- Back to Home »
- Suggestion / Opinion »
- आर्थिक मंदी-गिरती अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए सरकार के आगे बड़ी चुनौती....
Posted by : achhiduniya
24 June 2019
आर्थिक क्षेत्र के विशेषज्ञ प्रोफेसर एन.आर. भानुमूर्ति का
मानना है की अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में सुस्ती गहरा
रही है। विश्व बाजार मंदी की तरफ बढ़ रहा है। अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व
ने भी इस ओर संकेत दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में यदि मांग घटती है तो भारतीय
निर्यात कारोबार पर भी उसका असर होगा। कच्चे तेल के दाम में उतार-चढ़ाव का मुद्दा
भी हमारे सामने है। मानसून को लेकर भी चिंता बढ़ी है। इसका हमारी अर्थव्यवस्था पर
गंभीर असर होगा। ऐसे में सरकार के समक्ष बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है। राष्ट्रीय लोक
वित्त एवं नीति संस्थान (एनआईपीएफपी) में प्रोफेसर एन आर भानुमूर्ति ने कहा कि
सरकार के समक्ष आगामी बजट में आंकड़ों को वास्तविक धरातल पर रखते हुये बजट तैयार
करने की चुनौती है।
![]() |
| [प्रोफेसर एन आर भानुमूर्ति] |
भानुमूर्ति मौजूदा कठिन आर्थिक परिस्थितियों से बाहर निकलने के बारे में सलाह देते हुये कहते हैं कि सरकार को तेज गति के साथ बैंकों का पुनर्पूंजीकरण करना होगा। वित्त वर्ष की समाप्ति तक इसकी प्रतीक्षा नहीं की जानी चाहिये। 2018- 19 के बजट में अनुमानित 3.4 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिये सरकार को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी है। वर्ष के संशोधित अनुमानों में भारी वृद्धि के चलते सरकार को तय लक्ष्यों को हासिल करना मुश्किल हो गया था। वर्ष 2018- 19 में निगम कर के 6,21,000 करोड़ रुपये के बजट अनुमान को संशोधित अनुमानों में बढ़ाकर 6,71,000 करोड़ रुपये कर दिया गया। वर्ष की चौथी तिमाही में सकल घरेल उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर पांच साल के निम्नस्तर 5.8 प्रतिशत पर आ गई है।
वार्षिक जीडीपी वृद्धि का आंकड़ा भी 6.8 प्रतिशत रह गया, जो कि पिछले पांच साल में सबसे कम रहा है। उन्होंने कहा,मेरे विचार से बचत को बढ़ावा देने के लिये सरकार को एक लाख रुपये तक की अतिरिक्त कर बचत वाली नई योजनाओं की घोषणा करनी चाहिये। ब्याज दरों में कटौती का फायदा अर्थव्यवस्था में नहीं दिखाई दे रहा है,इसलिये सरकार को बचत को बढ़ावा देना चाहिये। उन्होंने कहा कि गैर- बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और बैंक क्षेत्र का संकट समाप्त होता नहीं दिख रहा है।



