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- "संत्सग" काव्यसंग्रह में लोकमंगल भाव- डॉ. ओ.पी. मिश्रा
Posted by : achhiduniya
03 April 2018
नागपूर:- "संत्सग" काव्यसंग्रह में लोकमंगल भाव है, तोकमंगल भाव आस्था सें जुडे बिना नही आता इस आशय के विचार वरिष्ठ हिंदी साहित्यिक सामान्य जनसंदेश पत्रिका के संपादक डॉ. ओमप्रकाश मिश्रा ने व्यक्त किए I डॉ. मिश्रा मदन गोपाल लोणकर द्वारा लिखित संत्संग हिंदी काव्यसंग्रह पर आयोजित समिक्षा कार्यक्रम मे बोल रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विधायक नागो गाणार नें की, वरिष्ठ व्यंगकार टिकाराम शाहू आजाद, वरिष्ठ पत्रकार विश्वास इंदूरकर, राहुल शास्त्री आदि उपस्थित थे उल्लेखनिय है की काव्यसंग्रह का लोकार्पण कुछ महापूर्व केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितीन गडकरी ने किया था। काव्यसंग्रह की प्रस्तावना वरिष्ठ साहित्यकार स्व रज्जन त्रिवेदी तथा वरिष्ठ पत्रकार सत्यपाल पटाईत ने लिखि है। डॉ .मिश्रा ने कहा की भौतिक युग में भी भक्ती तथा प्रेमभाव जगा के रखना यह कठीन कार्य है, परंतु यह प्रेमभाव बहुत ही सरलता और सहजता से लोणकर जी ने अपनी कविताओ मे जागृत रखा है। इसकी अनुभूती आप यह कविता संग्रह पढेगे तो सहजता से ध्यान में आती है। श्रम साधना जीवन की प्रगती का आभिन्न अंग है।
अपना काम स्वयंम करने से ही होती है। इस बात को भी बडी खूबि से पाठको तक पहुचाया है। इस पर प्रकाश डालते हुये कहा की श्रम साधना, कविता समष्टी की चेतना जगाती है। वरिष्ठ व्यंगकार टिकायम शाहू ने मार्मिक शब्दो में कहा की काव्य संग्रह में प्रकाशित हुई कविताए आज भी प्रासंगिक है। अध्यक्ष भाषण मे विधायक गाणार ने कहा की लोणकर की कविताए धरातल से जुडी और आम आदमी को सहजता से समझ मे आने वाली है यह उनकी लिखने की खूबी है। प्रारंभ मे दिप प्रज्वलन के बाद प्रमुख अतिथियो का परिचय विश्वास इंदूरकर ने दिया संचालन अजय पांडे ने तथा आभार प्रदर्शन राहुल शास्त्री ने किया कार्यक्रम मे नागपूर महानगर पालिका के नगरसेवक प्रमोद कोरती, अमरावती के महानगर पालिका के सदस्य तुषार भारतीय, सामाजिक कार्यकर्ता जयंत गुडधे, हरि नायर, चंदशेखर डोरलीकर, विनायक खराबे, विवेक इंदूरकर, श्रीताई सिन्नरकर, सहीत विभिन्न क्षेत्र के गणमान्य नागरिक बडी संख्या में उपस्थित थे I

