बातें हैं जो मनोरोग
का सूचक हैं। गंदगी होने पर सफाई की बात तो समझ में आती है, लेकिन
जहां गंदगी न हो वहां भी सफाई करने की धुन सवार होना पागलपन ही है।
व्यक्ति का सफाई पसंद होना तो समझ में आता है, लेकिन जब उसका भूत सिर पर सवार हो जाए तो वह एक मनोरोग या विकृति बन जाता है।ऐसे लोग चौबीसों घंटे साफ-सफाई के बारे में सोचते हैं और उनका अधिकांश समय इसी में व्यतीत होता है। यहां तक कि वे एक दिन में सैकडों बार साबुन से हाथ धोते हैं। किसी मेहमान के जाने के पश्चात सोफे के कवर या पलंग पर बिछी चादर को धोना कहां तक उचित है? यदि आपको जरूरत से ज्यादा सफाई पसंद है तो यह आपकी सेहत का दुश्मन भी बन सकता है। इससे आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है और आप बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। हमारे दोस्त और परिवार वालों से हमें मिलने वाले बैक्टीरिया हमेशा खराब नहीं होते। ये कई मामलों में हमारे लिये फायदेमंद भी होते हैं।
हमारे पूर्वज कई तरह के पेड-पौधे और जानवरों से घिरे रहते थे। ऐसे में उनका शरीर नियमित तौर पर कई तरह के बैक्टीरिया के सम्पर्क में आता था और इनसे लडते हुए प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती थी। वर्तमान में ऐसा नहीं होने के कारण ही एलर्जी, अस्थमा और बुखार जैसी परेशानियों की बहुतायत हो गई है। यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के शोधकर्ता जैक ए गिलबर्ट के अनुसार, हमने बुरे वायरस और बैक्टीरिया को दूर रखने की दिशा में तो अच्छा काम किया है, लेकिन इस साफ-सुथरे माहौल ने हमें कमजोर बना दिया है।
व्यक्ति का सफाई पसंद होना तो समझ में आता है, लेकिन जब उसका भूत सिर पर सवार हो जाए तो वह एक मनोरोग या विकृति बन जाता है।ऐसे लोग चौबीसों घंटे साफ-सफाई के बारे में सोचते हैं और उनका अधिकांश समय इसी में व्यतीत होता है। यहां तक कि वे एक दिन में सैकडों बार साबुन से हाथ धोते हैं। किसी मेहमान के जाने के पश्चात सोफे के कवर या पलंग पर बिछी चादर को धोना कहां तक उचित है? यदि आपको जरूरत से ज्यादा सफाई पसंद है तो यह आपकी सेहत का दुश्मन भी बन सकता है। इससे आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है और आप बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। हमारे दोस्त और परिवार वालों से हमें मिलने वाले बैक्टीरिया हमेशा खराब नहीं होते। ये कई मामलों में हमारे लिये फायदेमंद भी होते हैं।
हमारे पूर्वज कई तरह के पेड-पौधे और जानवरों से घिरे रहते थे। ऐसे में उनका शरीर नियमित तौर पर कई तरह के बैक्टीरिया के सम्पर्क में आता था और इनसे लडते हुए प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती थी। वर्तमान में ऐसा नहीं होने के कारण ही एलर्जी, अस्थमा और बुखार जैसी परेशानियों की बहुतायत हो गई है। यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के शोधकर्ता जैक ए गिलबर्ट के अनुसार, हमने बुरे वायरस और बैक्टीरिया को दूर रखने की दिशा में तो अच्छा काम किया है, लेकिन इस साफ-सुथरे माहौल ने हमें कमजोर बना दिया है।


