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- यह अपनी मांग है,आज लड़ाई नहीं है,लेकिन अड़ना तो है....आरएसएस चीफ मोहन भागवत
Posted by : achhiduniya
25 November 2018
नागपुर: विश्व हिंदू परिषद की हुंकार रैली को संबोधित करते हुए आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने साफ कहा कि अब धैर्य नहीं निर्णायक आंदोलन का वक्त आ गया है। कोर्ट पर निशाना साधते हुए भागवत ने कहा कि न्यायपूर्ण बात यही होगी कि जल्द मंदिर बने, लेकिन यह कोर्ट की प्राथमिकता में नहीं है तो सरकार सोचे कि मंदिर बनाने के लिए कानून कैसे आ सकता है। आरएसएस चीफ ने कहा, लेकिन सावधान! यह अपनी मांग है। आज लड़ाई नहीं है,लेकिन अड़ना तो है। जन सामान्य तक यह बात पहुंचानी जरूरी है कि सरकार इसके लिए कानून बनाए और जनता का दबाव आएगा तो सरकार को मंदिर बनाना ही होगा। फिर एक बार संपूर्ण भारतवर्ष को मंदिर के लिए खड़ा होना है। जो चित्र और मॉडल हमने सामने रखा है उसी के हिसाब से मंदिर बनना चाहिए। देश में जागरण का काम चले जब तक मंदिर निर्माण का काम शुरू न हो जाए।
उन्होंने कहा, मामला कोर्ट में है, फैसला जल्द दिया जाना चाहिए। यह साबित भी हो गया
है कि मंदिर वहां था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट इस केस को प्राथमिकता
में नहीं रख रहा है। उन्होंने कहा कि इंसाफ में देरी अन्याय के बराबर है। भागवत ने
कहा कि वर्षों से मांग कर रहे हैं,लेकिन सुनवाई
नहीं हो रही है। कोर्ट की प्राथमिकता में यह नहीं है। जनहित के मामले टालते रहने
का कोई अर्थ नहीं है। नीचे मंदिर था, यह खोदकर देखा
जा चुका है। निर्णय आ गया कि मंदिर तोड़ कर ढांचा बना था। भागवत ने कहा कि कभी-कभी
यह सवाल आता है कि मंदिर की मांग क्यों कर रहे हैं? तो यह मांग न
करें तो कौन सी मांग करें। हमारा भारत स्वतंत्र देश है इसलिए यह मांग करते हैं।
डॉ. राम मनोहर लोहिया ने अपनी किताब राम कृष्ण और शिव में कहा है कि भारतीय समाज
जीवन का वस्त्र जो प्राचीन समय में बुना गया, उसके
उत्तर-दक्षिण धागे को श्री राम ने पिरोया, पूर्व-पश्चिम
धागे को श्री कृष्ण ने पिरोया और भगवान शिव तो इस पूरे समाज के मन में छा गए हैं।
उन्होंने कहा कि समाज केवल कानून से नहीं चलता। श्रद्धा पर कोई सवाल नहीं उठा सकता
है। कोर्ट का निर्णय अभी आएगा नहीं, क्योंकि वह
प्राथमिकता में नहीं है। राम के समय में कोई वक्फ बोर्ड, अखाड़ा नहीं था। अपने तलवार के बल पर उस स्थान को
जबरन अधिकार में लिया गया और मंदिर को गिराया गया। ऐसे में सरकार पर मंदिर के लिए
दबाव बनाना ही होगा।


