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लोकसभा चुनाव में वंशवाद की राजनीति ने डुबोया कांग्रेस की नाव को.....कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने स्वीकारा
Posted by : achhiduniya
26 May 2019
लोकसभा चुनाव में करारी हार की जिम्मेदारी लेते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को पार्टी की कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में इस्तीफे की पेशकश की, लेकिन सदस्यों ने सर्वसम्मति इसे ठुकरा दिया और प्रतिकूल परिस्थिति में उनसे पार्टी का नेतृत्व करते रहने का आग्रह किया। साथ ही सीडब्ल्यूसी की बैठक में गांधी को पार्टी संगठन में हर स्तर पर आमूलचूल परिवर्तन के लिए अधिकृत किया गया। राहुल गांधी ने कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं पर आरोप लगाया कि उन्होंने पार्टी से पहले अपने बेटों के हित को रखा। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने कहा कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ और वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने पार्टी से पहले पुत्र-हित को आगे रखा।
राहुल गांधी ने लोकसभा
चुनाव की हार की जिम्मेदारी ली और कहा कि वह अध्यक्ष पद पर बने नहीं रहना चाहते
हैं, लेकिन पार्टी एवं इसकी विचारधारा के लिए
काम करते रहेंगे. सोनिया गांधी, मनमोहन सिंह, प्रियंका गांधी तथा पार्टी के दूसरे वरिष्ठ
नेताओं ने उन्हें रोका। इस दौरान कुछ नेता भावुक भी हो गए। बैठक के बाद पार्टी के
वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने संवादाताओं से कहा, राहुल गांधी
जी ने इस्तीफे की पेशकश की। सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से उनकी पेशकश को खारिज
किया और आग्रह किया कि आपके नेतृत्व की जरूरत है और आगे भी रहेगी। उन्होंने कहा, अगर कोई नेता राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष की भूमिका
निभा सकता है तो वह राहुल गांधी हैं।
सीडब्ल्यूसी ने कहा, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कांग्रेस
कार्यसमिति के सम्मुख अध्यक्ष पद से अपने इस्तीफे की पेशकश की, मगर कार्यसमिति के सदस्यों ने सर्वसम्मति व एक
स्वर से इसे खारिज करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष का आह्वान किया कि प्रतिकूल व
चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में पार्टी को राहुल गांधी के नेतृत्व व मार्गदर्शन की
आवश्यकता है। प्रस्ताव में कहा गया है,कांग्रेस
कार्यसमिति ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को देश के युवाओं, किसानों, महिलाओं, अनुसूचित जाति/जनजाति/पिछड़ों, गरीबों, शोषितों व
वंचितों की समस्याओं के लिए आगे बढ़कर जूझने का आग्रह किया। सीडब्ल्यूसी
ने कहा, कांग्रेस कार्यसमिति उन चुनौतियों, विफलताओं और कमियों को स्वीकार करती है, जिनकी वजह से ऐसा जनादेश आया।
कांग्रेस
कार्यसमिति पार्टी के हर स्तर पर संपूर्ण आत्मचिंतन के साथ साथ कांग्रेस अध्यक्ष
को अधिकृत करती है कि वह पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में आमूलचूल परिवर्तन एवं
विस्तृत पुनर्संरचना करें। इसके लिए योजना जल्द से जल्द लागू की जाए। प्रस्ताव में
यह भी कहा गया है,कांग्रेस पार्टी ने चुनाव हारा है, लेकिन हमारा अदम्य साहस, हमारी संघर्ष की भावना और हमारे सिद्धांतों के
प्रति हमारी प्रतिबद्धता पहले से ज्यादा मजबूत है। कांग्रेस पार्टी नफरत और विभाजन
की ताकतों से लोहा लेने के लिए सदैव कटिबद्ध है।



