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न्याय की देवी फैसले देने से पहले राजनीतिक दल या नेता को देखने के लिए तांक-झांक करती है...... शिवसेना
Posted by : achhiduniya
15 January 2018
मुखपत्र सामना के दोपहर संपादकीय में शिवसेना ने कहा है
कि चारों न्यायाधीशों के मीडिया के सामने आने के साथ ही शीर्ष अदालत का रहस्य
उजागर हो गया है और अब सभी मुक्त होकर सांस ले सकते हैं। अपने सहयोगी भाजपा पर
निशाना साधते हुए शिवसेना ने कहा है कि इस तरह की चीजें कांग्रेस नीत संप्रग
शासनकाल के दौरान भी होती थीं, तब भाजपा और अन्य दल इस मुद्दे को बड़ी मुखरता से उठाया करते थे और
लोकतंत्र व न्यायतंत्र के खतरे का रोना रोते थे। सेना ने कहा है कि ऐसा डर है कि
देश के सामने सच को उजागर करने के लिए अब उन्हें इसका परिणाम भुगतना पड़ सकता है। शिवसेना
ने कहा, कल उन्हें कांग्रेस के एजेंट के तौर पर पेश किया
जाएगा, उसके बाद उनकी बगावत के लिए विदेशी हाथ को जिम्मेदार
ठहराया जाएगा और उसके बाद उन्हें नक्सली और कुख्यात घोषित कर दिया जाएगा।
कानून का शासन खत्म हो चुका है। प्राचीन रोम और भारत के संदर्भ में न्याय प्रणाली का जिक्र करते हुए संपादकीय में कहा गया है कि न्याय की देवी आंखों पर पट्टी बांधे रहती है और हाथों में तलावार लिए रहती है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि न्याय करते वक्त यह नहीं देखा जाता कि उसके सामने कौन है। पार्टी ने कहा है, लेकिन चार वरिष्ठ न्यायाधीशों द्वारा मीडिया के सामने आने के बाद यह संदेह पैदा हो गया है कि न्याय की देवी अक्सर फैसले देने से पहले राजनीतिक दल या नेता को देखने के लिए तांक-झांक करती है।
कानून का शासन खत्म हो चुका है। प्राचीन रोम और भारत के संदर्भ में न्याय प्रणाली का जिक्र करते हुए संपादकीय में कहा गया है कि न्याय की देवी आंखों पर पट्टी बांधे रहती है और हाथों में तलावार लिए रहती है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि न्याय करते वक्त यह नहीं देखा जाता कि उसके सामने कौन है। पार्टी ने कहा है, लेकिन चार वरिष्ठ न्यायाधीशों द्वारा मीडिया के सामने आने के बाद यह संदेह पैदा हो गया है कि न्याय की देवी अक्सर फैसले देने से पहले राजनीतिक दल या नेता को देखने के लिए तांक-झांक करती है।

