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- क्या है महत्व,क्यों मनाया जाता है मुहर्रम....?
Posted by : achhiduniya
09 September 2019
इस्लामी मान्यताओं के अनुसार इराक में यजीद नाम का जालिम
बादशाह इंसानियत का दुश्मन था। यजीद खुद को खलीफा मानता था, लेकिन अल्लाह पर उसका कोई विश्वास नहीं था। वह
चाहता था कि हजरत इमाम हुसैन उसके खेमे में शामिल हो जाएं,लेकिन हुसैन को यह मंजूर नहीं था और उन्होंने
यजीद के विरुद्ध जंग का ऐलान कर दिया था। पैगंबर-ए इस्लाम हजरत मोहम्मद के नवासे
हजरत इमाम हुसैन को कर्बला में परिवार और दोस्तों के साथ शहीद कर दिया गया था।
जिस
महीने हुसैन और उनके परिवार को शहीद किया गया था वह मुहर्रम का ही महीना था। मुहर्रम
मातम मनाने और धर्म की रक्षा करने वाले हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद करने का
दिन है। मुहर्रम के महीने में मुसलमान शोक मनाते हैं और अपनी हर खुशी का त्याग कर
देते हैं। मान्यताओं के अनुसार बादशाह
यजीद ने अपनी सत्ता कायम करने के लिए हुसैन और उनके परिवार वालों पर जुल्म किया
और 10 मुहर्रम को उन्हें बेदर्दी से मौत के घाट
उतार दिया।
हुसैन का मकसद खुद को मिटाकर भी इस्लाम और इंसानियत को जिंदा रखना था।
यह धर्म युद्ध इतिहास के पन्नों पर हमेशा-हमेशा के लिए दर्ज हो गया। मुहर्रम कोई
त्योहार नहीं बल्कि यह वह दिन है जो अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक है। मुहर्रम
खुशियों का त्योहार नहीं बल्कि मातम और आंसू बहाने का महीना है। शिया समुदाय के
लोग 10 मुहर्रम के दिन काले कपड़े पहनकर हुसैन और उनके परिवार की शहादत को याद
करते हैं।
हुसैन की शहादत को याद करते हुए
सड़कों पर जुलूस निकाला जाता है और मातम मनाया जाता है। मुहर्रम की नौ और 10 तारीख
को मुसलमान रोजे रखते हैं और मस्जिदों-घरों में इबादत की जाती है। वहीं सुन्नी
समुदाय के लोग मुहर्रम के महीने में 10 दिन तक रोजे रखते हैं। कहा जाता है कि
मुहर्रम के एक रोजे का सबाब 30 रोजों के बराबर मिलता है।



