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- आनन-फानन में मुख्यमंत्री दवेंद्र फडणवीस और उप-मुख्यमंत्री अजित पवार ने संभाला अपना कार्यभार.....
Posted by : achhiduniya
25 November 2019
करीब 15 दिनों से सरकार बनाने को लेकर आम राय
नहीं बना पाने वाली शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के कंफ्यूजन का फायदा उठाते हुए, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उप-मुख्यमंत्री अजित पवार शपथ
ग्रहण के 48 घंटे बाद सोमवार को अचानक
मंत्रालय पहुंच गए। दोनों ने आनन-फानन में अपना कार्यभार ग्रहण कर लिया। मुख्यमंत्री का कार्यभार संभालते ही फडणवीस ने सबसे पहले मुख्यमंत्री राहत कोष के
तहत कुसुम वेनगुरलेकर नाम की महिला को आर्थिक सहायता के लिए चेक सौंपा है। उधर तीनों पार्टी के नेता राजभव पहुंचे और
राज्यपाल को समर्थन पत्र सौंपते हुए सरकार बनाने का दावा पेश किया। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये है कि जब मामले की
सुनवाई देश की सबसे बड़ी अदालत में चल रही है, तो सभी
राजनीतिक दल इतनी हड़बड़ी में क्यों थे? कोई भी
पक्ष सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार क्यों नहीं कर रहा है। दोनों पक्ष सुप्रीम
कोर्ट में सुनवाई के पहले अपनी-अपनी दलीलें मजबूत कर लेना चाहते थे।
देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार सर्वोच्च अदालत को ये बताना चाहते थे कि बतौर मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री दोनों ने अपनी जिम्मेदारियां संभाल ली हैं, ताकि अगर विपरीत हालात में सुप्रीम कोर्ट यथा स्थिति बनाए रखने को कहे, तो वो अपना काम जारी रख सके। दूसरी ओर विपक्ष (शिवसेना-एनसीपी और कांग्रेस) का गठबंधन राज्यपाल के सामने सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के पहले सरकार बनाने का दावा पेश करना चाहता था। ऐसा इसलिए किया गया, क्योंकि सरकार के गठन से पहले राज्यपाल के सामने दावा पेश करना जरूरी होता है। अगर सुनवाई के पहले दावा पेश नहीं किया जाता, तो विपक्ष की देवेंद्र फडणवीस की नियुक्ति रद्द करते हुए सरकार बनाने का मौका देने की मांग अपने आप ही रद्द हो जाती।
देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार सर्वोच्च अदालत को ये बताना चाहते थे कि बतौर मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री दोनों ने अपनी जिम्मेदारियां संभाल ली हैं, ताकि अगर विपरीत हालात में सुप्रीम कोर्ट यथा स्थिति बनाए रखने को कहे, तो वो अपना काम जारी रख सके। दूसरी ओर विपक्ष (शिवसेना-एनसीपी और कांग्रेस) का गठबंधन राज्यपाल के सामने सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के पहले सरकार बनाने का दावा पेश करना चाहता था। ऐसा इसलिए किया गया, क्योंकि सरकार के गठन से पहले राज्यपाल के सामने दावा पेश करना जरूरी होता है। अगर सुनवाई के पहले दावा पेश नहीं किया जाता, तो विपक्ष की देवेंद्र फडणवीस की नियुक्ति रद्द करते हुए सरकार बनाने का मौका देने की मांग अपने आप ही रद्द हो जाती।

