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“राधा के श्याम” जीवन साथी 26 वां परिचय सम्मेलन समाधा आश्रम मैरेज ब्यूरो व सिंधी सोशल फोरम का संयुक्त उपक्रम
नागपुर:- सिंधी समाज द्वारा
नागपुर शहर में पिछले 25 सालों से पूरे भारत में प्रख्यात परिचय सम्मेलन को हर वर्ष काफी अच्छा प्रतिसाद मिलता रहा है। इसी कडी को
आगे बढाते हुए इस साल भी 29/11/2026 को पुज्य समाधा आश्रम मैरेज ब्यूरो नागपुर और सिंधी
सोशल फोरम नागपुर संयुक्त रूप से मिलकर स्वागत लान पाम रोड सिव्हिल लाइन नागपुर मे
26 वे परिचय सम्मेलन का आयोजन कर रहे है। पुज्य समाधा आश्रम मैरेज ब्यूरो नागपुर
और सिंधी सोशल फोरम नागपुर के सभी सदस्यगणों ने सिंधी समाज के पालकों
और युवक युवतियों से अनुरोध किया है कि अपने बेटे या बेटी का शादी-विवाह योग्य
उच्च शिक्षित वर्ग के ( Doctor , Engineer, CA ,CS , MBA, Architech,LLB, LLM,B PHARM, M PHARM,HOTEL
MANAGEMENT, MA, MCOM, MSC, MS, MPHIL, MLIB, BED, MED, MCA, ICWA, PGDBN, PGDCA,
ANY POST GRADUATE DIPLOMA/ DEGREE) युवक व युवतियों का
अंतरराष्ट्रीय परिचय सम्मेलन आयोजित किया जाता रहा है।इस परिचय सम्मेलन में
पंजीकरण करवाये ताकि एक ही समय एक ही स्थान पर शादी-विवाह लायक युवक-युवतियों का
अवलोकन कर अपने जीवन साथी का चयन कर सकें। पंजीकरण शुल्क मात्र रूपये 1500/- है। युवक और युवतीयों के केवल 100 - 100 पंजीकरण किए जाएंगे
इसलिये सभी से अनुरोध है कि अपना पंजीकरण तुरंत करवाये। सम्मेलन में पंजीकृत
अभिभावकों के 3 सदस्यों की सुबह की चाय- नास्ता-दोपहर का खाना-शाम की चाय और दूर दराज से
आनेवाले अभिभावकों को रात का खाना पार्सल दिया जाएगा। दूर दराज से आने वाले अभिभावकों के लिए रात में लान पर ही रहने की और खाने की व्यव्स्था की गई है। अतः सभी सिंधी
भाई-बहनों से आग्रह पूर्वक नम्र निवेदन है कि अपने शादी-विवाह लायक बच्चों /
रिश्तेदारों का पंजीकरण करवाएं। इस समाजसेवी
कार्य उपलक्ष्य में आयोजकों द्वारा:- श्रीमान फतनदास गोपचंदानी,श्रीमान पेसूराम दारा,श्रीमान दिलीप सावलानी,श्रीमान प्रकाश चेतवानी और श्रीमान अशोक माखीजानी ने
सिंधी समाज के लोगों से अधिकाधिक लाभ लेने की प्रार्थना की है। अधिक जानकारी के लिए
संपर्क करें:- Contact
numbers:- Pujya samadha marriage Beuro Nagpur-7447626066 / Sindhi Social Forum
Nagpur-9503237161
कहां ली अंतिम श्वास कैंची धाम के नीम करोली बाबा उर्फ लक्ष्मी नारायण शर्मा ने....?
नीम
करोली बाबा का संदेश बहुत सरल था। वह प्रेम को सबसे बड़ी शक्ति मानते थे। वह लोगों
से कहते थे कि भगवान का नाम लो और दूसरों की सेवा करो। वे कहते थे सभी लोगों से
प्रेम करें। जरूरतमंद की सहायता करें।
भोजन का सम्मान करें। अहंकार से दूर रहें। हनुमान जी की भक्ति करें। कठिन समय में धैर्य रखें। सेवा को जीवन का
हिस्सा बनाएं। लक्ष्मी नारायण शर्मा से नीम करोली बाबा बनने की यात्रा केवल एक
व्यक्ति के संत बनने की कहानी नहीं है। यह गृहस्थ जीवन, वैराग्य, सेवा और भक्ति के बीच संतुलन की कहानी
भी है। उनके जीवन से जुड़ी कई घटनाएं आस्था पर आधारित हैं। लक्ष्मी नारायण शर्मा का मन बचपन से ही
धार्मिक कार्यों में लगता था। वे पूजा-पाठ करते,हनुमान जी के प्रति उनकी गहरी
आस्था थी। किशोरावस्था में ही उन्हें संसार की मोह माया से दूरी महसूस होने लगी थी।
करीब 11 वर्ष की उम्र में उनका विवाह राम बेटी
देवी से कर दिया गया। विवाह के बाद भी उनका मन पूरी तरह गृहस्थ जीवन में नहीं लगा।
वह साधु जीवन और आध्यात्मिक साधना की ओर आकर्षित होते रहे। प्रचलित कथाओं के
अनुसार, करीब 17 वर्ष की आयु में
उन्हें आध्यात्मिक
अनुभव हुआ। इसके बाद उनका झुकाव साधना की ओर और बढ़ गया। वह घर छोड़कर अलग-अलग
स्थानों पर घूमने लगे। इस दौरान उन्होंने कई जगहों पर तपस्या की। गुजरात के
बवानिया मोरबी क्षेत्र में भी उन्होंने साधना की,वहां लोग उन्हें तलइया बाबा के
नाम से जानने लगे। आगे चलकर उन्हें लक्ष्मण दास, हांडी वाले बाबा और तिकोनिया वाले बाबा
जैसे नामों से भी पुकारा गया। उनका जीवन किसी एक स्थान तक सीमित नहीं रहा। वह
गांवों, कस्बों और धार्मिक स्थानों पर जाते थे।
लोगों की समस्याएं सुनते थे। जरूरतमंदों की सहायता करते। उनके लिए सेवा ही साधना
का एक महत्वपूर्ण रूप थी। कई वर्षों तक घर से दूर रहने के बाद पिता को पता चला कि
फर्रुखाबाद जिले के नीब करौरी गांव में उनके जैसे दिखने वाला एक साधु रह रहा है।
उनके पिता वहां पहुंचे। उन्होंने लक्ष्मी नारायण शर्मा को पहचान लिया। पिता के
आग्रह पर उन्हें घर वापस लौटना पड़ा। इसके बाद उन्होंने कुछ समय गृहस्थ जीवन
बिताया। उनके दो पुत्र और एक पुत्री हुए।
हालांकि, उनका मन हमेशा आध्यात्मिक कार्यों में
लगा रहा। परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के साथ-साथ वह लोगों की सहायता भी करते
थे। स्थानीय लोगों के बीच उनकी प्रतिष्ठा बढ़ती गई। कई कथाओं में उन्हें लंबे समय
तक गांव का निर्विरोध प्रधान भी बताया गया है। नीम करोली बाबा के नाम से जुड़ी
सबसे प्रसिद्ध कथा ट्रेन की है,कहा जाता है कि एक बार वह ट्रेन से यात्रा कर रहे
थे। उनके पास टिकट नहीं था। टिकट जांचने वाले कर्मचारी ने उन्हें उत्तर प्रदेश के
फर्रुखाबाद क्षेत्र में स्थित नीब करौरी स्टेशन के पास ट्रेन से उतार दिया। बाबा
ट्रेन से उतरकर एक स्थान पर बैठ गए। इसके बाद ट्रेन आगे नहीं बढ़ी। रेलवे कर्मचारियों
ने ट्रेन को चलाने की कोशिश की, लेकिन
सफलता नहीं मिली। स्थानीय लोगों ने इसे बाबा की आध्यात्मिक शक्ति से जोड़कर देखा। कहा जाता है कि अधिकारियों और यात्रियों ने बाबा
से दोबारा ट्रेन में बैठने का अनुरोध किया। बाबा के ट्रेन में बैठने के बाद ट्रेन
चल पड़ी। इसी घटना के बाद लोग उन्हें नीम करौरी बाबा कहने लगे। समय के साथ यही
नाम बदलकर नीम करोली बाबा के रूप में प्रसिद्ध हो गया। कैंची धाम धीरे-धीरे बाबा
के प्रमुख आश्रम के रूप में प्रसिद्ध हो गया। बाबा यहां आने वाले लोगों से मिलते
थे। वह उनकी बातें सुनते थे। लोगों को प्रेम, ईमानदारी और सेवा का संदेश देते थे।
बाबा का मानना था कि भगवान की भक्ति केवल पूजा तक सीमित नहीं होनी चाहिए। भूखे को
भोजन देना, दुखी की सहायता करना और जरूरतमंद की
मदद करना भी भक्ति का हिस्सा है। कैंची धाम में हर वर्ष 15 जून को स्थापना दिवस मनाया जाता है। इस
अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। भक्त हनुमान जी की पूजा करते हैं।
प्रसाद बांटा जाता है। पूरे परिसर में भक्ति और सेवा का वातावरण दिखाई देता है। नीम
करोली बाबा ने अपने जीवन का अंतिम समय वृंदावन में बिताया। बताया जाता है कि 11 सितंबर 1973 को उन्होंने शरीर त्याग दिया। उनके
निधन के बाद भी उनकी शिक्षाएं और स्मृतियां लोगों के बीच जीवित रहीं। कैंची धाम आज
भी उनके भक्तों के लिए प्रमुख तीर्थस्थल है। भारत और विदेशों में उनके नाम से कई
आश्रम और सेवा केंद्र चलाए जाते हैं।
वक्फ बोर्ड में दो हिंदुओं को भी सदस्य बनाया गया..
संशोधित वक्फ कानून 2025
के तहत नए वक्फ बोर्ड का गठन करने वाला
मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बन चुका है और मनोज मालपानी और अनिमेष भार्गव को
बोर्ड में बतौर सदस्य शामिल करना वक्फ बोर्ड के इतिहास में महत्वपूर्ण कदम माना जा
रहा है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर मध्यप्रदेश
में नए कानून के तहत नए वक्फ बोर्ड का गठन किया गया है और ये पहली बार है जब किसी
राज्य के वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियक्ति की गई है। जी हां,
राज्य के पुनर्गठित वक्फ बोर्ड में दो
हिंदुओं को भी सदस्य बनाया गया है। मध्यप्रदेश सरकार ने बोर्ड का पुनर्गठन करते
हुए दो हिंदू सदस्यों की नियुक्ति की है। इंदौर के मनोज मालपानी और गुना के अनिमेष
भार्गव को वक्फ बोर्ड में बतौर सदस्य शामिल किया गया है और राज्य सरकार की ओर से
इसका अधिसूचना राजपत्र भी जारी कर दिया गया है, जिसके अनुसार सनवर पटेल बोर्ड के अक्ष्यक्ष
होंगे। इसी के साथ मध्यप्रदेश वक्फ अधिनियम 1995
(संशोधित 2025) की धारा 13 और धारा 14 के प्रावधानों के तहत नए वक्फ बोर्ड का गठन करने
वाला देश का पहला राज्य भी बन गया है। राज्य
के नवगठित वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष की बात करें तो सनवर पटेल इसके अध्यक्ष होंगे,
जो पिछले बोर्ड के भी अध्यक्ष रह चुके हैं।
बोर्ड में कुल 10 सदस्य
शामिल किए गए हैं, जिनमें पहली बार दो हिंदुओं को सदस्य बनाया गया है। पुनर्गठित वक्फ
बोर्ड की बात करें तो विधायक आतिफ अकील (भोपाल उत्तर), फैजान खान (उज्जैन), नजमा हेपतुल्ला (नई दिल्ली),
शाइस्ता सुल्तान (पार्षद,
बैरसिया), बहन फातेमा चौधरी (इंदौर) शबाना
खान (पार्षद,
रतलाम), मनोज मालपानी (इंदौर), अनिमेष भार्गव (राघौगढ़, गुना) और पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण
विभाग के आयुक्त को बोर्ड का सदस्य बनाया गया है. राज्य सरकार द्वारा जारी अधिसूचना राजपत्र में
साफ किया गया है कि नजमा हेपतुल्ला का कार्यकाल अभी जारी रहेगा। उनका चयन साल 2023
में वक्फ अधिनियम के तहत हुआ था और 18
अप्रैल 2028 तक उनका कार्यकाल जारी रहेगा। यही वजह है कि उन्हें
बचे हुए कार्यकाल के लिए नए बोर्ड में भी शामिल किया गया है।
जामा मस्जिद विवादों में,तहखाने में जैन तीर्थंकरों और हिंदू देवी-देवताओं की प्राचीन मूर्तियां
हाल ही में
जामा मस्जिद के अंडरग्राउंड हिस्से का एक वीडियो सामने आया है,
जिसमें हिंदू
देवी-देवताओं और भगवान मल्लिनाथ सहित जैन तीर्थंकरों की प्राचीन मूर्तियां और
नक्काशीदार पत्थर दिखाई देने का दावा किया गया है। इस वीडियो के सामने आने के बाद
जामा मस्जिद के मूल स्वरूप को लेकर बहस तेज हो गई है और अलग-अलग तरह के दावे किए
जा रहे हैं। हिंदू और जैन संत समुदायों का दावा है कि यह स्थल मूल रूप से 'समी विहार' या प्राचीन मंदिर था,
जिसे तोड़कर मुगल
काल में जामा मस्जिद का निर्माण किया गया। वे पूरे परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण
कराने की मांग कर रहे हैं। हिंदू और जैन पक्ष की मांग है कि जामा मस्जिद के मूल स्वरूप की जांच होनी चाहिए। वे इसके प्राचीन मंदिर को तोड़कर बनाई गई मस्जिद
होने का दावा कर रहे हैं। दरअसल,गुजरात के भरुच की लगभग 700 साल पुरानी जामा मस्जिद विवादों में है।
इस ऐतिहासिक स्थल की जमीन और मूल स्वरूप को लेकर अलग-अलग तरह के दावे
सामने आने के
बाद यह मामला धार्मिक-ऐतिहासिक बहस में तब्दील हो गया है। दरअसल,
हाल में सामने आए एक
वीडियो के बाद जामा मस्जिद का विवाद और गहरा गया है, जिसमें मस्जिद के तहखाने में जैन
तीर्थंकरों और हिंदू देवी-देवताओं की प्राचीन मूर्तियां व नक्काशीदार पत्थर दिखने
का दावा किया गया है। इस दावे के बाद प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। जामा
मस्जिद ट्रस्ट और मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों ने इन दावों को खारिज किया है।
उनका कहना है कि इस स्थान के उनके पास ऐतिहासिक और धार्मिक प्रमाण हैं जो इसे
मस्जिद साबित करते हैं। मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाए जाने का दावा गलत है। वर्तमान
में भरुच की जामा मस्जिद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI
के संरक्षण में है।
इस विवाद के बाद से ASI और स्थानीय प्रशासन अलर्ट पर हैं और
सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। जामा मस्जिद के आसपास आने-जाने वालों पर नजर
रखी जा रही है। यहां सुरक्षाकर्मियों की तैनाती बढ़ा दी गई है।
मौसम की खराबी-भूस्खलन,रोकी गई केदारनाथ यात्रा
रुद्रप्रयाग के स्थानीय प्रशासन ने फिलहाल केदारनाथ यात्रा को अस्थाई रूप
से रोक दिया है। स्थानीय पुलिस ने एक एडवाइजरी जारी करते हुए एक्स पर लिखा है,केदारनाथ
यात्रा अस्थाई रूप से रोकी गई। जनपद रुद्रप्रयाग में भारी बारिश के ऑरेंज अलर्ट के
चलते श्रद्धालुओं की सुरक्षा हेतु केदारनाथ यात्रा को अस्थाई तौर पर रोका गया है।
प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए हेल्पलाइन भी जारी किए हैं। किसी भी
समस्या के समाधान के लिए श्रद्धालु 8958757335 और 8218326386
पर
संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा डायल 112 के जरिये भी मदद ली जा
सकती है। प्रशासन ने लोगों से सहयोग की अपील की है। वहीं दूसरी तरफ जोशीमठ
के पास
बद्रीनाथ नेशनल हाइवे (NH-7) पर भीषण जाम लगा हुआ
है। यहां वाहनों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने जाम
खत्म करने के लिए कर्मियों को तैनात किया है। वहीं भारी जाम को हटाने के लिए 30
मिनट
के अंतराल पर एकतरफा यातायात को नियंत्रित करने के लिए आपातकालीन टोकन-आधारित गेट
प्रणाली को सक्रिय किया गया है। उत्तराखंड में बीते कुछ दिनों से
मौसम का मिजाज बदल गया है। इस बीच यहां केदारनाथ यात्रा को रोकना पड़ा है। बारिश
और जगह-जगह हुए भूस्खलन की वजह से यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़
रहा है। इस बीच स्थानीय प्रशासन ने केदारनाथ यात्रा को अस्थायी रूप से रोकने
का
फैसला लिया है। बता दें कि बारिश की वजह से लोग जगह-जगह रुके हुए हैं,
जिस
वजह से कई जगहों पर जाम की स्थिति भी देखी जा रही है। वहीं मौसम विभाग ने
उत्तराखंड में बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। चमोली के पुलिस अधीक्षक
सुरजीत सिंह पंवार ने कहा,लगभग 30,000
से 35,000
तीर्थयात्री
प्रतिदिन श्री बद्रीनाथ धाम की यात्रा कर रहे हैं। वहीं 5,000
से 10,000
श्रद्धालु
हेमकुंड साहिब जा रहे हैं। तीर्थयात्रियों की इस भारी भीड़ के कारण हमारे मौजूदा
राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर दबाव काफी बढ़ गया है। विशेष रूप से,
जोशीमठ-मारवाड़ी-विष्णुप्रयाग
मार्ग पर लगभग 10 किलोमीटर का सड़क खंड बेहद खराब स्थिति में
है। कुछ वर्ष पूर्व जोशीमठ क्षेत्र में हुए प्राकृतिक भू-धंसाव ने वहां के सड़क
ढांचे को बुरी तरह प्रभावित किया है।
छोटा हज पैकेज शुरू करने की घोषणा केंद्र सरकार द्वारा
नई व्यवस्था के तहत तीर्थयात्री सामान्य लंबी अवधि के प्रवास के बजाय करीब 20
दिनों
के भीतर हज की रस्में पूरी करके लौट सकेंगे। इस विशेष योजना के तहत लगभग 10,000
तीर्थयात्री
यात्रा करेंगे। तीर्थयात्रियों, विशेष रूप से कामकाजी
पेशेवरों और व्यापारियों से मिली प्रतिक्रिया के आधार पर जो हज की मुख्य रस्में
पूरी होने पर जल्दी लौटने का विकल्प चाहते थे हज 2026
के
लिए पहली बार एक छोटा हज पैकेज शुरू किया गया है। केंद्र सरकार ने शनिवार को
भारतीय तीर्थयात्रियों, विशेष रूप से पेशेवरों
के लिए इस साल एक छोटा हज पैकेज शुरू करने की घोषणा की। इसका उद्देश्य सभी ज़रूरी
रस्मों को निभाते हुए तीर्थयात्रा की अवधि को कम करना है। केंद्रीय अल्पसंख्यक
मामलों के राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन के दफ्तर की ओर जारी एक
बयान
में कहा कि यह पहल उन तीर्थयात्रियों के
अनुरोध पर शुरू की गई है जो व्यापार और
पेशेवर क्षेत्रों में काम करते हैं और जिनके लिए काम से 40 से 45
दिन
दूर रहना मुश्किल होता है। बयान में कहा गया कि इस श्रेणी के तहत,
10,000 तीर्थयात्री सऊदी अरब (KSA) में लगभग 20
दिनों
की कम अवधि के साथ हज करेंगे, जबकि सामान्य हज की
अवधि 40-45 दिन होती है। मंत्री के
कार्यालय ने बताया कि पहली उड़ान 17 मई को कोच्चि से रवाना
होने वाली है, जबकि दिल्ली, मुंबई,
बेंगलुरु,
हैदराबाद,
चेन्नई
और अहमदाबाद सहित अन्य प्रमुख शहरों से भी उड़ानें निर्धारित हैं।
छोटा हज पैकेज 17
मई से
5 जून तक चलेगा, जिससे तीर्थयात्री
नियमित तीर्थयात्रा कार्यक्रम की तुलना में कम समय सीमा के भीतर अपनी यात्रा पूरी
करके लौट सकेंगे। मंत्री के कार्यालय ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य कामकाजी
पेशेवरों के लिए तीर्थयात्रा को अधिक सुलभ और प्रबंधनीय बनाना है,
साथ
ही यह सुनिश्चित करना है कि सभी धार्मिक दायित्व पूरे हों। कोचीन अंतर्राष्ट्रीय
हवाई अड्डे से पहली उड़ान को कुरियन 17 मई को दोपहर 12.30
बजे
हरी झंडी दिखाएंगे।
हज यात्रीयों पर महंगाई की मार,एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमतों में उछाल
अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि अनगिनत परिवारों के लिए हज एक ऐसा सपना होता है, जो जीवन में केवल एक बार पूरा होता है और जिसे वे सालों तक संजोकर रखते हैं। मैं उस भावना का दिल से सम्मान करता हूं। वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनावों के कारण एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमतों में अचानक भारी बढ़ोतरी हुई है। इसी वजह से एयरलाइंस ने प्रति यात्री 300-400 अमेरिकी डॉलर की बड़ी वृद्धि की मांग की थी। एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमतों में इस बढ़ोतरी के लिए एयरलाइंस को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि बातचीत के जरिए हमने यह सुनिश्चित किया कि बढ़ोतरी सिर्फ 100 अमेरिकी डॉलर तक सीमित रहे,
जिससे हर यात्री को काफी राहत मिली। यह फैसला पूरी पारदर्शिता और सद्भावना के साथ लिया गया है,
ताकि हज 2026 की
व्यवस्थाओं में कोई रुकावट न आए। सरकार ने यह भी रेखांकित किया कि जहां हज कमेटी ने वृद्धि को न्यूनतम रखने का प्रयास किया है, वहीं निजी टूर ऑपरेटरों ने पहले ही अपने किराए में भारी बढ़ोतरी कर दी थी और हाल ही में उसमें लगभग 150 डॉलर की अतिरिक्त वृद्धि और कर दी है।गौरतलब है की सरकार के अनुसार, मध्य पूर्व में जारी संकट की वजह से 'एविएशन टर्बाइन फ्यूल' (ATF) की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। इस वैश्विक आपातकाल का हवाला देते हुए एयरलाइंस ने प्रति तीर्थयात्री 300 से 400 अमेरिकी डॉलर की बढ़ोतरी की मांग की थी।
हज कमेटी और अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने तीर्थयात्रियों के हितों को ध्यान में रखते हुए एयरलाइंस के साथ बातचीत की। सरकार ने कहा कि गहन विचार-विमर्श के बाद इस वृद्धि को घटाकर केवल 100 अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹8,400-₹10,000) प्रति तीर्थयात्री पर सीमित कर दिया गया है। मंत्रालय ने आंकड़ों के जरिए बताया कि सरकार के इस हस्तक्षेप से प्रति तीर्थयात्री लगभग 200 से 300 डॉलर की बचत हुई है, जो एयरलाइंस मूल रूप से मांग रही थीं। यह निर्णय सभी प्रस्थान केंद्रों के लिए समान रूप से लागू होगा। अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया है।सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह वृद्धि वैश्विक संकट और ईंधन की कीमतों में भारी उछाल के कारण लिया गया है। वर्तमान में एक लाख से अधिक तीर्थयात्री हज 2026 के लिए पंजीकरण करा चुके हैं।

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