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- क्या......? बैंक के खिलाफ लोकपाल में जा सकते हैं......
Posted by : achhiduniya
07 April 2016
आप
अपने बैंक द्वारा दी गई सेवा में कमी पाते हैं तो आप इसकी शिकायत बैंकिंग लोकपाल
में कर सकते हैं। यह बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 की धारा 35-ए के अंतर्गत रिर्जव बैंक द्वारा चलाई गई सरल तथा मुफ्त प्रक्रिया है। लोकपाल
का अर्थ है कानूनी प्रतिनिधि। यह बैंक व ग्राहक के बीच मध्यस्थता का कार्य करता
है। 2015 में बैंकिंग लोकपाल के पास 85,131 शिकायतें प्राप्त हुई थीं। जिसमें सबसे ज्यादा शिकायतें क्रेडिट कार्ड,
एटीएम, डेबिट कार्ड को लेकर थीं। बैंकिंग
लोकपाल के पास आए एक मामले के बारे में मैं आपको बताने जा रही हूं। उपभोक्ता का एक
सेविंग बैंक अकाउंट था जो कि एक बडी एमएनसी का कर्मचारी था। उसकी तनख्वाह इसी
अकाउंट में जमा होती थी। बैंक ने उपभोक्ता को बिना बताए उसकी चैक बुक किसी और
व्यक्ति को बिना देखे दे दी। उस व्यक्ति ने रु 9,77,000 रुपए
उपभोक्ता के अकाउंट से चेक द्वारा निकाल लिए जो कि समय-समय पर बैंक ने पास भी किए।
इससे शिकायतकर्ता को भारी नुकसान उठाना पडा।
उन्होंने बैंक में शिकायत की पर जब कोई भी जवाब नहीं मिला तो बैंकिंग लोकपाल के समक्ष शिकायत की और पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई। लोकपाल ने उपभोक्ता के हस्ताक्षर और जिस चेक द्वारा पैसा गबन किया गया था उनकी सरकारी लैब में जांच कराई और रिपोर्ट से पता चला कि उन दोनों हस्ताक्षरों में कोई भी मेल नहीं था।बैंकिंग लोकपाल ने चैक बुक गलत देने तथा चेक को हस्ताक्षर किसी और के होने के बाद पास करने के लिए बैंक को जिम्मेदार ठहराया और पूरा पैसा शिकायतकर्ता को वापस करने को कहा। यदि आपका चेक कोई अनजान व्यक्ति बैंक में भुगतान के लिए लगाता है और बैंक भुगतान कर देता है तो बैंक इसके लिए उत्तरदायी होगा। यदि आपकी चेक बुक खो जाती है तो बिना समय गंवाए इसकी सूचना आप तुरंत अपने बैंक को दें। अत: उपभोक्ता को अपनी बैंक बुक जब भी प्राप्त होती है तो उसकी प्रतियों को गिनना चाहिए और ध्यान रखना चाहिए कि उसका गलत उपयोग तो नहीं किया जा रहा है। लेखिका उपभोक्ता मामलों की जानकार - डॉ. शीतल कपूर
उन्होंने बैंक में शिकायत की पर जब कोई भी जवाब नहीं मिला तो बैंकिंग लोकपाल के समक्ष शिकायत की और पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई। लोकपाल ने उपभोक्ता के हस्ताक्षर और जिस चेक द्वारा पैसा गबन किया गया था उनकी सरकारी लैब में जांच कराई और रिपोर्ट से पता चला कि उन दोनों हस्ताक्षरों में कोई भी मेल नहीं था।बैंकिंग लोकपाल ने चैक बुक गलत देने तथा चेक को हस्ताक्षर किसी और के होने के बाद पास करने के लिए बैंक को जिम्मेदार ठहराया और पूरा पैसा शिकायतकर्ता को वापस करने को कहा। यदि आपका चेक कोई अनजान व्यक्ति बैंक में भुगतान के लिए लगाता है और बैंक भुगतान कर देता है तो बैंक इसके लिए उत्तरदायी होगा। यदि आपकी चेक बुक खो जाती है तो बिना समय गंवाए इसकी सूचना आप तुरंत अपने बैंक को दें। अत: उपभोक्ता को अपनी बैंक बुक जब भी प्राप्त होती है तो उसकी प्रतियों को गिनना चाहिए और ध्यान रखना चाहिए कि उसका गलत उपयोग तो नहीं किया जा रहा है। लेखिका उपभोक्ता मामलों की जानकार - डॉ. शीतल कपूर

