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- रसोई में उपयोग किए जा चुके खाद्य तेल [कुकिंग ऑयल] से बायो-डीज़ल बनाने की तैयारी शुरू...
Posted by : achhiduniya
07 December 2019
भारतीय पेट्रोलियम संस्थान के निदेशक डॉक्टर रंजन
रे ने कहा कि तीन बार इस्तेमाल हो चुके खाद्य तेल से बायो-डीज़ल भी बनाया जा सकता
है और जेट फ़्यूल भी। उन्होंने कहा कि आईआईपी का इरादा है कि देश के कम से कम 10
प्रतिशत गांवों में इस्तेमाल किए जा चुके खाद्य तेल से बायो-डीज़ल बनाने का प्लांट
लगाया जाए। इससे एक तरफ जहां लोगों को घातक हो चुके खाद्य तेल से बचाया जा सकेगा, वहीं देश में आयात किए जाने वाले बायो-डीज़ल में भी कमी लाई जा
सकेगी। भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (IIP) में
लगाए गए प्लांट में अब इस्तेमाल किए जा चुके खाद्य तेल से बायो-डीज़ल बनाया जाएगा।
एक समारोह में पहली रीपर्पज़ यूज़्ड कुकिंग ऑयल (रुको) एक्सप्रेस झंडी दिखाकर
आईआईपी में लगाए गए प्लांट के लिए रवाना की गई। राज्य के सचिव एवं खाद्य सुरक्षा
आयुक्त पंकज पांडेय, भारतीय पैट्रोलियम संस्थान के
निदेशक रंजन रे और गति फाउंडेशन के अध्यक्ष अनूप नौटियाल ने संयुक्त रूप से हरी
झंडी दिखा कर 300 लीटर यूज़्ड खाद्य तेल के साथ रुको एक्सप्रेस को रवाना किया।
डॉक्टर रंजन रे ने बताया कि आईआईपी 20 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से यूज़्ड ऑयल
खरीदेगा। इस तेल का 90 प्रतिशत हिस्सा बायो-डीज़ल बनाया जा सकेगा यानी 100 लीटर
यूज़्ड कुकिंग ऑयल से लगभग 90 लीटर बायो-डीज़ल बनेगा। आईआईपी के सीनियर साइंटिस्ट
डॉक्टर नीरज अत्रे ने इस मौके पर तेल से बायो-डीज़ल बनाने का प्रयोग करके भी
दिखाया।
उन्होंने कहा कि 50 लीटर तक यूज़्ड कुकिंग ऑयल से बायो-डीज़ल बनाने का
प्लांट एक ट्रक में लगाया जा सकता है। बड़े कारोबारी बारी-बारी से इस प्लांट को
अपने यहां मंगवाकर अपने खराब हो चुके तेल का बायो-डीज़ल बना सकते हैं। खाद्य
सुरक्षा आयुक्त डॉक्टर पंकज पांडेय ने होटलों, रेस्टोरेंट
और खाद्य सामग्री बनाने वाले अन्य संस्थानों से अपील की कि वे तीन से ज़्यादा बार
कुकिंग ऑयल का इस्तेमाल न करें और तीन बार इस्तेमाल के बाद बचा हुए तेल बायो डीज़ल
बनाने के लिए दे दें। गति फाउंडेशन के
अनूप नौटियाल ने बताया कि हर व्यक्ति एक महीने में लगभग डेढ़ लीटर खाद्य तेल इस्तेमाल
करता है। वर्ष 2017 में देश में कुल 2,300
करोड़ टन इस्तेमाल किया गया था और 2030 तक इसके 3,400 टन
प्रतिवर्ष पहुंचने की संभावना है। उन्होंने कहा कि यदि हर व्यक्ति का हिस्से का
यूज़्ड कुकिंग ऑयल जमा किया जाए तो देश बायो डीज़ल के उत्पादन में काफी हद तक आत्मनिर्भर
हो जाएगा।


