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- सुनो सरकार जीएसटी के स्लैब पर कारोबारियों का कहना.....
Posted by : achhiduniya
26 December 2017
पिछले दिनो सरकार द्वारा एक देश एक कर के प्रणाली रूप मे जीएसटी
को लागू करके सरकार ने एक मिसाल पेश की। कारोबारियों का कहना है कि वस्तु एवं सेवा
कर के स्लैब पांच से घटाकर 3 किए जाने चाहिये। सेवाओं पर कर ब्याज की दर बढ़ाने के नकारात्मक प्रभाव पर
भी गौर करने की जरूरत है। गौरतलब है कि वस्तु एवं सेवाकर में सेवाओं पर कर की दर 14
फीसदी से बढ़ कर 18 फीसदी हो गयी है। आर्थिक
क्षेत्र के कुछ अन्य विशेषज्ञों का कहना है कि जीएसटी में शीर्ष दर कम होनी
चाहिये। इसमें जो पांच स्लैब हैं उन्हें कम करके 3 किया जाना
चाहिये। सरकार की ओर से भी समय समय पर इस बारे में संकेत दिये गये हैं कि आने वाले
समय में जीएसटी के स्लैब कम किये जायेंगे।
दिल्ली शेयर बाजार के पूर्व अध्यक्ष और ग्लोब कैपिटल इंडिया के चेयरमैन अशोक अग्रवाल का कहना है कि जीएसटी में कर की दरें ठीक की जानी चाहिये। जो अब तक 14 प्रतिशत सेवाकर देते रहे हैं उन्हें सेवाकर के रूप में 18 प्रतिशत जीएसटी देना पड़ रहा है। यह दर 16 प्रतिशत के आसपास होनी चाहिये। जीएसटी में इस समय 0, 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत के पांच स्लैब हैं। इसमें 12 और 18 फीसदी को मिलाकर एक दर की जा सकती है तथा शीर्ष दर को भी कम किया जा सकता है। देश में वस्तु एवं सेवा कर जीएसटी को लागू हुए छह माहीने पूरे होने वाले हैं। छह माहीने पूरे होने के बाद कारोबारी अभी इसके साथ पूरी तरह सहज नहीं हो पाए हैं।
सरकार ने जीएसटी के मामले में एक तरफ पुचकारने का काम किया है तो दूसरी तरफ रिटर्न भरने के लिये कुछ डराने वाले वक्तव्य भी दिये हैं। जैन ने कहा कि जीएसटी को जिस सोच के साथ लागू किया गया, उसके साथ पटरी बिठाने और स्थितियां सामान्य होने में समय लगेगा। लोगों का माइंडसैट बदलने में समय लगेगा। एक बड़ा हिस्सा है जो अभी भी रिटर्न भरने के तौर तरीकों से रूबरू होने का प्रयास कर रहा है। धीरे धीरे चीजें सुधर रही हैं। कारोबारियों की ऐसी स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञों ने सरकार और कारोबारियों के बीच तालमेल और सहयोग बढ़ाने और कर स्लैब की संख्या घटाने की सलाह दी है।
विशेषज्ञों के अनुसार सरकार हालांकि, उद्यमियों की वस्तु एवं सेवा कर से जुड़ी तमाम परेशानियों को दूर करने के लिये हरसंभव कदम उठा रही है, लेकिन वस्तु एवं सेवाकर के वास्तविक व्यवहार में आने वाली समस्याओं को बहुत जल्द दूर किये जाने की जरूरत है।
दिल्ली शेयर बाजार के पूर्व अध्यक्ष और ग्लोब कैपिटल इंडिया के चेयरमैन अशोक अग्रवाल का कहना है कि जीएसटी में कर की दरें ठीक की जानी चाहिये। जो अब तक 14 प्रतिशत सेवाकर देते रहे हैं उन्हें सेवाकर के रूप में 18 प्रतिशत जीएसटी देना पड़ रहा है। यह दर 16 प्रतिशत के आसपास होनी चाहिये। जीएसटी में इस समय 0, 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत के पांच स्लैब हैं। इसमें 12 और 18 फीसदी को मिलाकर एक दर की जा सकती है तथा शीर्ष दर को भी कम किया जा सकता है। देश में वस्तु एवं सेवा कर जीएसटी को लागू हुए छह माहीने पूरे होने वाले हैं। छह माहीने पूरे होने के बाद कारोबारी अभी इसके साथ पूरी तरह सहज नहीं हो पाए हैं।
सरकार ने जीएसटी के मामले में एक तरफ पुचकारने का काम किया है तो दूसरी तरफ रिटर्न भरने के लिये कुछ डराने वाले वक्तव्य भी दिये हैं। जैन ने कहा कि जीएसटी को जिस सोच के साथ लागू किया गया, उसके साथ पटरी बिठाने और स्थितियां सामान्य होने में समय लगेगा। लोगों का माइंडसैट बदलने में समय लगेगा। एक बड़ा हिस्सा है जो अभी भी रिटर्न भरने के तौर तरीकों से रूबरू होने का प्रयास कर रहा है। धीरे धीरे चीजें सुधर रही हैं। कारोबारियों की ऐसी स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञों ने सरकार और कारोबारियों के बीच तालमेल और सहयोग बढ़ाने और कर स्लैब की संख्या घटाने की सलाह दी है।
विशेषज्ञों के अनुसार सरकार हालांकि, उद्यमियों की वस्तु एवं सेवा कर से जुड़ी तमाम परेशानियों को दूर करने के लिये हरसंभव कदम उठा रही है, लेकिन वस्तु एवं सेवाकर के वास्तविक व्यवहार में आने वाली समस्याओं को बहुत जल्द दूर किये जाने की जरूरत है।



