- Back to Home »
- Knowledge / Science »
- बीमार होने पर किस डॉक्टर के पास जायें किससे इलाज कराए....? जाने डॉक्टर्स की डिग्री का राज..?
Posted by : achhiduniya
07 February 2019
आज की भागमभाग जीवन शैली के चलते अक्सर हम बीमार होते है उस
वक्त हमारे जहन मे सबसे पहले यह सवाल आता है की कौनसे डॉक्टर के पास जायें, किस स्पेशलिस्ट से कंसल्ट करें, ऐसे सवाल दिमाग में जरुर आते हैं। सही इलाज के
लिए सही डॉक्टर होना जरुरी है। आइये जाने स्पेशलिस्ट डॉक्टर कौनसे होते हैं उन्हें
कब कंसल्ट करें। जरुरत के समय हमें किस विशेषज्ञ डॉक्टर की मदद लेनी चाहिए।# कार्डियोलोजिस्ट –
Cardiologist:- बायें हाथ की नसें खींचती महसूस हो, छाती में घुटन या दबाव सा महसूस होता है, थोड़ा चलने से साँस फूलने लगती हो, मलाई, घी, तेल अत्यधिक मात्रा में लेते हों तो एक बार
कार्डिओलॉजिस्ट से परामर्श अवश्य कर लेना चाहिए।
# डेंटिस्ट– Dentist:- यह आपको पता
ही होगा दातों से सम्बंधित परेशानी के लिए सभी लोग डेंटिस्ट के पास ही जाते हैं।
दांत में कीड़ा हो या मसूड़ों से खून आता हो, दाँत में दर्द
हो, ठंडा गर्म दातों में लगता हो तो दांत का
किनारा मुंह में चुभ रहा हो तो इनकी मदद से लाभ होता है। 5 वर्ष की पढाई के बाद BDS ( बेचलर ऑफ़ डेंटल सर्जरी ) की डिग्री हासिल
करके डेंटिस्ट बनते हैं। PG कोर्स करके MDS की डिग्री ली
जाती है। इसी क्रम में दातों का टेढ़ापन दूर करने के लिए ब्रेसेस लगाने के विशेषज्ञ
भी होते है जिन्हें ओर्थोडोंटिस्ट कहते हैं। डेंटिस्ट अतिरिक्त पढाई करके
ऑर्थोडोन्टिस्ट की डिग्री लेते हैं।# डर्मेटोलॉजिस्ट– Dermatologist:- ये डॉक्टर त्वचा सम्बन्धी बीमारियों के
विशेषज्ञ होते हैं। त्वचा में कई तरह के विकार हो सकते हैं। त्वचा की बनावट, कार्यविधि तथा
बीमारी को ये अच्छे से समझते हैं।
# गायनेकोलोजिस्ट-Gynecologist महिलाओं की प्रजनन अंग से सम्बंधित परेशानी
और बीमारी का हल इनके पास होता है। गर्भाशय,योनी, ओवरी, मूत्र संसथान, यूरिन इन्फेक्शन आदि के सम्बन्ध में या इनकी जाँच
के लिए इनसे परामर्श करना चाहिए। गर्भावस्था में इनसे नियमित परामर्श लिया जाता
है। # गर्भावस्था और डिलीवरी से सम्बंधित एक और
अन्य विशेषज्ञ ओब्स्टेट्रिशन Obstetrician कहलाते हैं।
ओब्स्टेट्रिशन और गायनेकोलोजिस्ट में फर्क इतना होता है कि ओब्स्टेट्रिशन बच्चे का
सही तरीके से जन्म सुनिश्चित करते हैं,जबकि
गायनेकोलोजिस्ट प्रजनन अंगों की बीमारी भी ठीक कर सकते हैं।# पीडीयाट्रीशियन– Pediatrician:-
नवजात शिशु, बच्चे, किशोर और युवावस्था से सम्बंधित स्वास्थ्य समस्या
और उनके इलाज के लिए इनसे संपर्क करना उचित
होता है। 18 वर्ष तक की उम्र वाले बच्चों को इन्हे
दिखाया जा सकता है। बच्चों की बीमारियाँ, उनके टीके या
अन्य परेशानी में इनसे संपर्क करना चाहिए। बच्चे कोमल होते है और इन्हे कोमल उपचार
की जरुरत होती है। इन्हें बच्चों के साथ कैसे पेश आना है यह अच्छे से आता है।
# निओनेटोलोजिस्ट- Neonatologist:-
पीडियाट्रिक्स का एडवांस कोर्स करके निओनेटोलोजिस्ट बनते हैं।
नवजात शिशु को जन्म के तुरंत बाद इन्हें दिखा लेना चाहिए। ये नवजात शिशु से
सम्बंधित परेशानी तथा चेकअप आदि के विशेषज्ञ होते हैं। कभी कभी छोटी दिखने वाली
समस्या जीवन भर के लिए दिक्कत का कारण बन सकती है। इससे बचने के लिए इनका परामर्श
जरुर ले लेना चाहिए।# न्यूरोलोजिस्ट– Neurologist:- नर्वस सिस्टम से सम्बंधित परेशानी और उसके
उपचार के लिए न्यूरोलोजिस्ट से कंसल्ट करना चाहिए। नर्वस सिस्टम एक जटिल और
परिष्कृत कार्य प्रणाली है जिसके द्वारा ही छोटी से छोटी शारीरिक गतिविधि संभव हो
पाती है। न्यूरोलोजिस्ट मस्तिष्क, स्पाइनल कोड
तथा इन्द्रियों की गतिविधि, आँख,नाक,त्वचा की संवेदनायें आदि से सम्बंधित समस्या के
विशेषज्ञ होते हैं। अल्जाइमर, पार्किन्सन, मिर्गी आदि रोग का ये अच्छे से उपचार कर सकते
हैं। सिर दर्द,चक्कर आना,अचानक आँखों
के आगे अँधेरा छाना, हाथ पैरों में कंपन या सुन्न होना, कप गिलास आदि पकड़ने में दिक्कत,सही तरीके से चलने में दिक्कत होने पर
न्यूरोलोजिस्ट से जरुर परामर्श करना चाहिए। मस्तिष्क या नर्वस सिस्टम से सम्बंधित
ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर न्यूरोसर्जन कहलाते है।
# ओन्कोलोजिस्ट– Oncologist कैंसर से बचाव, जाँच, स्टेज तथा
उपचार से सम्बंधित सम्पूर्ण जानकारी के विशेषज्ञ ओन्कोलोजिस्ट होते हैं। कीमियो
थेरेपी, रेडियो थेरेपी आदि कैंसर के उपचार तथा इलाज
के बाद कैंसर की स्थिति आदि के सम्बन्ध में ये अच्छी तरह बता सकते हैं और मदद कर
सकते हैं। ये आपको कैंसर से लड़ने के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बना सकते
हैं। # ओर्थोपेडिक सर्जन– Orthopedic Surgeon:- हड्डी से सम्बंधित ऑपरेशन,हड्डी टूटना,अर्थराइटिस
जैसी परेशानी में ओर्थोपेडिक सर्जन से सलाह करनी चाहिए। इमरजेंसी में इनकी जरुरत हर हॉस्पिटल को होती
है।# ई एन टी– ENT
Specialist:- कान, नाक, गला रोग के ये
विशेषज्ञ होते हैं। गर्दन, मुंह या सिर से सम्बंधित परेशानी में भी इनसे मदद ली जा सकती है। टोंसिल
या साइनस आदि से सम्बंधित उपचार या ऑपरेशन
ये कर सकते हैं। # साईकियाट्रिस्ट– Psychiatrist:- व्यवहार और मानसिक स्थिति से सम्बंधित
परेशानी में इनसे मदद लेनी चाहिए। ये
डिप्रेशन, लड़ाई झगड़े,मानसिक तनाव
आदि से बचने के रास्ते सुझा सकते हैं साथ ही कुछ दवाओं की मदद से आपको मानसिक रूप
से मजबूत बना सकते हैं। इनके परामर्श के बाद आत्महत्या जैसे विचार मन से बिलकुल
निकल जाते है। ये जीवन जीने की नई राह दिखा सकते हैं।
# रेडियोलोजिस्ट–
Radiologist:- हर तरह के एक्स रे X-ray, सिटी स्केन CT scain, एम आर आई MRI,अल्ट्रा साउंड
तथा अन्य कई आधुनिक तकनीक की मदद से समस्या का सटीकता के साथ पता करके उपचार करने
के विशेषज्ञ रेडियोलोजिस्ट होते हैं। किसी भी डॉक्टर के लिए इनसे परामर्श करने के
बाद उपचार करना ज्यादा आसान हो जाता है। इसके अलावा रेडिएशन का शरीर पर प्रभाव और
उससे बचाव की भी इन्हें सम्पूर्ण जानकारी होती है।# यूरोलोजिस्ट– Urologist:- मूत्र संसथान से सम्बंधित महिला और पुरुषों
के अंगों की समस्या के लिए यूरोलोजिस्ट से परामर्श करना चाहिए। ये डॉक्टर गुर्दे ( kidney ) मूत्राशय, मूत्र नली, एड्रिनल ग्लेंड्स के अलावा पुरुषों के प्रजनन अंग
से सम्बंधित जानकारी और उपचार के विशेषज्ञ होते हैं। प्रोस्टेट या वृषण की समस्या, पेशाब में तकलीफ आदि के लिए इनसे मदद लेनी चाहिए।
ये इन अंगों से सम्बंधित ऑपरेशन भी कर सकते हैं।# गेस्ट्रोएंटरोलोजिस्ट- Gastroenterologist:-
पाचन सम्बन्धी अंगों की परेशानी में इनसे संपर्क करना चाहिए। ये
पेट, लीवर, पेन्क्रियास, पित्ताशय, छोटी आंत बड़ी
आंत, गुदा आदि से सम्बंधित समस्या,बीमारी और उनके उपचार के विशेषज्ञ होते हैं।
एसिडिटी, सीने मे जलन, भूख न लगना, उल्टी, जी घबराना, पेट में अल्सर, पेट में दर्द, पेट फूलना, कब्ज, डकार ज्यादा आना, पित्ताशय में
पथरी, दस्त, पेचिश, बवासीर आदि
समस्या के लिए इनसे परामर्श करना चाहिये।
# नेफ्रोलोजिस्ट– Nephrologist:- ये किडनी यानि गुर्दे से सम्बंधित बीमारी
के विशेषज्ञ होते हैं। किडनी की समस्या का पता लगाना और उसका उपचार करना इनका
विशेष क्षेत्र होता है। किसी विशेष बीमारी जैसे डायबिटीज आदि से किडनी पर पड़ने
वाले प्रभाव और उससे बचाव आदि के बारे में ये अधिक जानकारी रखते हैं। ये दवा के
माध्यम से उपचार करते हैं। यूरोलोजिस्ट और
नेफ्रोलोजिस्ट में फर्क यही होता कि यूरोलोजिस्ट सर्जरी भी करते है लेकिन
ये नहीं।# पल्मोनोलोजिस्ट– Pulmonologist:- ये श्वसन तंत्र यानि साँस चलने के लिए काम
आने वाले अंगों की समस्या का पता लगाने और उसके उपचार के विशेषज्ञ होते है। इन
अंगों में नाक, गला, श्वास नली, डायाफ्राम, फेफड़ें और
फेफड़ों की मांसपेशियाँ आदि शामिल हैं। न्युमोनिया, अस्थमा या टी
बी आदि के उपचार के लिए इनसे संपर्क करना चाहिए।






