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- पागलपन का कारण व उपचार....
Posted by : achhiduniya
06 February 2018
मन की स्वाभाविक अवस्था में गड़बड़ी हो जाने को ही
उन्माद कहते हैं। बहुत ज्यादा परिश्रम या उद्वेग, ज्यादा खाना-पींना या इन्द्रिय-परिचालन,
ज्यादा शराब या गांजा पीना, स्वास्थ्य भंग,
निराशा और मिर्गी आदि इस बीमारी के मुख्य कारण हैं। पूर्वजों
(पुरखों) को उन्माद रोग रहना, गर्मी रोग, मस्तिष्क या मेरुदण्ड की यान्त्रिक बीमारियां, शरीर
में गहरी चोट लगना, अनुचित शिक्षा, हमेशा
भयानक घटनाओं वाली किताब पढ़ना आदि इसके प्रमुख कारण हैं। असफलता का कष्ट, अन्याय की सुनवाई न होने पर, घाटे से, बेकारी से, परिवार या समाज में महत्व न मिलने पर भी
व्यक्ति पागल हो सकता है। लक्षण:– कपड़े फाड़ना, मारना,
काटना, बेकार ही हाथ पैरों का चलाना या बोलना
या चेहरा तथा आंखों की भाव-भंगिमा बदली हुई होना, गलत देखना,
गलत सुनना या अंट-शंट बकना या बड़बड़ाना या चुप रहना, याददाश्त की कमी, बुद्धि का बिगड़ना, किसी काम में दिल न लगना, क्रोध, प्रसन्नता, शोक, रोना आदि
मानसिक भावों की अधिकता, अपनी इच्छा-शक्ति को काबू में न
रखना, आत्महत्या की इच्छा, प्रियजनों
का अनादर करना, नींद न आना, सिरदर्द
रहना, जननेन्द्रिय का काम रुक जाना, लगातार
प्रलाप करना आदि इस रोग के लक्षण हैं।
पागलपन के घरेलू उपचार निम्न है:-# पेठे के बीजों की गिरियां दो तोला, चीनी और शहद एक-एक तोला, इन्हें मिश्रित कर नित्य खाली पेट रोगी को दें, गिरियों को बारीक पीसकर और चीनी को मिला लें, एक महीने तक सेवन कराते रहने से पागलपन के बहुत-से लक्षणों में कमी हो जायेगी, मल साफ होने लगेगा, खुश्की मिटकर थोड़ी नींद भी आने लगेगी। # काशीफल (कद्दू) का हलवा खाने से मानसिक रोग दूर होता है। तनाव भी कम होता है।# करीब 75 ग्राम सौंफ के तेल में पाव भर गरम चाय या दूध मिलाकर पिलाने से गर्मी से उत्पन्न पागलपन दूर हो जाता है।# 15 ग्राम अनार के पत्ते, 15 ग्राम गुलाब के ताजे फूल, 500 ग्राम पानी में उबालें। चौथाई पानी रहने पर छानकर 20 ग्राम देसी घी मिलाकर नित्य पियें। इससे पागलपन के दौरे में लाभ होगा।# पित्त गर्मी के कारण पागलपन हो तो शाम को एक छटांग चने की दाल पानी में भिगो दें। प्रात: पीस लें। खाँड व पिसी दाल को एक गिलास पानी में मिलाकर पीने से लाभ होता है।# चने की दाल भिगोकर उसका पानी पिलाने से उन्माद व वमन ठीक हो जाता है।# 12 काली मिर्च, तीन ग्राम ब्राह्मी की पत्तियां पीसकर आधा गिलास पानी में छानकर नित्य दो बार पियें। इससे पागलपन दूर हो जाती है। मित्र डॉ मनीष शर्मा ( गुप्त रोग,मानसिक एवं वात रोग विशेषज्ञ)
पागलपन के घरेलू उपचार निम्न है:-# पेठे के बीजों की गिरियां दो तोला, चीनी और शहद एक-एक तोला, इन्हें मिश्रित कर नित्य खाली पेट रोगी को दें, गिरियों को बारीक पीसकर और चीनी को मिला लें, एक महीने तक सेवन कराते रहने से पागलपन के बहुत-से लक्षणों में कमी हो जायेगी, मल साफ होने लगेगा, खुश्की मिटकर थोड़ी नींद भी आने लगेगी। # काशीफल (कद्दू) का हलवा खाने से मानसिक रोग दूर होता है। तनाव भी कम होता है।# करीब 75 ग्राम सौंफ के तेल में पाव भर गरम चाय या दूध मिलाकर पिलाने से गर्मी से उत्पन्न पागलपन दूर हो जाता है।# 15 ग्राम अनार के पत्ते, 15 ग्राम गुलाब के ताजे फूल, 500 ग्राम पानी में उबालें। चौथाई पानी रहने पर छानकर 20 ग्राम देसी घी मिलाकर नित्य पियें। इससे पागलपन के दौरे में लाभ होगा।# पित्त गर्मी के कारण पागलपन हो तो शाम को एक छटांग चने की दाल पानी में भिगो दें। प्रात: पीस लें। खाँड व पिसी दाल को एक गिलास पानी में मिलाकर पीने से लाभ होता है।# चने की दाल भिगोकर उसका पानी पिलाने से उन्माद व वमन ठीक हो जाता है।# 12 काली मिर्च, तीन ग्राम ब्राह्मी की पत्तियां पीसकर आधा गिलास पानी में छानकर नित्य दो बार पियें। इससे पागलपन दूर हो जाती है। मित्र डॉ मनीष शर्मा ( गुप्त रोग,मानसिक एवं वात रोग विशेषज्ञ)

