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- आखिर क्यू मजबूर हुए अजित पवार बीजेपी की शरण में जाने के लिए....?
Posted by : achhiduniya
25 November 2019
अजित पवार के बीजेपी के साथ मिलकर सरकार मे शामिल होने के बाद
चाचा शरद पवार की ओर से उन्हें मनाने की लगातार कोशिशें की जा रही हैं। तमाम
प्रयासों के बाद भी अजित पवार भगवा खेमे से निकलने के लिए तैयार नहीं दिख रहे हैं।
इसके अलावा विद्रोही बनने के बाद अब अजित पवार को यह भी लग रहा है कि बीजेपी के
साथ महाराष्ट्र में सरकार बनाकर ही वह एनसीपी चीफ शरद पवार के उत्तराधिकार/विधानसभा
क्षेत्र की लड़ाई में अपने चाचा की बेटी सुप्रिया सुले से आगे निकल पाएंगे।
शरद
पवार ने शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के बीच चल रही गठबंधन सरकार
बनाने की बातचीत में अंतिम समय तक अजित पवार को डेप्युटी सीएम के लिए नहीं चुना
था। यह बात अजित पवार को नागवार लगी थी। जयंत पाटिल को शरद पवार डेप्युटी सीएम
बनाना चाहते थे। ऐसी सूरत में अगर अजित पवार वापस अपने चाचा के पास जाते
हैं तो उन्हें पार्टी में कम ओहदे से संतोष करना पड़ेगा, वहीं अगर वह बीजेपी के साथ बने रहते हैं और फडणवीस सरकार बहुमत
हासिल नहीं कर पाती है तो उन्हें मराठा दिग्गज शरद पवार के साथ अपने अस्तित्व
की लड़ाई लड़नी पड़ेगी।
ईडी ने शरद
पवार,
उनके भतीजे अजित पवार और अन्य के खिलाफ इस 25
हजार करोड़ के घोटाले में मुकदमा दर्ज किया है। अजित पवार को ईडी का डर सता रहा
है। सूत्रों के मुताबिक ईडी की जांच शुरू होने के बाद अजित पवार ने यह महसूस किया
था कि जब शरद पवार के खिलाफ जांच शुरू हुई तो पूरी पार्टी उनके पीछे खड़ी हो गई,लेकिन इसी तरह की स्थिति का उन्हें सामना करना पड़ रहा है, पार्टी ने उन्हें अकेले कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए छोड़ दिया है।


