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- RCEP [क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी] समझौते में शामिल नहीं होने का निर्णय लिया भारत ने....
Posted by : achhiduniya
04 November 2019
भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि मौजूदा हालात
में भारत का मानना है कि उसका RCEP [क्षेत्रीय
व्यापक आर्थिक भागीदारी] में शामिल होना उचित नहीं होगा। मंत्रालय ने यह भी कहा कि
अनसुलझे मुद्दों के कारण भारत का क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) में
शामिल नहीं होने का निर्णय लिया है। साथ ही आरसीईपी में शामिल नहीं होने का निर्णय
राष्ट्रहित को ध्यान में रखकर लिया गया है। RCEP [क्षेत्रीय
व्यापक आर्थिक भागीदारी] वार्ताओं में भारत की चिंताओं को दूर नहीं किया जा सका
है। इसके मद्देनजर भारत ने यह फैसला किया है। सूत्रों ने कहा कि आरसीईपी में भारत
का रुख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मजबूत नेतृत्व और दुनिया में भारत के बढ़ते
कद को दर्शाता है।
भारत के इस फैसले से भारतीय किसानों, सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उपक्रमों
(एमएसएमई) और डेयरी क्षेत्र को बड़ी मदद मिलेगी। आरसीईपी शिखर सम्मेलन में अपने
भाषण में पीएम मोदी ने कहा,भारत अधिक से अधिक क्षेत्रीय
एकीकरण के साथ-साथ मुक्त व्यापार और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के पालन
के लिए खड़ा है। भारत प्रारंभ से ही आरसीईपी वार्ता में सक्रिय, रचनात्मक और सार्थक रूप से लगा हुआ है। भारत ने हड़ताली संतुलन
के पोषित उद्देश्य के लिए, देने और लेने की भावना से काम
किया है। उन्होंने कहा,आज जब हम आरसीईपी वार्ता के
सात वर्षों के दौरान देखते हैं, तो वैश्विक आर्थिक और व्यापार
परिदृश्य सहित कई चीजें बदल गई हैं। हम इन परिवर्तनों को नजरअंदाज नहीं कर सकते।
आरसीईपी
समझौते का वर्तमान स्वरूप आरसीईपी के मूल सिद्धांत और सहमत मार्गदर्शक सिद्धांतों
को पूरी तरह से प्रतिबिंबित नहीं करता है। यह संतोषजनक रूप से भारत के उत्कृष्ट
मुद्दों और चिंताओं को भी संबोधित नहीं करता है ऐसी स्थिति में, भारत के लिए RCEP समझौते में शामिल होना संभव
नहीं है। इस मंच पर भारत का रुख काफी व्यावहारिक रहा है। भारत ने जहां गरीबों के
हितों के संरक्षण की बात की वहीं देश के सेवा क्षेत्र को लाभ की स्थिति देने का भी
प्रयास किया। सूत्रों ने बताया कि भारत ने विभिन्न क्षेत्रों में वैश्विक
प्रतिस्पर्धा को खोलने में कोई हिचकिचाहट नहीं दिखाई। इसके साथ ही मजबूती से यह
बात रखी कि इसका जो भी नतीजा आए वह सभी देशों और सभी क्षेत्रों के अनुकूल हो। आरसीईपी
में दस आसियान देश और उनके छह मुक्त व्यापार भागीदार चीन, भारत, जापान, दक्षिण, कोरिया, भारत, आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड
शामिल हैं। आरसीईपी करार का मकसद दुनिया का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार क्षेत्र बनाना
है। 16 देशों के इस समूह की आबादी 3.6 अरब है।
यह दुनिया की करीब आधी आबादी है। अब भारत RCEP में शामिल नहीं होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के हित में
निर्णय लिया है। भारत के इस रुख को विश्वस्तर पर पीएम मोदी के मजबूत नेतृत्व और
दुनिया में भारत के बढ़ते कद का एक मजबूत प्रतिबिंब के रूप में भी देखा जा रहा है।
भारत के इस निर्णय से भारत के किसानों, MSMEs और डेयरी
क्षेत्र को बहुत मदद मिलेगी। भारत का रुख
गरीबों के हितों की रक्षा करने वाला माना जा रहा है।



