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- तलाक-तलाक-तलाक क्या है इसके मायने और मतलब......?
Posted by : achhiduniya
06 February 2018
कुछ समय पहले तीन तलाक कानून यानी 'मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकार का संरक्षण) बिल
2017 लोकसभा में पास हो गया है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस की
एक महिला सांसद ने इस बिल के पास होने के बाद सरकार के फैसले पर सवाल खड़े किए
हैं। मुस्लिम महिलाएं अपने धर्म में जारी बहुविवाह चार शादी का प्रावधान और निकाह
हलाला के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी कर रही हैं। वहीं वो तलाक-ए-बाइन के खिलाफ
भी जंग की शुरूआत करेंगी। अगर तीन तलाक से पत्नी को नहीं छोड़ सकते हैं तो एक-दो
तलाक से पत्नी को छोड़ दें। इसका मतलब है कि पति पत्नी को तलाक-ए-बाइन से छोड़
सकता है।
बता दें तलाक-ए-बाइन के जरिए भी तलाक दिया जा सकता है। तलाक-बाइन में तीन तलाक बोलने की जरूरत नहीं होती है। इसमें दो बार तलाक बोलने से तलाक हो जाता है। एक बार में ही तीन बार तलाक बोल देने को तलाक-ए-बिद्दत कहा जाता है। एक बार में एक तलाक बोलने और इसके बाद तीन महीने तक इंतजार किया। इस दौरान अगर पति-पत्नी के बीच सुलह हो जाए तो तलाक नहीं होगा। इसे तलाक-ए-एहसन कहा जाता है। पत्नी के मासिक धर्म से निबटने में ही तलाक बोला जाता है। अगले मासिक धर्म के बाद दूसरी बार तलाक बोला जाता है। तीसरे महीने के मासिक धर्म के बाद तलाक बोला जाता है। इस तरह तलाक बोलने के बाद तलाक माना जाएगा। बता दें इस तलाक-ए-हसन कहा जाता है।
बता दें तलाक-ए-बाइन के जरिए भी तलाक दिया जा सकता है। तलाक-बाइन में तीन तलाक बोलने की जरूरत नहीं होती है। इसमें दो बार तलाक बोलने से तलाक हो जाता है। एक बार में ही तीन बार तलाक बोल देने को तलाक-ए-बिद्दत कहा जाता है। एक बार में एक तलाक बोलने और इसके बाद तीन महीने तक इंतजार किया। इस दौरान अगर पति-पत्नी के बीच सुलह हो जाए तो तलाक नहीं होगा। इसे तलाक-ए-एहसन कहा जाता है। पत्नी के मासिक धर्म से निबटने में ही तलाक बोला जाता है। अगले मासिक धर्म के बाद दूसरी बार तलाक बोला जाता है। तीसरे महीने के मासिक धर्म के बाद तलाक बोला जाता है। इस तरह तलाक बोलने के बाद तलाक माना जाएगा। बता दें इस तलाक-ए-हसन कहा जाता है।

