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PNB- यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के बाद इलाहबाद बैंक के इंडियन बैंक में विलय को सैद्धांतिक मंजूरी दी सरकार ने...ग्राहको को होगा कितना नफा-नुकसान....?
Posted by : achhiduniya
20 November 2019
बीते सोमवार को पंजाब नेशनल बैंक (PNB) और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया को अन्य सरकारी बैंकों के साथ विलय के
लिए सरकार की सैद्धांतिक मंजूरी मिली थी। बैंकों के विलय से खाताधारकों पर कोई असर
नहीं होगा,लेकिन उनका थोड़ा काम जरूर बढ़ जाएगा। इस फैसले से आम ग्राहकों
को कई काम करने पड़ सकते हैं। अब सरकार ने इलाहाबाद बैंक को इंडियन बैंक में विलय
के लिए उसे सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इलाहबाद बैंक ने शेयर बाजार को दी सूचना
में कहा, बैंक को सरकार, वित्त मंत्रालय, वित्तीय सेवा विभाग से पत्र मिला है। इसके अनुसार इलाहबाद बैंक
के इंडियन बैंक में विलय को सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है।
सरकार ने अगस्त में
सार्वजनिक क्षेत्र के दस बैंकों में चार में विलय की घोषणा की थी। इस पहल का मकसद
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को वैश्विक आकार का बैंक बनाना है। इस घोषणा के तहत
यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया और ओरिएंटल बैंक ऑफ कामर्स का विलय पंजाब नेशनल बैंक में
होगा। वहीं सिंडिकेट बैंक का केनरा बैंक और इलाहाबाद बैंक का इंडियन बैंक में विलय
होगा। वहीं आंध्रा बैंक और कॉर्पोरेशन बैंक का यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में विलय
होगा। ग्राहकों पर क्या पड़ेगा असर? ग्राहकों
को नया अकाउंट नंबर और कस्टमर आईडी मिल सकता है।
जिन ग्राहकों को नए अकाउंट नंबर या IFSC कोड मिलेंगे, उन्हें नए डीटेल्स इनकम टैक्स डिपार्टमेंट, इंश्योरंस कंपनियों, म्यूचुअल फंड, नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) आदि में अपडेट करवाने होंगे। SIP या लोन EMI के लिए ग्राहकों को नया इंस्ट्रक्शन फॉर्म भरना पड़ सकता है। नई चेकबुक, डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड इशू हो सकता है। फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) या रेकरिंग डिपॉजिट (आरडी) पर मिलने वाले ब्याज में कोई बदलाव नहीं होगा।
जिन ग्राहकों को नए अकाउंट नंबर या IFSC कोड मिलेंगे, उन्हें नए डीटेल्स इनकम टैक्स डिपार्टमेंट, इंश्योरंस कंपनियों, म्यूचुअल फंड, नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) आदि में अपडेट करवाने होंगे। SIP या लोन EMI के लिए ग्राहकों को नया इंस्ट्रक्शन फॉर्म भरना पड़ सकता है। नई चेकबुक, डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड इशू हो सकता है। फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) या रेकरिंग डिपॉजिट (आरडी) पर मिलने वाले ब्याज में कोई बदलाव नहीं होगा।
जिन ब्याज दरों पर व्हीकल लोन, होम लोन, पर्सनल लोन आदि लिए गए हैं, उनमें
कोई बदलाव नहीं होगा। कुछ शाखाएं बंद हो सकती हैं, इसलिए
ग्राहकों को नई शाखाओं में जाना पड़ सकता है। मर्जर के बाद एंटिटी को सभी
इलेक्ट्रॉनिक क्लीयरिंग सर्विस (ECS) निर्देशों और पोस्ट डेटेड चेक
को क्लीयर करना होगा।



