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Posted by : achhiduniya
16 March 2016
लडकियों
की घटती संख्या से चिंतित सरकार जहां एक ओर कडे कानून और व्यापक योजनाएं बना रही
हैं।वर्ष 2014 में देश में कन्या भ्रूण हत्या
के 50 मामले दर्ज किए गए जिनमें सबसे अधिक 15 मध्य प्रदेश के हैं। नड्डा ने राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के आंकडों
का हवाला देते हुए कहा कि कन्या भ्रूण हत्या के आंकडे वर्ष 2014 से संग्रिहत किए जा रहे हैं और वर्ष 2014 में 50
मामले दर्ज किए गए थे। उन्होंने कहा कि इस दौरान सबसे अधिक 15
मामलों की साथ मध्य प्रदेश सबसे आगे है। इसके बाद राजस्थान में 11
और पंजाब में सात मामले हुए। उत्तर प्रदेश और हरियाणा में चार चार,
हिमाचल प्रदेश में तीन, छत्तीसगढ. और तेलंगना
में दो- दो और उत्तराखंड तथा महाराष्ट्र में एक- एक मामला हुआ है। मंत्री ने कहा
कि विभिन्न राज्यों में गर्भाधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व नैदानिक तकनीक (लिंग चयन
निषेध) अधिनियम 1994 के तहत कुल 1573 अल्ट्रासांउड
मशीनों को जब्त किया गया है। इसी तरह के कुल 2152 मामले दर्ज
किए गए और अब तक 306 लोगों को दोषी करार दिया गया है। इसके
अतिरिक्त एक सौ दोषी चिकित्सकों के पंजीयन संबंधित राज्य के चिकित्सा परिषदों ने
निलंबित या निरस्त किए हैं।
स्वास्थ्य एवं
परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के अनुसार, इस कानून
का उल्लंघन करने पर 1573 अल्ट्रासाउंड मशीनें जब्त की गई
हैं। 2152 मामले
दर्ज किए गए हैं और 306 को सजा दी गई है। 100 मेडिकल पेशेवरों के पंजीकरण रद्द किए गए हैं। वहीं डॉक्टरों ने भ्रूण
परीक्षण की रिपोर्ट के लिए 'जय माता दी' और 'श्री गणोश' जैसे कोडवर्ड
बना लिए हैं। कांग्रेस की रजनी पाटिल ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान यह
मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार के कडे कदमों से बचने के लिए डॉक्टर भ्रूण
परीक्षण की रिपोर्ट संबंधित लोगों को कोडवर्ड में बता देते हैं। डॉक्टरों ने लडके के लिए 'श्री गणोश' और लडकी के लिए 'जय
माता दी' जैसे कोडवर्ड बनाए हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार
कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने बताया कि गर्भाधान पूर्व और प्रसव पूर्व निदान
तकनीक (लिंग चयन निषेध) अधिनियम 1994 के नियमों के तहत लिंग
निर्धारण के लिए तकनीक का इस्तेमाल करने पर कडी कार्रवाई की जाती है।

