- Back to Home »
- Judiciaries »
- सुप्रीम कोर्ट का यौन उत्पीड़न अत्याचार के विरुद्ध कड़ा कानून....क्या हैं “विशाखा गाइडलाइन”….?
Posted by : achhiduniya
08 October 2018
भारत देश में महिलाओं के खिलाफ होने वाले यौन उत्पीड़न अत्याचार के विरुद्ध कड़ा कानून सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के रूप में पहले से मौजूद है, जिन्हें 'विशाखा गाइडलाइन्स' के रूप में जाना जाता है। बीते दिनो राजस्थान में हुए भंवरी देवी गैंगरेप केस के बाद महिलाओं के प्रति अत्याचार के खिलाफ आवाज़ उठाने वाली संस्था विशाखा ने जो पेटिशन दायर की थी, उसी के मद्देनज़र साल 1997 में सुप्रीम कोर्ट ने कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा के लिए ये दिशानिर्देश जारी किए थे और सरकार से आवश्यक कानून बनाने के लिए कहा था। 'विशाखा गाइडलाइन्स' (Vishaka Guidelines) जारी होने के बाद वर्ष 2012 में भी एक अन्य याचिका पर सुनवाई के दौरान नियामक संस्थाओं से यौन हिंसा से निपटने के लिए समितियों का गठन करने को कहा था और उसी के बाद केंद्र सरकार ने अप्रैल, 2013 में 'सेक्सुअल हैरेसमेंट ऑफ वीमन एट वर्कप्लेस एक्ट' को मंज़ूरी दी थी।
'विशाखा गाइडलाइन्स' (Vishaka Guidelines) के तहत किसी को भी गलत तरीके से छूना या छूने की कोशिश करना, गलत तरीके से देखना या घूरना, यौन संबंध स्थापित करने के लिए कहना या इससे मिलती-जुलती टिप्पणी करना, यौन इशारे करना, महिलाओं को अश्लील चुटकुले सुनाना या भेजना, महिलाओं को पोर्न फिल्में या क्लिप दिखाना- सभी यौन उत्पीड़न के दायरे में आता है। हर ऐसी कंपनी या संस्थान के हर उस कार्यालय (मुख्यालय या शाखा) में, जहां 10 या उससे ज़्यादा कर्मचारी हैं, एक अंदरूनी शिकायत समिति (इन्टर्नल कम्प्लेन्ट्स कमेटी या ICC) की स्थापना करना अनिवार्य होता है। ICC की अध्यक्ष महिला ही होगी और कमेटी में अधिकांश महिलाओं को रखना भी ज़रूरी होता है। इस कमेटी में यौन शोषण के मुद्दे पर ही काम कर रही किसी बाहरी गैर-सरकारी संस्था (NGO) की एक प्रतिनिधि को भी शामिल करना ज़रूरी होता है।
कंपनी या संस्थान में काम करने वाली महिलाएं किसी भी तरह की यौन हिंसा की शिकायत ICC से कर सकती हैं। यह कंपनी अथवा संस्थान का उत्तरदायित्व होगा कि शिकायतकर्ता महिला पर किसी भी तरह का हमला न हो, या उस पर कोई दबाव न डाला जाए। कमेटी को एक साल में उसके पास आई शिकायतों और की गई कार्रवाई का लेखाजोखा सरकार को रिपोर्ट के रूप में भेजना होगा। अगर कमेटी किसी को दोषी पाती है, तो उसके खिलाफ IPC की संबंधित धाराओं के अलावा अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जानी होगी।


