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- राम जन्मभूमि- बाबरी मस्जिद जमीन विवाद निपटारा कानून से हो, स्कन्द पुराण और वेद के जरिए नहीं....
Posted by : achhiduniya
02 September 2019
सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्षकार की ओर से वकील राजीव धवन ने कहा मेरे मित्र वैद्यनाथन ने अयोध्या में लोगों द्वारा परिक्रमा करने संबंधी एक दलील दी, लेकिन कोर्ट को मैं बताना चाहता हूं कि पूजा के लिए की जाने वाली भगवान की परिक्रमा सबूत नहीं हो सकती। यहां इसे लेकर इतनी दलीलें दी गईं लेकिन इन्हें सुनने के बाद भी मैं यह नहीं दिखा सकता कि परिक्रमा कहां है। इसलिए यह सबूत नहीं है। हम सिर्फ इसलिए इस पक्ष को मजबूती से देख रहे हैं क्योंकि वहां की शिला पर एक मोर या कमल था।
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| [सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्षकार की ओर से वकील राजीव धवन] |
धवन ने पुराने मुकदमों और फैसलों के हवाले दिए। कहा, देवता
की सम्पत्ति पर कोई अधिकार नहीं, सिर्फ सेवायत का ही होता है।
ब्रिटिश राज में प्रिवी काउंसिल के आदेश का हवाला देते हुए धवन ने अपनी बात रखी। उन्होंने
कहा कि सन 1950 में सूट दाखिल हुआ और निर्मोही अखाड़े ने 1959 में दावा किया। घटना
के 40 साल बाद इन्होंने दावा किया। ये कैसी सेवायत है? श्रद्धालुओं
ने भी पूजा के अधिकार का दावा किया। देवता के कानूनी व्यक्ति या पक्षकार होने पर
धवन ने कहा कि देवता का कोई ज़रूरी/आवश्यक पक्षकार नहीं रहा है। यहां तो देवता और
सेवायत ही आमने-सामने हैं। देवता के लिए अनुच्छेद 32 के तहत कोर्ट में दावा नहीं
किया जा सकता। धवन ने कहा कि महाभारत तो इतिहास की कथा है, लेकिन
रामायण तो काव्य है। क्योंकि वाल्मीकि ने खुद इसे काव्य और कल्पना से लिखा है। रामायण तो राम और उनके भाइयों की कहानी है। तुलसीदास
ने भी मस्जिद के बारे में कुछ भी नहीं लिखा है जबकि उन्होंने राम के बारे में सबसे
बाद में लिखा।


