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- 17 नवंबर को सेवानिवृत्त होने से पहले मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई सुनाएंगे अहम फैसले...
Posted by : achhiduniya
07 November 2019
सीजेआई रंजन गोगोई के सेवानिवृत्त होने में अभी
11 दिन शेष हैं। कोर्ट की सूची के मुताबिक गुरुवार को इनमें से किसी भी मामले में
फैसला नहीं आ रहा है। ऐसे में इन मुकदमों के फैसले के लिए मात्र चार कार्यदिवस बचे
हैं। हालांकि ये अनिवार्य नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश या मुख्य
न्यायाधीश कार्यदिवस पर ही मुकदमों की सुनवाई करें या फैसला सुनाएं। भारत के मुख्य
न्यायाधीश रंजन गोगोई 17 नवंबर को सेवानिवृत्त होने
वाले हैं। सीजेआई को इससे पहले अपने अंतिम चार कार्यदिवस में पांच बड़े फैसले
सुनाने हैं। जिनमें अयोध्या राम मंदिर विवाद, सबरीमाला
मंदिर विवाद,
राफेल लड़ाकू विमान सौदा, राहुल गांधी के खिलाफ अवमानना और भारत के प्रधान न्यायाधीश के
दफ्तर में सूचना का अधिकार लागू होने का मुद्दा शामिल है।
उनकी जगह पर 18 नवंबर को
जस्टिस शरद अरविंद बोबडे भारत के नए
प्रधान न्यायाधीश बन जाएंगे. लेकिन इन 10 दिनों में जस्टिस गोगोई को कई ऐसे फैसले
सुनाने हैं जिससे भारत में बहुत कुछ बदल जाएगा या इन फैसलों का असर काफी प्रभावकारी हो सकता है। जब हम नवंबर महीने में आने वाले सुप्रीम कोर्ट के
फैसलों की बात करते हैं तो सबसे पहले दिमाग में अयोध्या विवाद आता है। इस मामले की
सुनवाई खत्म हो चुकी है और जस्टिस गोगोई ने काफी पहले ही कहा था कि अगर इस पर
सुनवाई तय समय में पूरी हो जाती है तो वह नवंबर में इस पर फैसला सुना सकते हैं। अयोध्या
विवाद 100 सालों से ज्यादा पुराना है। सुप्रीम कोर्ट में जहां विवादित जमीन के
मालिकाना हक को लेकर सुनवाई हो रही थी तो वहीं आम जनता के लिए यह आस्था का सबसे
बड़ा प्रश्न बन गया है। इस विवाद को लेकर कई पार्टियां सत्ता के शीर्ष तक पहुंची
तो कई ऐसी भी पार्टियां रहीं जो हिंदूवादी राजनीति के उभार में अपनी जमीन खो बैठीं।
इस विवाद पर फैसला सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच सुना सकती है जिसकी अगुवाई
प्रधान न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई कर रहे हैं।
प्रधान न्यायाधीश RTI के दायरे में हैं या नहीं केंद्र ने चीफ जस्टिस की सुरक्षा
समीक्षा की,
चिंता जताते हुए कहा- कोई भी CJI को माला पहना सकता है। जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली जिसमें जस्टिस एनवी रामन्ना, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस
दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना शामिल हैं, इस पर
फैसला सुनाएंगे कि क्या सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश सूचना के अधिकार के
दायरे में आते हैं या नहीं। लोकसभा चुनाव के वक्त बड़ा मुद्दा बने राफेल लड़ाकू
विमान सौदे पर भी फैसला आना है। कोर्ट ने 36 राफेल विमानों की खरीद के सौदे की
कोर्ट की निगरानी में जांच कराए जाने की मांग खारिज कर दी थी जिसे भाजपा के पूर्व
नेता यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी सहित अन्य याचिकाकर्ताओं ने पुनर्विचार
याचिका दाखिल कर चुनौती दी है। इसके अलावा ट्रिब्युनल एंड फाइनेंस एक्ट को चुनौती
देने के मामले मे भी फैसला आना है।


