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वकीलों को बोलने की स्वतंत्रता है,जजों की स्वतंत्रता उनके मौन रहने में….चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने दिया वकालत का सक्सेस मंत्र
Posted by : achhiduniya
15 November 2019
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं और आज उनका कोर्ट में आखिरी दिन है।
जस्टिस गोगोई ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता और जजों की आजादी पर कहा कि जजों को
मौन रहकर अपनी स्वतंत्रता का प्रयोग करना चाहिए। सीजेआई ने अपने कार्यकाल के दौरा
प्रेस के व्यवहार की भी सराहना की। जस्टिस गोगोई की ओर से जारी नोट में कहा गया,वकीलों को बोलने की स्वतंत्रता है और यह होनी चाहिए। बेंच के
जजों को स्वतंत्रता का प्रयोग मौन रहकर करना चाहिए। जजों को अपनी आजादी बनाए रखने
के लिए मौन रहना चाहिए। इसका अर्थ यह नहीं है कि उन्हें चुप रहना चाहिए, बल्कि जजों को अपने दायित्वों के निर्वाह के लिए ही बोलना
चाहिए। इसके अलावा उन्हें मौन ही रहना चाहिए।
जस्टिस गोगोई सुप्रीम कोर्ट के उन 4 जजों में से थे जिन्होंने मीडिया के सामने आकर प्रेस
कॉन्फ्रेंस किया था। इस मुद्दे पर उन्होंने कहा प्रेस के सामने जाने का विचार कभी
भी एक चुनाव की तरह नहीं था। उन्होंने कहा, मैंने
एक ऐसे संस्थान के साथ जुड़ने का फैसला किया जिसकी ताकत ही जनमानस का भरोसा और
विश्वास है। विभिन्न मीडिया संस्थानों की ओर से कार्यकाल के आखिरी दिन प्रेस
संबोधन की अपील के बाद सीजेआई ने यह नोट जारी किया। उन्होंने अपने पूरे कार्यकाल
के दौरान प्रेस से मिले सहयोग के लिए आभार जताया। जस्टिस गोगोई ने कहा कि प्रेस ने
दबाव के वक्त में न्यायपालिका की साख को ठेस पहुंचाने वाली झूठी खबरों के खिलाफ
सही रुख अपनाया।

