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ना चूल्हे का धुआं और ना बिजली या एलपीजी का इंतज़ार...देश का पहला सोलर विलेज बना मध्यप्रदेश का ये गांव...
Posted by : achhiduniya
05 June 2019
आईआईटी मुंबई, ONGC और विद्या भारतीय
शिक्षण संस्थान दावा हैं कि बैतूल जिले का बांचा देश का पहला ऐसा गांव है जहां
किसी घर में लकड़ी का चूल्हा नहीं है। एलपीजी सिलेंडर उपयोग नहीं होता है। बैतूल
ज़िले के घोड़ा डोंगरी ब्लॉक के इस गांव में सिर्फ 74 गांव हैं। गांव के हर घर की
गृहिणी सोलर कुकर में खाना बनाती है। ना चूल्हे का धुआं और ना बिजली या एलपीजी का
इंतज़ार। लकड़ी इकट्ठा करने की चिंता नहीं
और जंगल भी बच गया। बैतूल के विद्या भारती शिक्षण संस्थान की पहल पर आईआईटी मुम्बई
के तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने ये कमाल कर दिखाया है। सौर्य ऊर्जा के इस्तेमाल के
कारण ये गांव वाले अब बिजली के लिए कोयले या पानी से बिजली की उपलब्धता पर निर्भर
नहीं हैं।
सूर्य देव की कृपा से गांव रौशन है। गांव 100 फीसदी प्रदूषण मुक्त है और
हर गृहणी का जीवन आसान हो गया है। इस प्रॉजेक्ट के बारे में बांचा के लोगों का
कहना है कि सोलर प्लांट के लग जाने के बाद से उन्हें अब जंगलों में लकड़ी काटने
जाने की जरूरत नहीं पड़ती। इसके अलावा स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल से बर्तन भी काले
नहीं होते, जिसके कारण उनका समय और मेहनत दोनों ही
बचते हैं। बता दें कि केंद्र सरकार और अलग-अलग राज्यों की सरकारों द्वारा पूर्व
में सौर ऊर्जा को आम लोगों की जिंदगी से जोड़ने के लिए करोड़ों रूपये की योजनाएं
लाई जाती रही हैं। वहीं विश्व में बढ़ रही जनसंख्या और बिजली की डिमांड को देखते
हुए सौर ऊर्जा की मदद से जीवन को आसान बनाने वाले बैतूल के इन लोगों ने दुनिया के
सामने कोशिशों से नई मिसाल पेश की है।

