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- ट्रिपल तलाक़ और सिटिजनशिप बिल-2016 राज्यसभा के आखिरी सत्र के साथ हो गए निरस्त....
Posted by : achhiduniya
13 February 2019
लोकसभा की प्रक्रिया के अनुसार लोकसभा में पेश किया गया कोई भी
बिल अगर किसी भी सदन में लंबित है तो वह सरकार के कार्यकाल के साथ ही समाप्त हो
जाता है। अगर कोई बिल राज्यसभा में पेश हुआ है और पास भी हुआ है,लेकिन लोकसभा में लंबित है तो वो भी रद्द हो जाता
है। अब अगर ट्रिपल तलाक़ और सिटिजनशिप बिल को लेकर नया कानून बनाना है तो अगली
सरकार के आने के बाद इन्हें दोबारा लोकसभा और राज्यसभा में पास कराना होगा।
सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट विवेक तनखा के मुताबिक ये दोनों ही बिल रद्द हो
चुके हैं और ट्रिपल तलाक के मामलों में सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग ही अब आखिरी
दिशा-निर्देश हैं। तनखा ने आगे कहा कि सरकार के पास दूसरा रास्ता ऑर्डिनेंस लाकर
कानून बनाने का होता है,लेकिन लोकसभा चुनावों को देखते हुए उसे ये
साबित करना होगा कि ये बिल देश के लिए बेहद ज़रूरी हैं और इमरजेंसी के हालत हैं।
हालांकि जल्दी ही आचार संहिता लागू हो जाएगी और इसकी संभावना न के बराबर है।
मोदी
सरकार के लिए राज्यसभा का आखिरी सत्र समाप्त हो गया है। इसके साथ ही लोकसभा
चुनावों के मद्देनज़र महत्वपूर्ण माने जा रहे ट्रिपल तलाक़ और सिटिजनशिप बिल-2016 भी रद्द हो गए हैं। ये दोनों ही बिल लोकसभा में
पास हो चुके थे लेकिन 13 जनवरी को सत्र के आखिरी दिन भी इन्हें राज्यसभा
में पेश नहीं किया गया। हालांकि राफेल मुद्दे पर राज्यसभा में आज कैग रिपोर्ट पेश
हो गई है। सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक मोदी सरकार की राफेल डील यूपीए सरकार में
प्रस्तावित डील से सस्ती है। सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक राफेल डील यूपीए से 2.86 फीसदी सस्ते में हुई है। कैग रिपोर्ट में कहा
गया है, साल 2016 में मोदी
सरकार की तरफ से साइन की गई राफेल फाइटर जेट डील 2007 में यूपीए
सरकार की तरफ से प्रस्तावित डील की तुलना में 2.86 प्रतिशत
सस्ती है।

