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सरकार की आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति,जो भारत को तोड़ने की बात करेगा उसको उसी भाषा में जवाब मिलेगा... अमित शाह
Posted by : achhiduniya
01 July 2019
गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर पर चर्चा का
जवाब दिया। सोमवार को राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर
में राष्ट्रपति शासन की अवधि 6 महीने बढ़ाने के लिए बिल और जम्मू-कश्मीर रिजर्वेशन
संशोधन बिल 2019 राज्यसभा में पेश किया गया। इसी को लेकर चर्चा का जवाब देते हुए
गृह मंत्री ने कहा, मैं नरेन्द्र मोदी सरकार की तरफ से सदन के
सभी सदस्यों तक ये बात रखना चाहता हूं कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और इसे कोई
देश से अलग नहीं कर सकता। मैं फिर दोहराना चाहता हूं कि नरेन्द्र मोदी सरकार की
आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति है।
उन्होंने कहा कि जम्हूरियत सिर्फ
परिवार वालों के लिए ही सीमित नहीं रहनी चाहिए। जम्हूरियत गांव तक जानी चाहिए, चालीस हज़ार पंच, सरपंच तक जानी
चाहिए और ये ले जाने का काम हमने किया। जम्मू कश्मीर में 70 साल से करीब 40 हजार
लोग घर में बैठे थे जो पंच-सरपंच चुने जाने का रास्ता देख रहे थे। क्यों अब तक
जम्मू-कश्मीर में चुनाव नहीं कराये गये, और फिर
जम्हूरियत की बात करते हैं। मोदी सरकार ने जम्हूरियत को गांव-गांव तक पहुंचाने का
काम किया है। अमित शाह ने सवालिया लहजे में कहा कि सूफी परंपरा कश्मीरियत का
हिस्सा नहीं थी क्या? पूरे देश में सूफियत का गढ़ था कश्मीर, कहां चली गई वो संस्कृति? उनको घरों से निकाल दिया गया। उनके धार्मिक
स्थानों को तोड़ दिया गया। सूफी संतों को चुन-चुन कर मारा गया।
जो भारत को तोड़ने
की बात करेगा उसको उसी भाषा में जवाब मिलेगा और जो भारत के साथ रहना चाहते हैं
उसके कल्याण के लिए हम चिंता करेंगे। जम्मू कश्मीर के लोगों को डरने की जरुरत नहीं
है। कांग्रेस को एक बात बतानी चाहिए कि 1949 को जब एक तिहाई कश्मीर पाकिस्तान के
कब्जे में था तो आपने सीजफायर क्यों कर दिया। ये सीजफायर न हुआ होता ये झगड़ा ही न
होता, ये आतंकवाद ही नहीं होता, करीब 35 हजार जानें नहीं गई होतीं। इन सबका मूल
कारण सीजफायर ही था। जम्मू कश्मीर के लिए 80 हजार करोड़ रुपये की प्रधानमंत्री
नरेन्द्र मोदी जी ने घोषणा कि थी। भारत सरकार के 15 मंत्रालयों की 63 परिजानाएं दी
गई थी। 63 में से 16 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। 80 हजार करोड़ रुपये में से 80
प्रतिशत धनराशि वहां पहुंच चुकी है।


