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- स्वदेशी तकनीक से बने चंद्रयान-2 ने भरी चांद पर पहुंचने के लिए उड़ान...पीएम मोदी ने दी बधाई
Posted by : achhiduniya
22 July 2019
चंद्रयान-2 श्रीहरिकोटा
के प्रक्षेपण स्थल से चांद तक के 3 लाख 84 हजार किलोमीटर के सफर पर निकल चुका है। चंद्रयान
सिर्फ 16 मिनट बाद पृथ्वी की कक्षा में स्थापित हो
गया। इसरो चीफ के.सिवन ने चंद्रयान की सफल लॉन्चिंग की घोषणा करते हुए कहा कि इस
मिशन की सोच से बेहतर शुरुआत हुई है। इसरो की इस शानदार कामयाबी पर पीएम नरेंद्र
मोदी ने बधाई दी है। आपको बता दें कि करीब 50 दिन बाद 6 से 8 सितंबर के बीच
चांद पर भारत का चंद्रयान उतरेगा। 16 दिनों बाद चंद्रयान पृथ्वी की कक्षा
से बाहर निकलेगा। इस दौरान चंद्रयान-2 से रॉकेट अलग हो जाएगा। 5 दिनों बाद
चंद्रयान-2 चांद की कक्षा में पहुंचेगा।
इस दौरान उसकी गति 10 किलोमीटर प्रति
सेकंड और 4 किलोमीटर प्रति सेंकंड रहेगी। धरती और चंद्रमा के बीच की दूरी लगभग 3 लाख
84 हजार किलोमीटर है। लॉन्चिंग के बाद चंद्रमा के लिए लंबी यात्रा शुरू होगी।
चंद्रयान-2 में लैंडर-विक्रम और रोवर-प्रज्ञान चंद्रमा तक जाएंगे। चांद की सतह पर
उतरने के 4 दिन पहले रोवर 'विक्रम' उतरने वाली
जगह का मुआयना करना शुरू करेगा। लैंडर यान से डिबूस्ट होगा। 'विक्रम' सतह के और
नजदीक पहुंचेगा। उतरने वाली जगह को स्कैन करना शुरू करेगा और फिर शुरू होगी
लैंडिंग की प्रक्रिया। लैंडिंग के बाद लैंडर (विक्रम) का दरवाजा खुलेगा और वह रोवर
(प्रज्ञान) को रिलीज करेगा।
रोवर के निकलने में करीब 4 घंटे का समय लगेगा। फिर यह
वैज्ञानिक परीक्षणों के लिए चांद की सतह पर निकल जाएगा। इसके 15 मिनट के अंदर ही
इसरो को लैंडिंग की तस्वीरें मिलनी शुरू हो जाएंगी। पीएम मोदी ने इस ऐतिहासिक पल
के लिए इसरो को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि चंद्रयान-2 की सफल लॉन्चिंग हमारे
वैज्ञानिकों की ताकत को दर्शाता है। पूरा भारत इस क्षण पर गर्व महसूस कर रहा है।
राज्यसभा और लोकसभा में इसरो की इस शानदार सफलता पर बधाई दी गई। राज्यसभा स्पीकर
वेकैंया नायडू ने इसरो को इस अदभुत सफलता के लिए बधाई दी जबकि लोकसभा अध्यक्ष ओम
बिरला ने भी इसरो को बधाई दी।
स्वदेशी तकनीक से निर्मित चंद्रयान2 में कुल 13
पेलोड हैं। आठ ऑर्बिटर में, तीन पेलोड लैंडर विक्रम और दो पेलोड रोवर प्रज्ञान में हैं। पांच पेलोड भारत के, तीन यूरोप, दो अमेरिका और
एक बुल्गारिया के हैं। लैंडर विक्रम का नाम भारतीय
अंतरिक्ष अनुसंधान कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम ए साराभाई के नाम पर रखा गया है।
दूसरी ओर, 27 किलोग्राम प्रज्ञान का मतलब संस्कृत में बुद्धिमता है। इसरो चंद्रयान-2 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव
पर उतारेगा।



