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- मजबूर सरकार की अपेक्षा गठबंधन की मजबूर सरकार बेहतर मानते है शेयर बाजार के दिग्गज.....
Posted by : achhiduniya
17 May 2019
देश में 1989 से ही गठबंधन की सरकारें रही हैं। 2014 में भी
नरेंद्र मोदी ने एनडीए सरकार की ही अगुआई की। यह अलग बात है कि अकेले दम पर बहुमत
हासिल होने के कारण बीजेपी का सरकार पर दबदबा रहा। बॉम्बे स्टॉक मार्केट (बीएसई)
का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 1989 से 1991 के दो वर्षों में दोगुने से भी ज्यादा
बढ़ा। उसी तरह, 2004 से 2014 के बीच मनमोहन सिंह की यूपीए
गठबंधन वाली सरकार में भी सेंसेक्स करीब-करीब 5 गुना चढ़ा। फर्स्ट ग्लोब के वॉइस
चेयरमैन और जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर शंकर शर्मा ने पिछले महीने एक इंटरव्यू में
कहा था, मुझे लगता है कि भारत के लिए गठबंधन सरकार
बेहतर है।
यह मेरा विचार है। उन्होंने अपनी राय के समर्थन में कुछ आंकड़े भी पेश
किए। उन्होंने कहा, भारत के विकास के नजरिए से 1991 से 2014 के
बीच 25 वर्ष की अवधि सर्वोत्तम रही। गठबंधन सरकार नियंत्रण में रहने से
अति-केंद्रीकृत फैसले की जगह संतुलित फैसले लेने को बाध्य होती है जिससे सत्ता का
लोकतांत्रिक संचालन सुनिश्चित होता है। अगर अर्थव्यवस्था जैसे जटिल क्षेत्रों में
एक या मुट्ठीभर के कुछ लोग फैसले लेने लगें तो कभी-कभार तो यह उचित जान पड़े, लेकिन कभी-कभी यह गलत भी हो सकते हैं। एक तरफ
दलाल स्ट्रीट मोदी सरकार की सत्ता में वापसी से शेयर बाजार में मजबूती की उम्मीद
लगा रखा है, तो दूसरी तरफ बाजार की कुछ दिग्गज हस्तियों
का विचार है कि वास्तव में गठबंधन की सरकार नीतिगत मोर्चे पर बेहतर प्रदर्शन कर
सकती है।
उनका कहना है कि गठबंधन सरकार नियंत्रित और संतुलित फैसले लेती है जो
अर्थव्यवस्था के लिए ज्यादा फलदायी होते हैं। आंकड़े बताते हैं कि घरेलू शेयर
बाजार पूर्व की गठबंधन सरकारों में बेहतर रिटर्न दिया था। हालांकि, बाजार से जुड़े एक वर्ग का मानना है कि केंद्र
में सरकार किसकी बनती है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। मार्सेलस
कैपिटल के फाउंडर सौरभ मुखर्जी के मुताबिक, अगर भारत के
पिछले 40 से 50 वर्षों का इतिहास देखा जाए तो स्पष्ट हो जाता है कि राजनीति का
अर्थव्यवस्था या शेयर बाजार पर कुछ खास असर नहीं पड़ता है। उन्होंने कहा कि पिछले
पांच दशकों में भारत की जीडीपी ग्रोथ पिछले दशक से बेहतर रही थी।
मुखर्जी ने पिछले
महीने एक इंटरव्यू में कहा था, 'निश्चित तौर
पर हमें खुद या दूसरों को यह समझाना एक कठिन काम है कि पिछले पांच दशकों में देश
के पास कुछ चमत्कारी आर्थिक नेतृत्व थे जिनकी वजह से उस दौरान देश की प्रगति संभव
हो पाई। वहीं, ऐशमोर इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट इंडिया के
को-फाउंडर अश्विनी अगरवाल ने ईटी नाउ के साथ बातचीत में कहा, गठबंधन की कमजोर सरकार कोई बुरी चीज नहीं है।
इसकी सफलता या असफलता इस बात पर पूरी तरह निर्भर करती है कि प्रधानमंत्री कौन है।
इसके अलावा, यह किस तरह की सरकार है, कौन वित्त मंत्री है, सरकार गठन और नए वित्त मंत्री के पदभार संभालने
के दरम्यान आरबीआई कैसी भूमिका निभाता है, नया बजट कैसा
दिखेगा, इन सब कारकों पर सरकार की सफलता निर्भर
करती है।




