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- VVPAT मशीन (Voter Verifiable Paper Audit Trail) कैसे करती है काम....?
Posted by : achhiduniya
11 April 2019
देश के हर नागरिक का वोट बेहद महत्वपूर्ण है। वोट
देने के लिए आपके पास वोटर आईडी कार्ड होना चाहिए, साथ ही आपका नाम वोटर लिस्ट में दर्ज होना चाहिए। वोट दर्ज के करने के लिए
जिस इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का इस्तेमाल होता है उसे इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन,
यानी EVM कहते हैं। इसमें दो इकाइयां होती
हैं। एक के माध्यम से वोट दर्ज कराए जाते हैं, जिसे मतदान
इकाई कहते हैं, जबकि दूसरे से इसे नियंत्रित किया जाता है,
जिसे कंट्रोल यूनिट कहा जाता है। नियंत्रण इकाई मतदान अधिकारी के
पास होती है,वहीं मतदाता इकाई मतदान कक्ष के भीतर रखी जाती
है।
EVM की विश्वसनीयता कायम रखने के लिए VVPAT यानी वोटर वेरीफाएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (Voter Verifiable Paper
Audit Trail) मशीन की मदद ली जा रही है। VVPAT का इस्तेमाल EVM पर उठ रहे सवालों के बाद से ही शुरू
हुआ। सबसे पहले VVPAT का इस्तेमाल नगालैंड के चुनाव में 2013
में हुआ था, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने वीवीपैट मशीन (VVPAT
Machine) बनाने और इसके लिए पैसे मुहैया कराने के केंद्र सरकार को
आदेश दिए थे। साल 2014 में कुछ जगहों पर वीवीपैट का इस्तेमाल किया गया था। 2014 के
लोकसभा चुनाव में वीवीएपीएटी का इस्तेमाल लखनऊ, गांधीनगर,
बैंगलोर दक्षिण, चेन्नई सेंट्रल, जादवपुर, रायपुर, पटना साहिब
और मिजोरम निर्वाचन क्षेत्रों में हुआ था। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ने साल
2016 में 33,500 वीवीरपैट मशीन बनाईं। साल 2017 में हुए पांच राज्यों के विधानसभा
चुनावों में आयोग ने 52,000 वीवीपैट का इस्तेमाल किया। VVPAT यानी वोटर वेरीफायएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (Voter Verifiable Paper
Audit Trail) मशीन को EVM के साथ जोड़ दिया
जाता है।
मतदाता EVM पर अपने पसंदीदा प्रत्याशी के नाम के
सामने वाले नीले बटन को दबाने के बाद VVPAT पर विजुअली सात
सेकंड तक देख सकता है कि उसने किसे वोट किया है, यानी कि
उसका वोट उसके अनुसार ही पड़ा है या नहीं। मतदाता जिस विजुअल को देखता है, उसकी पर्ची बनकर एक सीलबंद बॉक्स में गिर जाती है जो कि मतदाता को नहीं दी
जाती है। इस पर्ची पर उस प्रत्याशी का नाम, चुनाव चिन्ह और
पार्टी का नाम अंकित होता है, जिसे मतदाता EVM पर वोट देता है। ऐसे में अगर आपके मतदान केंद्र पर EVM के साथ VVPAT है तो आप वोट दर्ज करने के बाद VVPAT
पर ये देख सकते हैं कि आपका वोट आपके अनुसार पड़ा या नहीं। भारत
इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) बंगलूरू और इलेक्ट्रॉनिक कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया
लिमिटेड (ECIL) हैदराबाद ने यह मशीन 2013 में डिजाइन की।
दोनों भारत सरकार के उपक्रम हैं।
बीईएल रक्षा मंत्रालय के अधीन सैन्य, नागरिक उपकरण एवं संयंत्र बनाने वाली संस्था है। जबकि ECIL डिपार्टमेंट ऑफ ऑटोमिक इनर्जी का उपक्रम है। इन कंपनियों द्वारा निर्मित
ईवीएम और वीवीपैट पर सवाल उठ रहे हैं। इस बीच चुनाव आयोग ने सरकार के उस प्रस्ताव
को नामंजूर कर दिया, जिसमें सरकार की ओर से VVPAT मशीनों को प्राइवेट सेक्टर से खरीदने की सलाह दी गई थी। चुनाव आयोग ने
सरकार से कहा है कि अगर ऐसा होता है तो आम आदमी के विश्वास को ठेस पहुंचेगी। वोट
डालने के तुरंत बाद VVPAT से कागज की एक पर्ची निकलती है। इस
पर जिस उम्मीदवार को वोट दिया गया है, उनका नाम और चुनाव
चिह्न छपा होता है। इससे पता चल जाता है
कि जिसे वोट दिया उसी को वोट गया या फिर इसमें कोई गड़बड़ी हो गई। यह व्यवस्था
इसलिए भी है कि किसी तरह का विवाद होने पर ईवीएम में पड़े वोट के साथ पर्ची का
मिलान किया जा सके।



