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कॉलेजों-यूनिवर्सिटी में 25 फ़ीसदी सीटें बढ़ाने के साथ देश के 40 हजार कॉलेजों और 900 यूनिवर्सिटी में इसी साल से लागू होगा.... प्रकाश जावड़ेकर
Posted by : achhiduniya
15 January 2019
सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में दस फीसदी के आरक्षण के बिल को राष्ट्रपति ने मंजूरी दे दी है। इसी के साथ सरकार ने भी अधिसूचना जारी कर दी। जिससे बिल ने अब कानून का रूप ले लिया। मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि दस फ़ीसदी आर्थिक आरक्षण के लिए कॉलेजों-यूनिवर्सिटी में 25 फ़ीसदी सीटें बढ़ाई जाएंगी, ताकि मौजूदा कोटे पर असर न पड़े। जावड़ेकर ने कहा कि देशभर के 40 हजार कॉलेजों और 900 यूनिवर्सिटी में 10 फीसद आरक्षण का कोटा इसी शैक्षणिक सत्र से लागू कर दिया जाएगा। इसमें सरकारी और प्राइवेट, दोनों तरह के संस्थान शामिल हैं। हालांकि वर्तमान कोटे से कोई छेड़छाड़ नहीं होगा और यह 10 फीसद अतिरिक्त होगा। उन्होंने कहा कि यूजीसी, एआईसीटीई और अन्य अधिकारियों के साथ इसके लिए मीटिंग हुई और निर्णय लिया गया कि 10 फीसद के कोटे को 2019 से ही लागू करने के लिए तुरंत कॉलेजों-विवि को सूचित कर दिया जाएगा।
साथ ही संसद को भी सूचना दी जाएगी। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री
प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि मंत्रालय, विश्वविद्यालय
अनुदान आयोग (यूजीसी) और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के अधिकारियों
की बैठक में यह फैसला किया गया। उन्होंने संवाददाताओं से कहा,शिक्षण सत्र 2019-2020 से ही आरक्षण लागू हो जाएगा। करीब 25 प्रतिशत सीटें बढ़ाई जाएंगी ताकि
अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य श्रेणियों के तहत
मौजूदा कोटा प्रभावित नहीं हो।प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, तौर तरीकों पर काम हो रहा है और एक सप्ताह के भीतर हम बढ़ाई
जाने वाली सीटों की सही-सही संख्या बता सकेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि निजी विश्वविद्यालय भी आरक्षण लागू करने
के लिए तैयार हैं।
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की राजपत्रित अधिसूचना के
अनुसार, संविधान (103वां संशोधन) अधिनियम, 2019 की
धारा 1 की उपधारा (2) के तहत प्रदत्त अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए केंद्र सरकार
14 जनवरी को उस तारीख के रूप में चिहि्नत करती है जिस दिन कथित कानून के प्रावधान
प्रभाव में आएंगे। अधिनियम में संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 का संशोधन किया गया
है और एक उपबंध जोड़ा गया है जो राज्यों को आर्थिक रूप से कमजोर किसी भी वर्ग के
नागरिकों के उत्थान के लिए विशेष प्रावधान बनाने
का अधिकार देता है।


