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राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष शरद पवार का राजनीतिक दबदबा-तजुर्बा भी नही लगा पाया नैया पार....पार्टी मे चल रही मंथन मीटिंग
Posted by : achhiduniya
02 June 2019
2019 लोकसभा चुनाव में एनसीपी अध्यक्ष को 4 सीटें मिली हैं। इस चुनाव में शरद पवार ने प्रचार की
कमान खुद संभाली थी, पार्टी
के एक-एक प्रत्याशी के बड़े केलकुलेशन के साथ टिकट दिया था। कहा जाता है कि पवार
का गणित जल्दी फेल नहीं होता, लेकिन
इस बार पीएम मोदी की लहर में असफल साबित हुए। 19 प्रत्याशियों में से शरद पवार के
पांच प्रत्याशी जीते। पवार के पोते पार्थ पवार भी महाराष्ट्र के मावल सीट से हार
गए। ऐसा पहली बार हुआ है कि पवार खानदान का कोई इलेक्शन हारा है, यानी शरद पवार इस बार भी चुक गए। रिजल्ट के पहले शरद पवार ने चंद्रबाबू नायडू के
साथ मिलकर माहौल ऐसा बनाया था मानो 2019 का पीए बनाने में इनकी अहम भूमिका होगी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं।
लोकसभा में हुई करारी हार के बाद
मुंबई में एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार की अध्यक्षता में शनिवार को पार्टी के नेताओं
के साथ बैठक हुई। ऐसा लग रहा था कि इस बैठक में कुछ नया होगा, लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं। सूत्रों कि मानें तो इस बैठक
में पार्टी के नेतृत्व पर सवाल उठाने की किसी ने हिम्मत नहीं दिखाई और नही शरद
पवार की तरफ से कोई नेतृत्व बदलाव के संकेत मिले। लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार
के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपनी नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए अपना
इस्तीफा दिया। उनके साथ ही राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों ने अपने इस्तीफे की पेशकश
की, लेकिन
एनसीपी की बैठक में ऐसा कुछ नहीं हुआ। शरद पवार ने अपनी इस्तीफे की पेशकश नहीं की।
पार्टी नेतृत्व की बागडोर शरद पवार परिवार के अलावा किसी और के हाथ मे जाए इसे
लेकर कुछ नहीं कहा। सब कुछ पहले से ही सेट और तय लग रहा था।
एनसीपी सांसद माजीद
मेमन ने कहा, शरद
पवार हमारे पार्टी के मुख्य मार्गदशक हैं, आज की मीटिंग में नेतृत्व परिवर्तन की मांग नहीं उठी
और पार्टी अध्यक्ष की तरफ से इस्तीफे की कोई पेशकश नहीं हुई। आगामी विधानसभा में
जीते के लिए कार्यकर्ताओं को मेहनत से काम करने के लिए कहा है। शरद पवार की मीटिंग
में एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल, छगन
भुजबल, सुप्रिया
सुले, जैसे
आला नेता और लगभग सभी सासंद और विधायक और पदाधिकारि मौजूद थे। पवार की मंथन मीटिंग
में हुई ये बातें:- जिस सीटों पर एनसीपी नहीं जीती है, उन जगहों पर पुराने चेहरे की बजाय युवा चेहरों को
दिया जाए मौक़ा यानी अब एनसीपी में हो सकता है बड़ा परिवर्तन। महाराष्ट विधानसभा
चुनावों में ज्यादा युवाओं को मिल सकता है मौका।
EVM मशीन
को लेकर उठे सवाल कहा गया की ईवीएम से मतदान नहीं कराया जाए। बैलट पेपर से मतदान
कराने पर दिया गया ज़ोर। प्रकाश
आंबेडर के वंचित बहुजन आघाड़ी को लेकर हुई चर्चा। कुछ नेताओं का कहना प्रकाश आंबेडकर को साथ लेकर
विधानसभा चुनाव लड़ा जाए। कुछ
नेताओं का कहना है कि प्रकाश आंबेडकर एनसीपी के साथ नहीं आएंगे। कांग्रेस के साथ
एनसीपी के विलय पर कोई चर्चा नहीं हुई।



