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23 दिन से जारी फ्लोर टेस्ट की सियासी उठापटक में मुंह के बल गिरी कर्नाटक की कांग्रेस-जेडीएस सरकार....
Posted by : achhiduniya
23 July 2019
कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन ने 14 महीने
116 विधायकों के साथ सरकार चलाई। 1 जुलाई को कांग्रेस के दो विधायकों के इस्तीफे
के बाद पिछले लगभग 23 दिन से राज्य में सियासी उठापटक का माहौल था। राज्य में कुल
15 विधायकों के इस्तीफे के बाद 18 जुलाई को फ्लोर टेस्ट की तारीख तय हुई थी। लेकिन बार-बार हंगामे के कारण फ्लोर टेस्ट नहीं
हो सका। फ्लोर टेस्ट में हारने के बाद एचडी कुमारस्वामी अपना इस्तीफा सौंपेंगे
जिसके बाद भाजपा सरकार बनाने का दावा पेश करेगी। भारतीय जनता पार्टी कल विधायक दल
की बैठक करेगी। जिसके बाद येदियुरप्पा चौथी बार सीएम बन सकते हैं।
कर्नाटक में लगभग
23 दिन से चल रही भारी सियासी उठापटक के बाद कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन की सरकार गिर
गई है। राज्य में भारतीय जनता पार्टी को बहुमत मिला है। जहां कांग्रेस-जेडीएस
गठबंधन को 99 वोट मिले तो वहीं भारतीय जनता पार्टी को 105 वोट मिले। कर्नाटक में
पिछले 21 दिन से जारी सियासी उठापटक का आखिरकार अंत हो गया है। बार-बार टलने के
बाद मंगलवार को कांग्रेस-जेडीएस सरकार का फ्लोर टेस्ट हुआ जिसके परिणाम में गठबंधन
सरकार को हार का सामना करना पड़ा। इससे पहले सोमवार को भी फ्लोर टेस्ट के लिए देर
रात जनता दल सेक्यूलर और कांग्रेस विधायकों के साथ भारतीय जनता पार्टी के विधायकों
का टकराव होता रहा। जहां एक ओर बीजेपी विधायक विश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग को लेकर
अड़े रहे।
वहीं स्पीकर केआर रमेश कुमार ने कुमारस्वामी सरकार को हर हालत में
मंगलवार शाम 6 बजे तक बहुमत साबित करने का अल्टीमेटम दिया। फ्लोर टेस्ट से पहले
विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए सीएम एचडी कुमारस्वामी
ने कहा था कि खुशी से अपने पद का बलिदान करने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि विश्वास
मत की कार्यवाही को लंबा खींचने की उनकी कोई मंशा नहीं थी। उन्होंने कहा, मैं विधानसभाध्यक्ष और राज्य की जनता से माफी मांगता हूं। कुमारस्वामी
ने कहा, यह भी चर्चा चल रही है कि मैंने इस्तीफा क्यों नहीं
दिया और कुर्सी पर क्यों बना हुआ हूं। उन्होंने कहा कि जब 2018 में विधानसभा चुनाव
का परिणाम आया था, वह राजनीति छोड़ने की सोच रहे थे। कुमारस्वामी
ने कहा, मैं राजनीति में अचानक और अप्रत्याशित तौर पर आया था।


