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- भारतीय नन मरियम थ्रेसिया पोप फ्रांसिस द्वारा संत घोषित की गई...
Posted by : achhiduniya
13 October 2019
मई 2014 में कॉन्ग्रीगेशन ऑफ द सिस्टर्स ऑफ द होली फैमिली (CHF) की संस्थापक मरियम थ्रेसिया को रोम के सेंट पीटर्स स्क्वायर में पवित्र यूकेरिस्टिक सेलिब्रेशन समारोह के दौरान पोप फ्रांसिस द्वारा संत घोषित किया गया। केरल की नन के साथ ही ब्रिटिश कार्डिनल जॉन हेनरी न्यूमैन, स्विस लेवीमेन मार्गरेट बेज, ब्राजील की सिस्टर डुल्स लोप्स और इतालवी सिस्टर गिसेपिना वानीनि को भी संत की उपाधि से विभूषित किया गया। मरियम थ्रेसिया इस सदियों पुरानी संस्था में उच्च पद तक पहुंचने वाली केरल की चौथी व्यक्ति बन गई हैं। मरियम थ्रेसिया को उनके जीवन के आधे समय तक केवल थ्रेसिया नाम से जाना जाता था।
यह नाम
उन्हें तीन मई, 1876 को नामकरण संस्कार के दौरान दिया गया। 1904 से वह चाहती थीं कि उन्हें मरियम थ्रेसिया पुकारा जाए क्योंकि
उनका मानना था कि एक सपने में ब्लेस्ड वर्जिन मेरी ने उन्हें उनके नाम में मरियम
जोड़ने को कहा था। उन्हें 1914 में यह नाम दिया गया। चर्च ने
उन्हें एक असाधारण पवित्र व्यक्ति घोषित किया। वेटिकन न्यूज ने कहा,ईसा मसीह की नकल करते हुए उन्होंने गरीबों की मदद की, बीमार की सेवा की और अकेले पड़े लोगों का दर्द दूर किया।
उन्होंने दुनिया के पाप मिटाने के लिए खुद दुख झेला। सिस्टर थ्रेसिया का आठ जून, 1926 को 50 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। पोप जॉन पॉल द्वितीय ने नौ
अप्रैल,
2000 को उन्हें धन्य घोषित किया था।
विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन वेटिकन सिटी के
समारोह में भारतीय शिष्टमंडल का नेतृत्व करने के लिए मौजूद थे। प्रधानमंत्री
नरेन्द्र मोदी ने 29 सितम्बर को अपने मन की बात कार्यक्रम में सिस्टर मरियम थ्रेसिया का जिक्र किया था और कहा
था कि 13 अक्टूबर को पोप फ्रांसिस उन्हें संत घोषित करेंगे जो हर भारतीय
के लिए गर्व की बात है। प्रधानमंत्री ने कहा था,सिस्टर
थ्रेसिया ने 50
साल के अपने छोटे से जीवनकाल में ही मानवता की
भलाई के लिए जो कार्य किए, वो पूरी दुनिया के लिए एक
मिसाल हैं|
सिस्टर थ्रेसिया ने जो भी कार्य किया, उसे निष्ठा और लगन के साथ पूरे समर्पण भाव से पूरा किया। मोदी
ने कहा था कि समाज सेवा और शिक्षा के क्षेत्र से उनका अद्भुत लगाव था। उन्होंने कई
स्कूल, छात्रावास और अनाथालय बनवाए।


