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- नाम बदलकर भारत में फिर पैर पसार रही गंदी वेब साइट्स [पॉर्न साइट्स]....
Posted by : achhiduniya
01 October 2019
पिछले साल हाईकोर्ट द्वारा तकरीबन
749 पॉर्न वेबसाइट को तुरंत बंद करने के आदेश सरकार को दिए गए जिस पर सरकार ने पूरी ज़ोर आजमाइश
करके इन्हे बंद करवा दिया था। सरकार का साथ कई दिग्गज नेट प्रोवाइड करने वाली सेल्यूलर
कंपनियो [मोबाइल कंपनी] ने दिया था। पिछले साल दिसंबर
में डीओटी के आदेश के बाद जियो, वोडाफोन और
एयरटेल जैसी मुख्य टेलिकॉम कंपनियों ने पॉर्न और चाइल्ड पॉर्न कॉन्टेंट दिखाने
वाली वेबसाइट्स को बैन कर दिया था,लेकिन
दुनिया की दो जानी-मानी पॉर्न वेबसाइट रेडट्यूब और
पॉर्नहब की भारत में वापसी हो गई है।
इसमें सबसे चौंकाने
वाली बात यह है कि इन वेबसाइट्स को ऐक्सेस करने के लिए बैन बाईपास करने की भी
जरूरत नहीं। पॉर्नहब जहां अब .org के साथ उपलब्ध है, वहीं रेडट्यूब को .net के साथ
ऐक्सेस किया जा सकता है।.org ज्यादातर नॉन-प्रॉफिट
ऑर्गनाइजेशन द्वारा इस्तेमाल किया जाता है। वहीं, .net का इस्तेमाल एक्सटेंशन नेटवर्क के लिए होता है। .net डोमेन अधिकतर इंटरनेट, ईमेल और
नेटवर्किंग सर्विस प्रोवाइडर्स द्वारा इस्तेमाल किया जाता है। शुरुआत में बैन करने
के लिए उन वेबसाइट्स को टारगेट किया गया था जो .com डोमेन के साथ आती थीं।
यही मुख्य वजह है कि अब कई वेबसाइट्स .com को छोड़ .org या .net को अपना रही हैं। इन पॉर्न वेबसाइट्स को कई स्क्रीन्स पर ऐक्सेस किया जा सकता है। ब्लॉक्ड वेबसाइट्स को ऐक्सेस करने के लिए वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क, दूसरे ब्राउजर्स, प्रॉक्सी
जैसे तरीके अपनाने की भी जरूरत नहीं पड़ती। अब फिर से स्मार्टफोन और कंप्यूटर पर
पॉर्न कॉन्टेंट को ऐक्सेस किया जा रहा है। डिपार्टमेंट ऑफ टेलिकम्यूनिकेशन्स ने
देश की सभी इंटरनेट सर्विस लाइसेंसीज को एक पत्र लिख पॉर्न वेबसाइट्स को बंद करने
का आदेश दिया था।
भारत सरकार ने साल 2015 में 857 पॉर्न वेबसाइट्स को इसलिए बैन कर
दिया था कि उनके कॉन्टेंट अनैतिक और अश्लील थे। इस बारे में देश के जाने-माने
साइबर लॉ एक्सपर्ट पवन दुग्गल का कहना है कि भारत में साइबर सिक्यॉरिटी के लिए
कड़े कानून लाने की जरूरत है। हाल ही में दिल्ली में हुई बैठक में एक्सपर्ट्स मे
साइबर क्राइम से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई जिसमें चाइल्ड पॉर्न, सेक्सटिंग, सेक्स ट्रैफिकिंग, साइबर ट्रोलिंग और महीलाओं के खिलाफ हिंसा जैसे मुद्दों पर
चर्चा की गई।



