- Back to Home »
- Discussion »
- सभी बहुए खुश क्योकि एक भी सास नही.....गोकुलधाम सोसाइटी मे [तारक मेहता का उल्टा चश्मा]
Posted by : achhiduniya
31 March 2016
अक्सर फिल्मों मे और बहुताय टीवी
धारावाहिकों मे पहले सासू मां को हिटलर के रुप में दिखाया जाता था।बीवी हो तो ऐसी, घर एक मंदिर और सौ दिन सास के जैसी
फिल्मों में इसे साफ तौर पर देखा जा सकता है,लेकिन समय बदलने
के साथ ही उनकी इमेज बदली और आज उन्हीं सास ने मां की जगह ले ली है और इसे बदलने
में ये रिश्ता क्या कहलाता है, क्या हुआ तेरा वादा, ससुराल सिमर का, बालिका वधू जैसे सीरियल्स ने बड़ी
भूमिका निभायी है।लेकिन तारक मेहता का उल्टा चश्मा मे एक भी सास का ना होना कई
सवाल पैदा करता है।
दूसरों को अच्छा सिखाने वाले सभी लोगो ने क्या....? माँ-बाप के खिलाफ जाकर शादी की या अपने माँ-बाप को रख नही सकते थे इसलिए अलग से अपनी एक गोकुलधाम सोसाइटी बना डाली ।वही सिर्फ दया भेन की माँ यानी जेठालाल की सास का ही फोन आता है। आज तक सामने कभी नही आई क्यो......? शादी के बाद जॉब नहीं करना है, यहां नहीं जाना है, ये मत पहनो इन सब बातों से ऊपर उठकर आज की नारी सेल्फ डिपेन्डेंट बनना चाहती है और लड़की की शादी के बाद इन सब चीजों से पाबंदी हटाकर सास ने ही उसे सेल्फ डिपेन्डेंट बनने में हेल्प की है।जहां सास हमेशा एक मां बनकर बहु के लिए खड़ी रहती है।लड़कियों की शादी होने से पहले हर बात पर चाहे वो खाना बनाना हो, रहना, चलना-फिरना सबमें उन्हें तरीका सिखाया जाता है, सिर्फ इसलिए कि तुम्हें दूसरे घर जाना है और फिर वहां सास इन सारी बातों पर उंगली न उठा सके और न ताने दे सके कि घर से मां-बाप ने यही सिखाकर भेजा है क्या.....? ऐसा क्यों आखिर वो भी तो एक मां हैं उनकी भी तो बेटियां हो सकती हैं.
फिर दूसरे घर में जाने के लिए इतनी तैयारियां क्यों....?क्यों ये फील कराया जाता है कि लड़कियों के लिए उनका ससुराल ही उनका पहला घर है वहां के तौर-तरीके अलग होते हैं। उन्हें उसी के अनुसार अपने आप को ढालना होगा। सास और बहू का रिश्ता बेहद अहम है।समय के साथ इस रिश्ते में भी तेजी से बदलाव हुआ है। आज सास का रोल निभा रही और निभाने जा रही औरतों की समझ में आने लगा है तभी तो उन्होंने सास-बहू के रिश्ते को पूरी तरह से नहीं लेकिन काफी हद तक मां-बेटी के रिश्ते में ढाल लिया है।इसे शिक्षा और टेलीविजन दोनों का मिला-जुला असर कहा जा सकता है। लेकिन इस सास बहू के झगड़ो से तंग आकर डायरेक्टर गोकुलधाम [तारक मेहता का उल्टा चश्मा] मे एक भी सास नही रखी। वो दिन दूर नहीं जब बहुएं ये कहती नजर आयेंगी सौ-सौ साल जियो हमारी सासू जी, हमको लागे मां से प्यारी सासू जी।
दूसरों को अच्छा सिखाने वाले सभी लोगो ने क्या....? माँ-बाप के खिलाफ जाकर शादी की या अपने माँ-बाप को रख नही सकते थे इसलिए अलग से अपनी एक गोकुलधाम सोसाइटी बना डाली ।वही सिर्फ दया भेन की माँ यानी जेठालाल की सास का ही फोन आता है। आज तक सामने कभी नही आई क्यो......? शादी के बाद जॉब नहीं करना है, यहां नहीं जाना है, ये मत पहनो इन सब बातों से ऊपर उठकर आज की नारी सेल्फ डिपेन्डेंट बनना चाहती है और लड़की की शादी के बाद इन सब चीजों से पाबंदी हटाकर सास ने ही उसे सेल्फ डिपेन्डेंट बनने में हेल्प की है।जहां सास हमेशा एक मां बनकर बहु के लिए खड़ी रहती है।लड़कियों की शादी होने से पहले हर बात पर चाहे वो खाना बनाना हो, रहना, चलना-फिरना सबमें उन्हें तरीका सिखाया जाता है, सिर्फ इसलिए कि तुम्हें दूसरे घर जाना है और फिर वहां सास इन सारी बातों पर उंगली न उठा सके और न ताने दे सके कि घर से मां-बाप ने यही सिखाकर भेजा है क्या.....? ऐसा क्यों आखिर वो भी तो एक मां हैं उनकी भी तो बेटियां हो सकती हैं.
फिर दूसरे घर में जाने के लिए इतनी तैयारियां क्यों....?क्यों ये फील कराया जाता है कि लड़कियों के लिए उनका ससुराल ही उनका पहला घर है वहां के तौर-तरीके अलग होते हैं। उन्हें उसी के अनुसार अपने आप को ढालना होगा। सास और बहू का रिश्ता बेहद अहम है।समय के साथ इस रिश्ते में भी तेजी से बदलाव हुआ है। आज सास का रोल निभा रही और निभाने जा रही औरतों की समझ में आने लगा है तभी तो उन्होंने सास-बहू के रिश्ते को पूरी तरह से नहीं लेकिन काफी हद तक मां-बेटी के रिश्ते में ढाल लिया है।इसे शिक्षा और टेलीविजन दोनों का मिला-जुला असर कहा जा सकता है। लेकिन इस सास बहू के झगड़ो से तंग आकर डायरेक्टर गोकुलधाम [तारक मेहता का उल्टा चश्मा] मे एक भी सास नही रखी। वो दिन दूर नहीं जब बहुएं ये कहती नजर आयेंगी सौ-सौ साल जियो हमारी सासू जी, हमको लागे मां से प्यारी सासू जी।


