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- सरकार की महत्वाकांक्षी योजना की खुली पोल... किसानो को दुधारू गाय की जगह दूध न देने वाली गाय पकड़ा दी गई....
सरकार की महत्वाकांक्षी योजना की खुली पोल... किसानो को दुधारू गाय की जगह दूध न देने वाली गाय पकड़ा दी गई....
Posted by : achhiduniya
17 August 2018
किसानों की आय दोगुनी करने की सरकार की
महत्वाकांक्षी योजना के तहत दुग्ध विकास विभाग ने किसानों को सिर्फ़ पांच हज़ार
रुपये में पांच गाय देने का ऐलान किया था। इनमें से दो दुधारू गाय होनी थी, दो गाभिन
गाय और बछिया। दुग्ध विकास मंत्री धन सिंह रावत ने इस योजना को किसानों की जिंदगी
बदलने वाली योजना बताया था। उन्होंने दावा किया था कि दुधारू गाय रोज़ 10 से 20 लीटर दूध देगी,लेकिन
कोटद्वार के उदयरामपुर नयावाद गांव के किसानों की मानें तो हुआ इसका उल्टा। किसानों
का कहना है कि ये गाय सिर्फ़ आधा लीटर ही दूध दे रही हैं और ये स्वस्थ भी नहीं हैं।
कोई गाय बीमार है, तो किसी के पैर, किसी के थन खराब हैं। कुछ गाय इतनी बूढ़ी हैं कि दूध देने लायक ही नहीं है और तो और सरकार के दावों के विपरीत दो दुधारू गाय भी सबको नहीं मिल हैं न ही दो गाभिन गाय। उनकी जगह कहीं दूध न देने वाली गाय पकड़ा दी गई है और कहीं बछिया। गांव के किसान तो यह तक कह रहे हैं कि पशु चिकित्सक तक आकर इन गायों को ख़ारिज कर चुके हैं। उनका कहना है कि ये गाय दूध देने लायक ही नहीं हैं। अब किसान मांग कर रहे हैं कि सरकार अपनी गायों को वापस ले जाए और उनका पैसा वापस कर दे। समस्या उन किसानों के लिए और बड़ी है जिन्होंने गायों को रखने के लिए अलग से गौशाला का निर्माण कराया. और सोचा कि जब गाय दूध देगी तो सारा खर्च वसूल हो जाएगा।
पांच गायों को बरेली से लाने और उनके लिए गौशाला समेत दूसरी व्यवस्थाएं करने में हजारों रुपये भी खर्च किए,लेकिन अब उन्हें यह चिंता सताने लगी है कि इन गायों का क्या करें, इन पर कब तक ख़र्च करते रहें। कुछ परेशान किसान तो यह तक कह रहे हैं कि सरकार उनकी आय दोगुनी करने की बातें बंद कर दे और उनके अपने हाल पर छोड़ दे। सरकार की ऐसी योजनाओं से तो उनकी हालत और ख़राब हो रही है।
कोई गाय बीमार है, तो किसी के पैर, किसी के थन खराब हैं। कुछ गाय इतनी बूढ़ी हैं कि दूध देने लायक ही नहीं है और तो और सरकार के दावों के विपरीत दो दुधारू गाय भी सबको नहीं मिल हैं न ही दो गाभिन गाय। उनकी जगह कहीं दूध न देने वाली गाय पकड़ा दी गई है और कहीं बछिया। गांव के किसान तो यह तक कह रहे हैं कि पशु चिकित्सक तक आकर इन गायों को ख़ारिज कर चुके हैं। उनका कहना है कि ये गाय दूध देने लायक ही नहीं हैं। अब किसान मांग कर रहे हैं कि सरकार अपनी गायों को वापस ले जाए और उनका पैसा वापस कर दे। समस्या उन किसानों के लिए और बड़ी है जिन्होंने गायों को रखने के लिए अलग से गौशाला का निर्माण कराया. और सोचा कि जब गाय दूध देगी तो सारा खर्च वसूल हो जाएगा।
पांच गायों को बरेली से लाने और उनके लिए गौशाला समेत दूसरी व्यवस्थाएं करने में हजारों रुपये भी खर्च किए,लेकिन अब उन्हें यह चिंता सताने लगी है कि इन गायों का क्या करें, इन पर कब तक ख़र्च करते रहें। कुछ परेशान किसान तो यह तक कह रहे हैं कि सरकार उनकी आय दोगुनी करने की बातें बंद कर दे और उनके अपने हाल पर छोड़ दे। सरकार की ऐसी योजनाओं से तो उनकी हालत और ख़राब हो रही है।


