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- कांग्रेस के लिए मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव क्यू है चुनौतीपूर्ण....?
Posted by : achhiduniya
17 October 2018
भारतीय जनता पार्टी के शासन वाले मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान तीन बार से मुख्यमंत्री है। बीजेपी मध्य प्रदेश में 2003 में सत्ता में आई और उसने 230 में से 173 सीटें जीती। इसमें वोट शेयर 42.5 प्रतिशत रहा। वहीं, इसके उलट 1993 से 2003 तक लगातार 10 साल तक सत्ता में रही कांग्रेस 31.6 प्रतिशत के साथ केवल 38 सीट जीतने में कामयाब रही। इसके बाद 2008 में जरूर बीजेपी का वोट शेयर (42.5 से 37.6 प्रतिशत) घटा,लेकिन फिर भी उसने 143 सीटों पर कब्जा किया। वहीं, कांग्रेस ने 71 सीटें अपने नाम की। साल 2013 में बीजेपी फिर से और मजबूती से उभरी और 165 सीट (44.9 प्रतिशत वोट शेयर) जीते।
हिसाब लगाएं तो कांग्रेस 15 साल से इस राज्य में सत्ता से बाहर है और इस बार अगर उसे जीत की उम्मीद है भी तो इसका सबसे बड़ा कारण उसे 'एंटी-इनकंबेंसी' नजर आता होगा। कांग्रेस के लिए इस चुनाव में सबसे बड़ी उम्मीद 15 सालों में शिवराज सरकार के खिलाफ पैदा हुई 'एंटी-इनकंबेंसी' हो सकती हैं। वैसे, कुछ और बातें भी हैं जो कांग्रेस के लिए एक तरह से उम्मीद की किरण हैं। इसी साल जुलाई-अगस्त में 13 जिलों में हुए नगर निकाय उप-चुनाव में कांग्रेस ने 14 में से 9 सीटों में जीत हासिल की। मध्य प्रदेश में कांग्रेस के लिए इस बार मौके जरूर हैं,लेकिन रास्ता इतना आसान नहीं है। पिछले दो दशक में या फिर उससे कुछ ज्यादा वक्त में लगातार कांग्रेस इस राज्य में कमजोर हुई है। खासकर, 1993 के बाद कांग्रेस की स्थिति और बदतर हुई है।
दिग्विजय सिंह 1998 से 2003 के बीच इस राज्य के आखिरी कांग्रेस के मुख्यमंत्री रहे। चुनाव वाले 230 विधानसभा सीटों में से करीब 100 सीटें ऐसी हैं जहां कांग्रेस के लिए चुनौती सबसे बड़ी है। इनमें करीब-करीब 50 सीटें तो ऐसी हैं जहां कांग्रेस पिछले दो या कहें कि उससे कुछ ज्यादा समय से जीत हासिल नहीं कर सकी है। उसमें भी दिलचस्प ये कि करीब 17 जिलों में कम से कम 24 सीटें वे हैं जहां कांग्रेस को पिछले 25 सालों (1993 और 98 के चुनाव भी) में जीत नसीब नहीं हुई है। आने वाले 28 नवंबर को एक चरण के चुनाव के बाद 11 दिसंबर को होने वाली मतो की गिनती से साफ हो जाएगा।


