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- कहा बनता है राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा क्यू ज्यादातर महिलाएं बनाती हैं जाने पूरी कहानी...?
Posted by : achhiduniya
14 August 2018
यहां सिर्फ नाममात्र ही पुरुष बचे हैं। लोगों का कहना है कि पुरुषों के झंडे के सही नाप न लेने की वजह से उनकी संख्या दिन-ब-दिन कम होती जा रही है। तिरंगे के निर्माण के लिए इनकी नाप बेहद अहम है। इसमें 2:3 का अनुपात है जिसमें तीन पट्टियां होती हैं जिसमें सबसे ऊपर केसरिया, बीच में सफेद और आखिर में हरा रंग होता है। साथ ही बीच में सफेद वाली पट्टी में नीले रंग का चक्र भी होता है जिसमें 24 तीलियां बनी होती हैं। आधिकारिक तिरंगा 9 आकार में तैयार किया जाता है जिसमें सबसे छोटा आकार 6X4 इंच (150X100 MM) और सबसे बड़ा आकार 21 X 14 फीट (6300 X 4200 mm) का होता है।
इनके निर्माण में बेहद सावधानी बरतनी पड़ती है। जरा सी चूक में यह खारिज भी हो सकता है। यह दो हिस्सों में तैयार होता है। तुलसीगिरी में कच्चे माल की प्रॉसेसिंग होती है वहीं यहां से 2 घंटे की दूरी पर स्थित बेंगेरी में झंडों को फाइनल टच दिया जाता है। बेंगरी स्थित भारतीय ध्वज निर्माण केंद्र में एक महिला तिरंगे की बीच वाली पट्टी में अशोक चक्र के लिए स्क्रीन प्रिंट ले रही हैं। यहां काम करने वाली महिलाएं हर रोज 8 से 10 घंटे काम करती हैं।
तिरंगों को फाइनल टच देने के बाद प्रेस भी किया जाता है। पिछले साल यहां 60 हजार तिरंगे तैयार किए गए थे। इन महिलाओं को गर्व है कि इनके द्वारा तैयार किए गए झंडे हर जगह फैलाए जाते हैं। [आभार]



