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प्रेम नाम है मेरा प्रेम चोपड़ा....अखबार के दफ्तर में सर्कुलेशन डिपार्टमेंट में नौकरी के सफर से सुपर विलेन तक....
Posted by : achhiduniya
23 September 2019
23 सितंबर 1935 को लाहौर में प्रेम चोपड़ा जन्मे भारत के विभाजन के बाद उनका
परिवार शिमला में आकर बस गया। आज प्रेम चोपड़ा 84 साल के हो चुके हैं। प्रेम
चोपड़ा की बॉलीवुड में एंट्री का किस्सा भी किसी फिल्मी कहानी जैसा ही है। बीते बॉलीवुड दौर में विलेन या तो
काफी ज्यादा पावरफुल अजीत और प्राण जैसे होते थे या फिर कोई गली मोहल्ले के छुरे
बाज, लेकिन इन्हीं के बीच एक विलेन ऐसा आया जो स्मार्टनेस में हीरो
को भी टक्कर देता था और जिसका थ्री पीस सूट वाला स्टाइल उसका ग्रेस बढ़ा देता था। प्रेम
नाम है मेरा प्रेम चोपड़ा....इसी डायलॉग के साथ तो प्रेम चोपड़ा का खौफनाक वाला
अंदाज याद किया जाता है, लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि
इस विलेन ने बॉलीवुड में हीरो बनकर एंट्री ली थी।
50 साल से
ज्यादा समय से फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय प्रेम चोपड़ा को ट्रेन के सफर के दौरान अपनी मंजिल मिली थी। प्रेम चोपड़ा
आंखों में एक्टर बनने का सपना लिए मुंबई आई थे। जिसके लिए उन्होंने कई स्टूडियोज
के चक्कर भी लगाए,लेकिन काम तो आसानी से मिलने से रहा तो उन्होंने
मुंबई में एक अंग्रेजी अखबार के दफ्तर में सर्कुलेशन डिपार्टमेंट में नौकरी कर ली,लेकिन इस जॉब में 20 दिन तक
टूर पर रहने की जरूरत थी। मुंबई में रहकर फिल्मों में काम भी तलाशना था ऐसे में वह
अपने काम को इतनी होशियारी से करते कि 20 दिन का
काम मात्र 12 दिन में ही निपट जाता था।
इसी टूर के दौरान एक अनजान व्यक्ति ने उनसे पूछा
कि क्या वह फिल्मों में काम करना चाहते हैं? प्रेम
चोपड़ा ने हां बोला और उन्हीं के साथ रंजीत स्टूडियो जा पहुंचे। रंजीत स्टूडियो
में उनकी मुलाकात जगजीत सेठी से हुई। जो फिल्म चौधरी करनैल सिंह के लिए हीरो की खोज में थे। बस फिर क्या था उन्हें प्रेम चोपड़ा
पसंद आए और यह फिल्म सुपरहिट रही। इस फिल्म के लिए प्रेम चोपड़ा को 2500 रुपये बतौर मेहनताना मिले थे। प्रेम चोपड़ा ने अपनी ऑटोबायोग्राफी
का नाम भी प्रेम नाम है मेरा रखा है।


