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- पाकिस्तानी सेना अल्पसंख्यकों और महिलाओं पर जुल्म करती है,यहां तक की महिलाओं का बलात्तकार भी करती है,गुंडई पर उतर आई है पाकिस्तान सरकार...मानवाधिकार कार्यकर्ता गुलालई इस्माइल
पाकिस्तानी सेना अल्पसंख्यकों और महिलाओं पर जुल्म करती है,यहां तक की महिलाओं का बलात्तकार भी करती है,गुंडई पर उतर आई है पाकिस्तान सरकार...मानवाधिकार कार्यकर्ता गुलालई इस्माइल
Posted by : achhiduniya
25 October 2019
पश्तूनी मानवाधिकार कार्यकर्ता गुलालई इस्माइल
पाकिस्तानी सेना और सरकार के अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाने को ले कर चर्चा में
आईं। पश्तुनों की पाकिस्तानी हुकूमत के खिलाफ उठती आवाजों को दबाने के लिए
पाकिस्तानी सेना और आतंकवादियों का साथ लिया जा रहा है जो उन्हें यातनाए दे रहे
हैं। उसी अत्याचार का विरोध करने वाली
गुलालई इस्माइल को पाकिस्तानी सरकार ने राजद्रोह के आरोप के तहत दोषी बता कर आवाज
को दबाना चाहा। गुलालई को जब पाकिस्तानी सेना की चाल को भांप लिया तब वह देश छोड़
कर अमेरिकी सरकार से राजनीतिक शरण की मांग करने लगी।
गुलालई ने पाकिस्तानी सेना की
पोल खोलते हुए कहा था कि सेना अल्पसंख्यकों और महिलाओं पर जुल्म करती है। यहां तक
की महिलाओं का बलात्तकार भी करती है। आवाज उठाने पर या तो गायब करा दिया जाता है
या हत्या करा दी जाती है। पाकिस्तान की मानवाधिकार कार्यकर्ता गुलालई इस्माइल ने
पाकिस्तानी सरकार के सड़क-छाप रवैये की पोल खोल कर रख दी। उन्होंने कहा कि खाइबर
पख्तुनख्वा के पश्तूनों पर हो रहे जुल्म के खिलाफ आवाज उठाने की उन्हें सजा दी जा रही है। अब उन्हें सबक सिखाने के लिए
पाकिस्तानी सेना ने उनके पिता को आंतकवादी साजिश बता कर कैद कर लिया है और उनको
यातनाएं दी जा रही है। गुलालई ने ट्वीट कर ये जानकारी दी कि पाकिस्तानी सरकार ने
उन्हें सबक सिखाने के लिए उनके परिवार को
परेशान करना शुरू कर दिया
है। उन्होंने लिखा कि पाकिस्तानी हुकूमत के आदेश पर
मेरे पिता का अपहरण कर आतंकवाद के नाम पर डराने की कोशिश की जा रही है। सरकार सेना
के साथ मिलकर आवाज उठाने वाले लोगों को लगातार निशाना बना रही है। Gulalai
Ismail is a women's rights activist who managed to escape Pakistan to seek
political asylum in the United States in September after being accused of
treason गुलालई इस्माइल के आवाज उठाने के बाद से ही
लगातार उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी जा रही है। पाकिस्तानी सेना व आतंकी
गिरोह के समर्थन से अब इमरान हुकूमत भी पश्तूनों की आजादी के आवाज को दबाने की
कोशिश में लगी हुई है।
गुलालई इससे पहले सीड्स ऑफ पीस नेटवर्क और अवेयर गर्ल्स की
अध्यक्षा के रूप में मानवाधिकार के हनन के खिलाफ काम कर चुकी हैं। एक इंटरव्यू में
उन्होंने बताया था कि पाकिस्तानी सेना से बच के भागने के बाद गुलालई 6 महीने तक देश के सुदूर इलाकों में छिपी रहीं। इसके बाद कुछ
दोस्तों की मदद से पहले श्रीलंका फिर अमेरिका जा पहुंची।



